Wednesday, February 13, 2013

रंगीलो राजस्थान : सफ़र माउंट आबू से जोधपुर का..

राजस्थान के अपने यात्रा वृत्तांत में आपको मैं उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, राणकपुर और माउंट आबू की सैर करा चुका हूँ। पर माउंट आबू के बारे में लिखने के बाद अपनी जापान यात्रा की वज़ह से मैंने अपनी इस श्रृंखला को विराम दे दिया था। आइए इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए चलते हैं आज माउंट आबू से जोधपुर के सफ़र पर। माउंट आबू से जोधपुर की दूरी लगभग 270 किमी की है जिसे पूरा करने में करीब पाँच घंटे लग ही जाते हैं।

माउंट आबू से जोधपुर जाने के लिए अगली सुबह जब हम उठे तो बाहर कोहरे की घनी चादर देख वापस अपने कमरे में दुबक लिए। हमारी योजना तो ये थी कि नौ बजे तक आबू की पहाड़ियों से कूच कर देंगे ताकि बीच में  विश्राम लेते हुए भी दो बजते बजते जोधपुर पहुँच जाएँ। पर कोहरे के बीच माउंट आबू के घुमावदार रास्तों में जाने का खतरा कौन मोल लेता ? लिहाजा सामान गाड़ी में चढ़ा कर हम मौसम के साफ होने का इंतज़ार करने लगे। कुछ ही देर में हवा के साथ हल्की बूँदा बाँदी शुरु हो गई और बादल भी छँटने लगे। आखिरकार दस बजे हमने माउंट आबू छोड़ दिया।




आबू घाटी के घुमावदार रास्तों पर एक ओर तो  पहाड़ियाँ नज़र आ रही थीं तो दूसरी ओर मारवाड़ के दूर दूर तक फैले इन मैदानी इलाकों की झलकें मिल रही थीं। थोड़ी ही देर में आबू पर्वत हमसे दूर जा चुका था। बादलों के घने झुंड अभी भी उसके उच्च शिखरों के आस पास मँडरा रहे थे।



आबू रोड से पिंडवारा तक का सफ़र तो बेहद शानदार था। बारिश के बाद की ठंडी हवा और फोर लेन रोड पर फर्राटे से भागती अपनी गाड़ी ने आबू के घुमावदार रास्तों की सारी थकान दूर कर दी थी। पर ये स्थिति देर तक नहीं बनी रही।



पिंडवारा के बाद थोड़ी ही देर में रोड की चौड़ाई आधी हो गई और ट्राफिक भी बढ़ गया। रही सही कसर रास्ते में फँसे इस ट्रक ने पूरी कर दी। ट्रक को खींच कर रास्ता बनाने में आधा घंटा लग गया।


जोधपुर जैसे जैसे करीब आ रहा था वनस्पति की सघनता घटती जा रही थी। सड़क के दोनों ओर अब पेड़ों की जगह इन हरी भरी झाड़ियों ने ले ली थी।


हम लोगों ने सोचा था कि दिन का भोजन सीधे जोधपुर में करेंगे। पर अब ये संभव नहीं लग रहा था। खाने के लिए एक ढाबे में रुके तो पता चला कि वहाँ जो भी खाओ अपनी मर्जी से  यानि Pay as you wish वाला फंडा है। तीन बजे हम लोग शहर के परकोटों में दाखिल हो चुके थे। रास्ते में हाथों से दरी बनाने के कई छोटे मोटे कुटीर उद्योग थे। चालक के कहने पर उनमें से एक में हम गए। दरी खरीदने की मंशा तो नहीं थी पर वहाँ जाने से उसे बनाने में की जाने वाली मेहनत का अंदाजा जरूर हो गया।



जोधपुर एक बड़ा शहर है। राजस्थान में जयपुर के बाद आबादी के हिसाब से ये दूसरे स्थान पर है। हमारा होटल  नए जोधपुर से पुराने शहर को मिलाने वाली सड़क पर था। होटल में थोड़ा आराम करने के बाद शाम पाँच बजे आसपास के बाजारों की सैर करने का कार्यक्रम बना । साड़ियों और फर्निशिंग की दुकानों में कुछ समय बिताने के बाद आगे बढ़े.तो  मिठाई की काफी बड़ी दुकान दिखाई दी। जोधपुर की मिठाई और नमकीन के चर्चे हमने पहले से ही सुन रखे थे और सच स्वाद के मामले में हमें जोधपुर ने ज़रा भी निराश नहीं किया। वहाँ के सफेद रसगुल्ले तो मुँह में जाकर यूँ गायब हो जाते कि पता ही नहीं लगता था कि हमने कुछ खाया भी है। नतीजा साढ़े तीन लोगों के हमारे समूह ने बीस रसगुल्लों पर दो किश्तों में रात तक हाथ साफ कर लिया। नए शहर के बाजारों की सैर करने के बाद जी में आया कि क्यूँ ना पुराने शहर की ओर भी चहलकदमी की जाए।

जोधपुर का पुराना शहर देश के बाकी शहरों के पुराने इलाकों जैसा ही दिखा। वही संकरी सड़कें,भीड़ और गंदगी का अंबार। पर पुराने शहर का प्रवेश द्वार पर बना ये घंटा घर जरूर अपनी खूबसूरती से विस्मित कर गया।



हमारा अगला दिन जोधपुर की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने में बीता। राजस्थान के किलों में सबसे अधिक उत्सुकता मुझे कुंभलगढ़ और चित्तौड़गढ़ को देखने में थी क्यूँकि उनसे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएँ स्कूल के दिनों में पढ़ी थीं। वैसे भी पराक्रम के मामले में मेवाड़ नरेश अपने पड़ोसी मारवाड़ के राजाओं से आगे रहे इसलिए उनके बनाए किलों में कुछ खास होगा इसकी ज्यादा उम्मीद मुझे नहीं थी। पर जोधपुर के मेहरानगढ़ किले को देखने के बाद समझ आया कि मुझे अपनी धारणा बदल लेनी चाहिए। ऐसा क्यूँ हुआ जानते हैं इस श्रृंखला की अगली कड़ी में..

11 comments:

  1. Waiting for more from Jodhpur.

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    1. समझो ये महिना जोधपुर के नाम..

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    1. पसंद करने के लिए शुक्रिया मृत्युंजय !

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  3. Jodhpur se aagey bikaner bhi ho aao,intjar rahega

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    1. महेंद्र जी मेरी इस राजस्थान यात्रा का समापन बीकानेर से ही होगा। पर पहले ज़रा जोधपुर और जैसलमेर कें रंगों में आपको रंग दें।

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  4. बहुत सुन्दर यात्रा वृत्तान्त..चित्रपट सा।

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    1. शुक्रिया प्रवीण !

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  5. अगली कड़ी का इंतजार रहेगा।

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  6. राजस्थान के यात्रा वृत में आपका साथ हमेशा मिला है। शुक्रिया !

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  7. man karta he ki aap ke sath 1 visit ho jaye to maja aa jaye......

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