Friday, June 20, 2008

केरल और पीने का पानी : पानी रे पानी तेरा रंग कैसा ?

केरल के किसी भोजनालय में अगर आप पानी माँग रहे हों तो आपको ज़रा सजग रहना होगा। वेटर आप से पूछेगा कि आप ठंडा पानी पीना चाहेंगे या नार्मल। ठंडा कहा तब तो ठीक है पर अगर नार्मल कह दिया तो वो आपको हल्का गर्म पानी (जितना आप गार्गिल के लिए इस्तेमाल करते हैं) ही पेश करेगा। इन दोनों के बीच में भी पीने के पानी की वैरायटी होती है ये समझाने में हमें दो दिन लग गए।

खैर मामला यहीं खत्म हो जाता तो गनीमत थी। मुन्नार गए तो रिसार्ट के रेस्तराँ में सादे जल के साथ बगल वाले गिलास में एक हरे रंग का पेय दिखा। पूछने पर वेटर ने बताया कि ये पानी है। हमें लगा भाषा की दिक्कत की वज़ह से वो प्रश्न नहीं समझ पाया है। हम सब ने उस पेय को दूर से सलाम किया और चलते बने। दूसरे दिन कानन देवन के गेस्ट हाउस में ठहरे तो भी पानी में कुछ जीरे जैसा स्वाद लगा । रसोईये से पता चला कि ये हर्बल वाटर (Herbal Water) है। पर कोट्टायम में जब हम बैकवॉटर का मजा ले रहे थे तो फिर हल्का गर्म हर्बल वाटर पीने को मिला। इस बार इसका रंग हल्का लाल था।



हर्बल वाटर में किन पौधों की पत्तियों को उबाल कर बनाया जाता है ये तो हम नहीं जान सके पर हमारा मलयाली चालक ये जरूर बता गया कि केरल में खाने के साथ हरबल वॉटर पीने का प्रचलन वहाँ की प्राचीन आर्युर्वेदिक परंपरा की देन है। लोग कहते हैं कि गुनगुने हर्बल वॉटर को पीने से शरीर को पानी की व्याधियाँ नहीं छू पातीं।

कहिए है ना ये मज़ेदार दवा?

6 comments:

  1. मनीष भाई.. मन प्रस्सन हो जाता है... यहा आकर

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  2. बिलकुल जी.. मैंने भी मुन्नार में ऐसा ही कुछ झेला था..
    मगर हर्बल पानी का स्वाद बहुत अच्छा था..

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  3. बढ़िया जानकारी लगी।

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  4. चलिए ये भी अच्छा है... मैं तो डर गया था की कहीं प्रदूषित होके तो ऐसा नहीं है.

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  5. ये बढ़िया जानकारी दे दी आपने वरना दो दिन हमारे भी जाते समझने में. बहुत आभार.

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  6. पानी गर्म तो नही था ...हमें किसी ने ऐसा गर्म पानी पकड़ा दिया था.....

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