Wednesday, December 15, 2010

गाँधी मीनार, हीराकुड बाँध : कितनी अनूठी थी वो हरियाली और कितना रूमानी था वो रास्ता ?

इससे पहले कि आपको आज मैं हीराकुड बाँध के उत्तरी छोर पर बनी गाँधी मीनार की ओर ले चलूँ एक भ्रांति दूर कर ली जाए। अक्सर हम लोग इस बाँध को हीराकुंड बोल जाते हैं और लोगों को इस नाम पर इस लिए भी संशय नहीं होता क्यूँकि हिंदी में कुंड का शाब्दिक अर्थ, सरोवर से मेल खाता है। पर ये गलत है। इस बाँध का सही नाम हीराकुड (Hirakud) है। पिछली बार गाँधी मीनार की उल्लेख करते हुए मैंने कहा था कि इसमें एक खास खूबी है जो इसे जवाहर मीनार से अलग करती है।

यह खूबी है इसका ऊपरी प्लेटफार्म जो मीनार के ऊपर अवस्थित है। ये प्लेटफार्म चारों ओर घूम सकता है। घुमावदार सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते हुए प्लेटफार्म पर पहुँचा जा सकता है। फिर मोटर का बटन दबाने की देर है और प्लेटफार्म का घूमना शुरु। गाँधी मीनार का उद्घाटन उड़ीसा के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरेकृष्ण माहताब ने मार्च 1959 में किया था। हीराकुड बाँध की यात्रा गाँधी मीनार पर जाए बिना पूरी नहीं मानी जा सकती। इस मीनार पर खड़े होकर तीन सौ साठ डिग्री के कोण पर आप जिधर नज़र घुमाएँगे प्रकृति अपने अद्भुत रूप में आपके सामने होगी। तो आइए शुरु करते हैं 360 डिग्री का ये सफ़र....

बारिश से भींगी सर्पीलाकार सड़कों का जाल , दूर दराज दिखते मकान और घास चरते मवेशी



गाँधी मीनार के पास बना ये उद्यान शाम को अपने आसपास की झिलमिलाती रोशनियों से जब नहाता है तो और हसीन दिखता है...

गाँधी मीनार हो या जवाहर मीनार चारों ओर फैली महानदी की विशाल जलराशि की सत्ता को कोई चुनौती देता प्रतीत होता है तो ये पहाड़ियाँ और उनपर पनपे ये घने जंगल





क्या आपको नहीं लगता ये बाँध क्या कुछ लकीरें भर है। सीधी खींची मटमैली, हरी और काली लकीरें...


मीनार के ठीक नीचे का उद्यान...


और इस हरियाली और ऐसे रास्ते को देखकर भला कौन मंत्रमुग्ध ना हो जाए ?


पश्चिमी घाट तो अपने हरे भरे पहाड़ों के लिए विख्यात हैं ही पूर्वी घाट भी कम नहीं..

हमारा अगला सफ़र उन्हीं सर्पीलाकार सड़कों से हो कर था जो बाँध के जलमग्न क्षेत्र और पहाड़ियों के बीच सीमा का काम करती हैं। अगली पोस्ट में दिखाएँगे आपको हीराकुड से निकलती मुख्य नहरें और मछली पकड़ने का एक अनोखा तरीका...

 सफर हीराकुड बाँध का : इस श्रृंखला की सारी कड़ियाँ

    10 comments:

    1. नयनाभिराम चित्र और कमाल की जानकारी...आनंद आ गया...

      नीरज

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    2. Manish I want your next article in Hans. Come on dont waste your talent.

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    3. ऐसी हरियाली सालो भर होती है या ? आप किस समय गए थे वहां ?

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    4. क्या बात है?
      आजकल आपके और मेरे “मुसाफिर हूं यारों” पर बांधों की चर्चा चल रही है। एक तरफ हीराकुड है तो दूसरी तरफ भाखडा।
      लगे रहिये भाई, हम भी लगे पडे हैं।

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    5. अभिषेक मैं वहाँ पिछले साल दशहरा में यानि अक्टूबर में गया था।

      नीरज जाट अरे बाँध क्या अभी तो हम लोग एक जगह से ही होकर लौटे हैं। उदयपुर से हो के मैं भी आया हूँ पर एक बात अच्छी रही कि उदयपुर में मैं कुंभलगढ़, रनकपुर, एकलिंगी और सज्जनगढ़ गया तो तुम हल्दीघाटी और नाथद्वारा देख आए।

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    7. वाह चित्र देखकर मज़ा आ गया. किसी ने टोका नहीं था ! वर्ना इस तरह की जगहों पर सरकार को सदा यही लगता है कि आतंकवादियों के पास कैमरे नहीं होते इसलिए वे हर फ़ोटो खीचने वाले को इन डैमों की फोटो खींचने के लिए भेजते रहते हैं

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    8. बारिश से भींगी सर्पीलाकार सड़कों का जाल...बेहद सुन्दर तस्वीर.
      चित्रों में वहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती बहुत ही मनोहारी लग रही है .

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