Thursday, June 13, 2013

आइए आपकी मुलाकात कराएँ गरमपानी के इस विशालकाय मेढक से ! (Meet the large frog of Garampani, Nainital !)

गत वर्ष नैनीताल से अल्मौड़ा के घुमावदार रास्ते में जब इस जगह के साइनबोर्ड के साथ बगल में बहती कोसी नदी का प्रवाह सुनाई दिया तो गाड़ी रुकवाए बिना रहा नहीं गया। नाम था गरमपानी। गरम पानी भी किसी जगह का नाम हो सकता है ये मेरी सोच के परे था। बाद में पता चला कि ऐसा ही एक गरमपानी हिमाचल में भी हैजो कि गाड़ी से शिमला से दो घंटे की दूरी पर है। इस जगह का नाम वैसे तत्तापानी है। पंजाबी में तत्ता का मतलब गरम से लिया जाता है। इसके आलावा असम के कार्बी एंगलांग जिले में गोलाघाट के पास गरमपानी नाम का एक अभ्यारण्य भी है। पर मैं जिस गरमपानी की बात कर रहा हूँ वो नैनीताल से करीबन तीस किमी की दूरी पर है और नैनीताल से रानीखेत (Ranikhet) या अल्मोड़ा (Almora) के रास्ते में भोवाली (Bhowali)  और कैंची धाम (Kainchi Dham) पार करने के बाद आता है।

नदी पर एक छोटा सा पुल बना था। पुल पर चढ़ते ही एक अजीब सी चट्टान नदी के ठीक बीचो बीच विराज़मान दिखाई दी। तत्काल मुझे इस छोटे से कस्बे गरमपानी की लोकप्रियता का राज समझ आ गया। दरअसल वो चट्टान एक विशालकाय मेढ़क का आकार लिए हुई थी। रही सही कसर ग्राम सभा सिल्टूनी वालों ने चट्टान में सफेद रंग की आँख बना कर, कर दी थी ताकि इस चट्टानी मेढक को ना देख पाने की भूल कोई ना कर सके।



वैसे चट्टानों का ये मेढ़क प्रेम भारत के लिए नया नहीं है। जिन्होंने राजस्थान में माउंट आबू की यात्रा की है वे भली भांति जानते होंगे कि वहाँ भी एक टोड रॉक है जिसे देखकर ऐसा लगता है कि वो टोड किसी भी क्षण नक्की झील में छलांग मारने को बेक़रार है। शायद उसे रोकने के लिए ही सेना के जवान उसके गले पर रस्सी की नकेल डालकर उसकी छाती पर चढ़ा उतरा करते हैं।:)


कोसी नदी, अल्मोड़ा के लोगों के लिए पीने के पानी का प्रमुख स्रोत है। नदी के कलकल बहते जल को पास से महसूस करने के लिए मैंने भी अपने लिए एक अच्छी चट्टान तलाश ली। पानी में पैर डाला ताकि इस नाम के पीछे के रहस्य का पर्दाफाश हो पर ये क्या.. पानी तो पहाड़ों जैसा ही ठंडा ! यानि नाम गरम पानी, पर पानी में गर्मी का नामो निशान नहीं। मुझे तो अनायास ही वो कहावत याद आ गई आँख का अंधा नाम नयनसुख !:) ख़ैर हो सकता हो इस नाम के पीछे कोई और कहानी हो या किसी समय यहाँ गंधक युक्त गर्म जल का प्रवाह होता हो जो समय के साथ भूकंपियों गतिविधियों की वजह से खत्म हो गया हो। बहरहाल आपको पता हो तो जरूर बताइए।



ये तो हुई गरमपानी की बात। उत्तराखंड की दंतकथाओं में कोसी एक शापित नदी मानी जाती है जिसकी कोई पूजा नहीं करता। अगली पोस्ट में जानेंगे कौसानी से रामनगर तक बहने वाली इस शापित कोसी की कहानी...

47 comments:

  1. रोचक जानकारी

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    1. सराहने का शुक्रिया !

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  2. जानकारी के आभाव न देख सका.....चलो आपके लेख से जानकारी हुई

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    1. आप तो कैंची धाम में रुके थे उससे कुछ ही आगे गरमपानी और ये काला मेढक है।

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  3. सच में मेंढक ही लग रहा है..

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    1. तो आपको पहले शक़ था क्या ?:)

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  4. इस तरह की कलाकृति भारत में कई जगह देखने को मिल जाती हैं ।

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    1. माउंट आबू में तो मैंने देखी थी शायद अन्य जगहों में भी हो...

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    1. haan kyun nahin aapke 'state' ka jo hai :)

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  6. रोचक जानकारी

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    1. शु्क्रिया !

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  7. pls carry on aapki travelling inspiring hai.

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    1. Nice to know that Shangrila !

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  8. That's interesting! Was it created by nature or carved into that shape by an enterprising villager?

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    1. It seems to be created by nature only. Villagers have just created an eye in white color to make it more clear.

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  9. वाह.. चट्टान का मेढ़क तो बिलकुल सजीव लग रहा है.. :) पर 'गरमपानी' का पानी थोड़ा तो गरम होना ही चाहिए था.. :(

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    1. हाँ वही तो :)

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    1. चलिए आपकी फ़र्माइश पर तीसरी फोटो भी हाज़िर है :)

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (14-06-2013) के "मौसम आयेंगें.... मौसम जायेंगें...." (चर्चा मंचःअंक-1275) पर भी होगी!
    सादर...!
    रविकर जी अभी व्यस्त हैं, इसलिए मंगलवार की चर्चा मैंने ही लगाई है।
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. शुक्रिया मयंक जी इसे चर्चा मंच में स्थान देने के लिए !

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  12. रोचक वृतांत!! मेंढक में जैसे जान है!!

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    1. हाँ बिल्कुल ऐसा ही प्रतीत होता है।

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  13. हिमाचल में कुलू और मनाली के रास्ते में एक क्षेत्र ऐसा भी है जहां कहीं भी खुदाई करने पर गरम पानी के सोत निकल आते हैं। मणिकर्ण गुरुद्वारे के पास के सोत में चावल पकाए गए और पिछले हफ्ते लंगर में खाए थे हमने। मगर ये गंधक की वजह से गरम होने वाले सोत नहीं है।
    नोर्वे के फ्युड्स में उत्तरी ध्रुव से 1100 मील पर नार्थ केप पर भी पूरे समुद्र में गर्म पानी के streams हैं जो इतनी कडाके की ठंड के बावजूद पानी को जमाती नहीं है। प्रकृती के खेल निराले है।

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    1. हाँ दिलीप जी कुलू के उस गुरुद्वारे में तो मैं भी गया हूँ पर नाम के विपरीत गरमपानी का पानी ठंडा ही है :)

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  14. बड़ा शानदार मेंढक हैं. कोशी नदी के किनारे सकूँ से बैठना..एक मजेदार अनुभव हैं.....

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    1. बिल्कुल सही कहा प्रवीण ।

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  15. बहुत रोचक पोस्ट मनीष जी. "पानी" नाम कुमाऊँ मे बहुत सारी जगहें है . जैसे की पीपलपानी , भंडारपानी , पत्थरपानी . "पीपलपानी " और "पत्थरपानी" जगह का तो जिक्र जिम कार्बेट की पुस्तक "मैन इटर ऑफ कुमाऊँ" मे भी है . बकायदा इन दोनों जगहों के नाम पर इस पुस्तक मे एक एक चैप्टर भी है जहां कार्बेट ने नरभक्षी को मारा था .

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    1. सही कह रहे हैं मृत्युंजय पानी नाम से उत्तराखंड में कई जगहें हैं। बिनसर जाते वक़्त हमें दीनापानी भी मिला था।

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  16. दोनों पत्थर एक मेंढक दूसरा कछुआ का पीठ लग रहा है -बहुत सुन्दर
    latest post: प्रेम- पहेली
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

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    1. ओह ऐसा क्या..मुझे तो वो कछुए की पीठ जैसा नहीं लगा।

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  17. रोचक जानकारी
    हमारे देश में अत्यंत जिज्ञासु स्थान हैं

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    1. सही कह रही हैं आप ! पूरे भारत में ऍसे कई अनजाने नज़ारे होंगे।

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  18. कुदरत का करिश्मा है ये भी.जरूर देखने योग्य.

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    1. जी बिल्कुल !

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  19. बहुत रोचक...

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    1. शु्क्रिया पोस्ट पसंद करने के लिए ।

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  20. बहुत ही रोचक जानकारी .. आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (17.06.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी. कृपया पधारें .

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    1. धन्यवाद नीरज !

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  21. I recently visited kumaun region first week june me hi dekhi thi ya jagah

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    1. I saw ur Kausani pics. In fact I will re describe the whole route up to Kausani and what we did in Kausani in next few posts

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  22. गरम पानी नाम तो सुना है जब कौसानी जा रहे थे और कैची धाम रुके तो शायद पहले या बाद में आया था पर, मेढ़क वाली रॉक नहीं देखि --हा, माउंट आबू में जरुर देखि है और चट्टान पर नाम भी लिखा था।

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    1. हाँ ये उसी रास्ते में है दर्शन कौर जी । हमे गाड़ियाँ रुकती दिखीं तो हम भी उतर लिए और नदी पर बने पुल पर चढ़ने पर इस मेढ़क के दर्शन हो गए। हाँ, माउंट आबू की नक्की झील के सामने पहाड़ पर बनी टोड रॉक है जो एक खड़े मेढ़क सी दिखती है कभी वहाँ भी ले गया था अपने पाठकों को
      दास्तां नक्की झील की : आख़िर क्यूँ याद आए मुझे 'बलम रसिया' ?

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  23. जहां आपने इस मेढक को देखा वहां पास में ही एक मंदिर है। इस मंदिर में गरम पानी का एक प्राकृतिक स्रोत है। ईसलिय इस स्थान को गरमपानी के नाम से जाना जाता है।

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