Friday, June 7, 2013

क्यूँ है जापान स्ट्रीट फैशन इतना भड़कीला? (Why is Japanese Street Fashion so gaudy ?)

पिछली पोस्ट की आख़िर में मैंने आपको बताया था कि स्पेस वर्ल्ड की इस यात्रा में जापानी समाज के एक नए चलन का पता चला जिसके बारे में जानकर हमें बड़ी हैरानी हुई। पता नहीं आपने ध्यान दिया या नहीं पर उस प्रविष्टि के दूसरे चित्र में एक युवा लड़की बड़े से सूटकेस को लेकर स्पेस वर्ल्ड के अंदर जा रही है। अब भला इतने बड़े सूटकेस का इस थीम पार्क में क्या काम?

दरअसल हर सप्ताहांत जापानी किशोर व किशोरियाँ आपको ट्रेन में एक बड़े सूटकेस के साथ सफ़र करते दिख जाएँगे। उनका गन्तव्य स्थल कोई ऐसी जगह होती है जहाँ पर्यटकों और आम लोग सप्ताहांत में अक्सर जाते हैं। आख़िर इस सूटकेस में होता क्या है? इसमें होते हैं रंगबिरंगे अजीबोगरीब परिधान और मेक अप का साजो सामान।


वैसे तो जापानी फैशन हमेशा से पारम्परिक और आधुनिक पश्चिमी फैशन का मिश्रण रहा। पर आज जापान के सारे परम्परागत फैशन जापान के तथाकथित स्ट्रीट फैशन (Japanese Street Fashion) में समाहित हो गए हैं। स्ट्रीट फैशन में इस्तेमाल किए गए वस्त्र बहुधा खुद से बनाए गए होते हैं। जापान में इस तरह के फैशन का केंद्र टोक्यो रहा है। टोक्यो शहर के हाराजुकु, शिंजुकू (Shinjuku) ,शिबूया (Shibuya) और गिंजा (Ginja) इलाके स्ट्रीट फैशन की परंपरा के मुख्य वाहक रहे हैं। इनमें हाराजुकु (Harajuku) तो इतना प्रसिद्ध हो गया है कि वहाँ युवाओं द्वारा प्रचलित फैशन को Harajuku  Style के रूप में पूरे विश्व में जाना जाता है।

जापान की फैशन स्टाइल के मुख्यतः तीन रूप हैं। ये तीनों रूप  हैं ग्यारू (Gyaru), गोथिक व लोलिता (Gothic and; Lolita) और डेकोरा ( Decora)। ये सारी पद्धतियाँ सत्तर के दशक में प्रचलित फैशन पद्धतियों से पनपी हैं। इन पद्धितियों में विभिन्नताओं के बावज़ूद कुछ बाते हैं जो Harajuku Street Dressing को दूसरे परिधानों से अलग करती है। एक तो है कई परतों में कपड़े पहनना। दूसरे हर कपड़े में ऐसा कुछ खुद से करना जो आपको भिन्न पहचान दे । तीसरे कपड़ों के साथ ऐसी ऐसी जेवलरी, बेल्ट, इयरिंग, हैंडबैग आदि का इस्तेमाल करना जो आपकी ड्रेस से बिल्कुल मैच ना करती हो। Loud Colour और मेकअप भी इस शैली का आवश्यक अंग हैं। पर स्ट्रीट फैशन का जो पहलू आपका सबसे अधिक ध्यान खींचता है, वो है बालों की कटिंग और उनका रंग रोगन। जापानी युवा अपने बालों को लेकर जितना प्रयोग करते हैं वो  एक फैशन के प्रति जागरूक भारतीय के लिए भी अकल्पनीय है।

इस तरह के फैशन स्टाइल को अपनाने का खर्च भी कम नहीं है। बालों के इन नए नवेले स्टाइल  और बाकी की साज सज्जा में दस से बीस हजार रुपये तक लग सकते हैं। पर चूंकि जापान एक धनी देश है इसलिए अभिभावकों द्वारा बच्चों को दिया जाने वाला जेब खर्च भी इन शगलों को पालने के लिए काफी होता है।


पर इन आँखों में चुभने वाले रंगों के परिधानों और भड़कीले मेकअप करने के पीछे जापानी किशोरियों की क्या मानसिकता हो सकती है? इसमें तो कोई शक नही कि इस तरह की वेश भूषा से ये लड़कियाँ वहाँ के स्थानीय और बाहरी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहती हैं। शायद स्कूली जीवन के तनावों से मुक्त होने का उनका ये अपना तरीका हो। जहाँ कहीं भी हम गए इन युवतियों ने फोटो खींचने या भाव भंगिमाएँ देने पर ज़रा भी परहेज नहीं किया। पर क्या सिर्फ यही इसकी वज़ह है?


जापानी संस्कृति को पास से देखने वाले विश्लेषक इसका एक और गहरा कारण बताते हैं। जापान का समाज व्यक्तिवादी विचारधारा से उलट अपने नागरिकों को प्रचलित नियमों और दायरों में रहकर जीवन जीने की ताक़ीद करता है।  हफ्ते भर तो ये बच्चियाँ स्कूल ड्रेस या परंपरागत कपड़े ही पहनती हैं। पर सप्ताहांत उन्हें एक छूट देता है इस बँधे बँधाए ढर्रे से निकल कर कुछ नया, कुछ बिल्कुल उलट करने का जो जापानी स्ट्रीट फैशन के रूप में इस तरह उभर कर आया है।

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21 comments:

  1. सही लिखा है । अभी ताकेशिता दोरी यानि फ़ैशन के लिए मशहूर इस गली से आकर बैठा ही हूँ । अक्सर होता है जाना कुछ देर को बस कौतूहल वश , देर तक रहने से चक्कर आने लगते हैं ।

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    1. शुक्रिया मुनीश भाई , चूंकि आप टोक्यो में रहते हैं आप जापानी युवाओं के इन तौर तरीकों के पीछे के मनोविज्ञान को बेहतर समझ सकते हैं।

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    2. मनोरोग है साक्षात् । मनोविज्ञान नहीं कह सकते । हर समाज की अपनी समस्य़ाएँ हैं । जब धन की अति हो जाए और कोई लक्ष्य न हो तो प्रायः होता है ऐसा भी। यूरोप में भी खूब है ...

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  2. :) :) जापान बड़ा ही दिलचस्प देश है.. मैने सुना है कि जापान में बुद्ध और ध्यान का भी बहुत गहरा प्रभाव है, अब क्या जापान में इसकी झलक कहीं दिखाई देती है..??

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    1. जापान में बौद्ध धर्म जन्म, मृत्यु और विशिष्ट सामाजिक अवसरों पर ही नज़र आता है। बाकी ज़िंदगी वो शिंटोइज़्म में विश्वास रखते हैं जो कई बातों में हिंदू धर्म से बेहद मेल खाता है। वैसे प्रशांत मुझे क्योटो पहुँचने तो दो तब तुम्हें विस्तार से अपने सारे प्रश्नों का जवाब मिल जाएगा।

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  3. To some extent true but this is not the real fashion of Japan. This is limited to few people only....

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    1. Agreed Neha Singh but its an essential part of street fashion which becomes predominant in Tokyo fashion districts and other parts of urban Japan during weekends. Harajuku Street dressing which came from Lolita, Gyaru & Decora fashion cult have followers even in Europe.

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  4. ये cosplay कहलाता है न???
    जापान में ये बच्चे नहीं बड़े भी करते हैं....पैशन है वहां ये...

    :-)
    अनु

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    1. अनुलता जी Cosplay Costume Play का संक्षिप्त रूप है जिसमें लोग वैसे किरदारों को अपने कपड़ो से निभाते हैं जो किसी कामिक,फिल्म,कार्टून या कभी कभी किसी वीडियो गेम का लोकप्रिय किरदार होता है। बाकी चित्रों के बारे में तो कहना मुश्किल है पर इस प्रविष्टि के प्रथम चित्र में युवतियों के परिधान लोलिता स्टाइल फैशन सब कल्चर से ज्यादा मेल खाते हैं। लोलिता गोथिक फैशन के उद्भव के बारे में आप यहाँ से और जानकारी प्राप्त कर सकती हैं...https://en.wikipedia.org/wiki/Lolita_fashion

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    2. thanks for sharing mushafir ji.....

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    3. Thx Vasim for dropping in.

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  5. जापानी लड़कियों की छवि अब भी हमारे यहाँ सायोनारा वाली सायरा बानो की है। मेरी एक बहन हाल ही में जापान से आई, एक शादी में मिली तो मैंने उससे कहा कि तुम तो बिल्कुल जापानी गुड़िया लग रही हो सायोनारा गर्ल। पता नहीं क्यों मुझे ऐसे लगा कि उसके फीचर बिल्कुल जापानी लड़कियों से हो गये हैं।

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    1. सौरभ, जापान से अपने देश में ले जाने के लिए आज भी दुकानों में उस सायोनारा सरीखी छवि की गुड़िया बहुतायत में मिलती है। धार्मिक और सामाजिक उत्सवों के दौरान भी काफी जापानी युवा सहित अपनी पारम्परिक वेश भूषा में निकलते हैं। पर इस छवि को तोड़ने लायक भी बहुत कुछ है जापान में, जिसका जिक्र आगे की पोस्टों में आएगा।

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  6. जिस दिन छूट रहेगा, मन व्यक्त होगा।

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    1. ये छूट समाज ने दी नहीं जापान के युवाओं ने ख़ुद ली है।

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  7. aapki ek bhi photo nahi thi galat baat :P

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    1. जब आप कैमरे के पीछे होते हैं ऐसे मौके कम मिलते है। वैसे कुछ तसवीरें थीं पर आपका ध्यान विषय से भटक ना जाए इसलिए यहाँ नहीं लगायीं।:)

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