Saturday, July 13, 2013

जापान और शाकाहार : आइए चलें जापान के सब्जी बाजार में ! (Japan and Vegetarianism)

जब भी परिचितों और मित्रों से जापान यात्रा के बारे में बात होती है तो एक प्रश्न ये जरूर होता है कि  एक शाकाहारी अपनी भोजन की प्रवृतियाँ ना बदलते हुए भी क्या वहाँ अपने उदर का ख़्याल रख सकता है ? अगर आप जापान की भौगोलिक संरचना को देखेंगे तो ये अनुमान लगाने में आपको कठिनाई नहीं होगी कि लगभग बारह करोड़ की आबादी वाले इस देश में जहाँ औद्योगिक विकास की वज़ह से तीव्र शहरीकरण हुआ है, खेती योग्य भूमि  पर्याप्त नहीं है। 

पर जापान के अधिकांश कस्बों और शहरों से भगवन की बनाई एक नियामत पास है और वो है समुद्र। यही कारण है कि जापान के पकवानों में समुद्री भोजन यानि Sea Food का बहुत बड़ा हिस्सा है और सब्जियाँ उसमें उसी तरह इस्तेमाल की जाती हैं जैसे हमारे यहाँ सब्जियों में 'टमाटर'।  भारतीय अर्थों में जो शाकाहारी भोजन होता है वो जापान में दुर्लभ है पर अगर आप ख़ुद शाकाहारी भोजन बनाना चाहें तो जापान के हर सुपरमार्केट में आपको वो सारी सब्जियाँ मिल जाएँगी जिनसे आप पूर्वपरिचित हैं। आपके बनाये भोजन को आपका पेट जरूर सराहेगा भले ही उसके पहले आपकी जेब कराह उठे। ऐसा क्यूँ है जानने के लिए चलिए आपको ले चलते हैं एक जापानी सुपरमार्केट में.. 

जापानी सुपर मार्केट में बिकती सब्जियाँ
वैसे इस बारिश में भुट्टे का स्वाद आप खूब उठा रहे होंगे। जापान में  एक भुट्टे की कीमत सत्तर रुपये की है। वैसे उत्तरी जापान में तोमोरोकोशी (Tomorokoshi) यानि मकई की खेती भी होती है पर माँग ज्यादा होने की वज़ह से ये  अमेरिका से आयात किया जाता है। बारिश के मौसम में इसे ग्रिल कर जापानी  लोग, मक्खन और सोया सॉस के साथ खाते हैं।

आजकल भारत में टमाटर चर्चा में हैं। ख़बरें आ रही हैं कि कहीं कहीं तो आठ रुपये में एक टमाटर बिक रहा है पर नीचे चित्र में देखिए जापान की इस दुकान में पाँच टमाटर दो सौ येन यानि एक सौ तीस रुपये में बिक रहा है, वो भी तब जबकि जापानी पकवानों में टमाटर का इस्तेमाल ना के बराबर होता है। जापान में टमाटर आपको सलाद या भोजन को सजाने का काम करता दिखेगा। 


ये नज़ारा है एक ख़ुदरा सब्जी विक्रेता के यहाँ का.. 

जापान की दुकानों में भिंडी देख कर मुझे कितनी प्रसन्नता हुई थी ये मैं बयाँ नहीं कर सकता। भिंडी मेरी प्रिय सब्जी है और जापान में पहुँचने के पहले ही दिन सुपरमार्केट में इसका दीदार होने पर ये विश्वास हो चला था कि अपने वतन से हजारों किमी दूर हमारी मेस में आने वाले दिनों में इसकी सब्जी खाने का सौभाग्य जरूर प्राप्त होगा। मेरे सपनों पर तुषारापात तब हुआ जब दो दिन बाद सुबह के नाश्ते में भिंडी, सब्जी के बजाए उबाल कर सलाद के रूप में रखी दिखी। जापान में भिंडी 'ओकुरा' (Okura) के नाम से जानी जाती है जो इसके अमेरिकी नाम Okra से मिलता जुलता है। आप तो भिंडी किलो के हिसाब से खरीदते होंगे पर जापान में आठ दस भिंडियाँ गुच्छों में अस्सी रुपये के भाव से बिकती हैं। वैसे भी सलाद में इससे ज्यादा भिंडियों का क्या काम :) ?

एक गुच्छा भिंडी  @138 Yen (1 Yen = 0.6Rs.)


जापान में बंधा गोभी तो खूब दिखी पर फूल गोभी के दर्शन नहीं हुए। हाँ उसकी सहोदर Broccoli भी बतौर सलाद सुबह में जरूर दिखी।


जापान में छीमी की तरह की ये सब्जी उबाल कर चावल के साथ परोसते हैं। इसका स्वाद हल्का सा मिठास लिए होता है। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि जापान में जो मिर्च मिलती है उनमें अधिकतर तीखी होने के बजाए मिठास लिए हुए होती हैं। वैसे तीखी सब्जियों का राजा करेला जापान में सर्वत्र दिखाई पड़ता है। जापान में गोया (Goya) के नाम से जाना जाने वाला करेला इसके सुदूर दक्षिण के ओकीनावा द्वीप की प्रमुख सब्जी है।


भारत में बैंगन को 'बेगुण' कहने वालों की कमी नहीं पर मुझे तो इसके सारे पकवान बड़े स्वादिष्ट लगते हैं। जापान में बैंगन को नासू (Nasu) कहा जाता है और इसके कई शाकाहारी व्यंजन भी बनाए जाते हैं जिसमें नासू डेंगकू (Nasu Dengku) सबसे प्रचलित है। नासू डेंगकू बनाने के लिए बैंगन को आधा काट कर सोयाबीन पेस्ट के साथ बेक किया जाता है।
बैंगन का उल्लेख यहाँ की लोक कथाओं में भी है। नए साल में अगर किसी के सपने में बैंगन आ जाए तो वो शुभ माना जाता है। वैसे अगर पाँच सौ येन यानि तीन सौ रुपये का एक बैंगन मिले तो हम भारतीयों के लिए ये ख़्वाबों वाली सब्जी ही रह जाएगी ना...:)



जापान में बैंगन की ही तरह ही लोकप्रिय है मूली जो जापान में डायकोन  (Daikon) के नाम से जानी जाती है। हमारी तरह जापानी लोग भी मूली को कच्चा या पतले पतले टुकड़ों में कस कर बाकी व्यंजनों के साथ खाते हैं। यही नहीं जापानी अचारों में मूली का अचार सबसे लोकप्रिय है।


जापान प्याज उत्पादक देशों में अग्रणी देश है पर जापानी सलाद की जगह प्याज का इस्तेमाल सामिष व्यंजनों में करते हैं । शायद इसी वजह से हमने भिंडी, ब्रोकली, बंधा और मटर जैसी सब्जियाँ सलाद के साथ उबाल का खायीं पर इनके साथ प्याज के कभी दर्शन नहीं हुए। इन सब्जियों के आलावा जापान में  आलू, शकरकंद, अदरक, लहसुन भी जगह जगह बिकते दिखाई दिये। मौसम ठंडा होने पर गाजर, शिमला मिर्च और पालक भी वहाँ खूब बिकते हैं।  फलों में सेव और केले हर जगह दिखे। शुरु में तो हम इनके मूल्य को देख कर इन्हें खरीदने से हिचकते रहे। वैसे भी चालिस पचास रुपये में एक केले और साठ से अस्सी  रुपये में एक सेव भला कौन भारतीय खरीदना चाहेगा?  पर बाद में ऊँची कीमतों की आदत सी पड़ गयी।


जापान में हरी सब्जियों और खासकर वैसी सब्जियों जिनमें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग ना हुआ हो की भारी माँग है। स्वस्थ भोजन यानि हेल्थी फूड से जुड़े कार्यक्रम की टीवी पर लोकप्रियता भी इसका प्रमाण है। वहाँ के लोगों ने इससे जुड़ा एक मजेदार किस्सा बताया। वर्ष 2008 के मध्य में टीवी कार्यक्रमों से ये खबर फैली कि केला खाने से वजन कम होता है। टीवी पर  कुछ सेलीब्रेटी भी ऐसा कर के वजन घटाते दिखाए गए। बस फिर क्या था आनन फानन में देश में केलों की खरीद शुरु हो गई। नतीजा ये कि दो हफ्तों में जापान के बाजार केलों से खाली हो गए। वियतनाम से आयात कर स्थिति पर काबू पाया गया । सोचता हूँ अगर बाबा रामदेव जापान चले गए तो फिर तो लौकी और पालक भी शायद जापान के बाजारों से गायब हो जाए। 

अच्छा ये तो हुई जापान में उपलब्ध फल और सब्जियों की बात। अगली पोस्ट में मैं आपको बताऊँगा कि किस तरह पैनासोनिक कंपनी की कैंटीन में हमारे लिए विशुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था की गई और कैसा लगा हमें उसका स्वाद!

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29 comments:

  1. हमारे यहां वेतन के हिसाब से तो सब्जिया सस्ती है, टमाटर आज कल १€ किलो मिल रहे हे, मंहगा ३ € तक जाता हे, ऎसे ही अन्य सब्जियां है, जो खलती नही, यानि जेब नही कराहती.

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    1. आपके बताए गए मूल्यों से स्पष्ट है कि सब्जियों के मामले में जर्मनी सस्ता है। वैसे तो अगर जापानियों का वेतन देखें तो एक होटल का रसोइया भी महिने में सत्तर हजार से एक लाख येन कमा लेता है । पर हम जैसे भ्रमणकारी की जेब तो भारतीय वेतन से ही भरती है सो वो तो कराहेगी राज साहब:)

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    2. इस इकॉनमी ने तो हमको कंफ्यूज कर दिया...
      वरना करेंसी कन्वर्शन को देखते हुए 1 INR = 1.65749 JPY हमें लगा भारत से जापान जाने वाले मज़े में रहते होंगे....
      वहां english टीचर को कितनी तनख्वाह मिलती हैं हमारे सुपुत्र जानना चाहते हैं :-)

      thanks for such informative post.
      अनु

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    3. अनुलता जी मैं दो प्रकार के भारतीयों से मिला एक जो प्रोफेशनल थे और दूसरे जो घर बार छोड़ कर रोज़ी रोटी की तलाश में वहाँ पहुँचे थे। एक भारतीय रेस्ट्राँ में एक कुक मिला जो झारखंड के जसडीह का रहने वाला था। उसे महिने में करीब एक लाख येन मिलते थे। पर ये जापान के हिसाब से कुछ भी नहीं है पर वो बंदा होटल में रहकर और वहीं से अपना भोजन पानी कर चालिस पचास हजार येन यानि लगभग पच्चीस हजार रुपये बचा कर भारत भेज पाता था। भारत में रहता तो अपनी काबिलियत के हिसाब से क्या बचा पाता ?

      दूसरी तरफ इंजीनियरों की तनख्वाह जापान में काफी है। इतनी कि वो बड़े शहरों में एक लाख येन तक का घर किराए पर ले सकें। आफिस से आने जाने का खर्च ट्रेन का इस्तेमाल कर बचाएँ और साल में अपनी आय का एक चौथाई से आधा तक बचा लें। दिक्कत यही है कि जापान में बैंक का ब्याज ना के बराबर है इसलिए पैसा तो अंत में भारत ही भेजना पड़ेगा।

      अपने पुत्र को बता दें कि जापान में अंग्रेजी शिक्षक उसी देश के किए जाते हैं जिनकी मातृभाषा अंग्रेजी हो और भारत ऐसे देशों में नहीं है। हमारे मित्र आस्ट्रेलिया से आए एक ऐसे ही सज्जन से मिले जो वहाँ क्रेन आपरेटर थे पर यहाँ एक जापानी से शादी रचाने के बाद अंग्रेजी पढ़ा रहे थे।

      जापान में शिक्षकों की तनख्वाह के लिए मुझे अपने वहाँ के मित्रों से पूछना पड़ेगा पर इतना जान लें कि वो आम मध्यमवर्गीय जीवन जीने के लिए काफी होगी।

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    4. जानकारी के लिए शुक्रिया मनीष जी!!
      आभार आपका.
      अनु

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    5. जापान में कान्ट्रेक्ट पर शिक्षकों की तनख्वाह डेढ़ लाख येन के आस पास है।
      पर भारतीयों के साथ जो परेशानी है वो मैंने आपको ऊपर लिख ही दी है।

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  2. सब जल तरोई ही खाते हैं, और सब्जियों की तो कद्र ही नहीं..रोचक तुलना।

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    1. अब हमारे जैसे जलोढ़ मिट्टी से बने उपजाऊ मैदान तो हैं नहीं उनके पास तो जो आसानी से उपलब्ध है उसे ही अपने आहार का मुख्य हिस्सा बना लिया।
      वैसे प्रवीण एक होटल में तो हमें अपने मेजबान को ये समझाने में खासा वक़्त लगा कि समुद्री जल तरोई शाकाहारी भोजन का हिस्सा नहीं है।

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  3. बहुत अच्छा लगा. हमारे घर एक जापानी दम्पति इस फ़रवरी में आई थी स्थानीय साप्ताहिक बाज़ार से उन्होंने ५ किलो मटर खरीद लिया और घर आकर छीलते बैठे रहे उस समय कीमत 15 रुपये किलो था.

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    1. जब भी हम जापानियों को भारत में फलों और सब्जियों के मूल्य के बारे में बताते थे वे आवाक रह जाते थे। वैसे उतनी सारी मटर क्या वो साथ ले गए ?

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  4. जापान का सब्जी मार्केट घुमाने के लिए आभारी हूँ

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    1. शुक्रिया ! मिश्र जी दरअसल सब्जी मार्केट घुमाने के पीछे मेरा उद्देश्य ये था कि जापान जाने वालों को ये बता सकूँ कि वहाँ मिलने को तो बहुत कुछ मिलता है पर खाने में वो चीजें उस रूप में दिखती नहीं है जिसके हम आदि हैं। अगली पोस्ट में शाकाहारी थाली में रखे गए व्यंजनों को देख कर आपको ये अंदाजा हो जाएगा। :)

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  5. very informative.. padh kar aisa laga jaise main Japan mein hi ghoom raha hoon..

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    1. धन्यवाद जितेन मेरा प्रयास सार्थक हुआ :)

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  6. रोचक जानकारी. लगा यहां हमारा काम सस्‍ते में बन जा रहा है.

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    1. हाँ पर साथ ही हमारी क्रय शक्ति भी उसी हिसाब से कम है।

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  7. Loved your post.. As usual.. Haha.

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  8. जापान में तो खैर खेती-बाड़ी योग्य अधिक भूमि नहीं है.. पर अमेरिका में तो जमीन ही जमीन है.. अलबत्ता लोग कम हैं जमीन पर काम करने के लिए और पेट कम हैं पैदा किया हुआ खाने के लिए. फिर भी यहाँ टमाटर १ पौंड के लिए ३ से ४ डॉलर्स चुकाने पड़ते हैं, यानि एक किलो के करीब ६०० भारतीय रुपये.
    उसी तरह से पालक करीब १००० रुपये किलो, भिन्डी करीब ७०० रुपये किलो.
    हाँ, संतरा, सेब, आलू और प्याज यहाँ पर अपेक्षाकृत थोडा सस्ता होता है. और बीयर की तो बात ही न पूछें... पानी के ६ छोटे बोतल का क्रेट ५ से ६ डॉलर्स में मिलता है, लेकिन उतनी ही मात्रा का बीयर का ६ कैन का क्रेट सिर्फ ४ या साढ़े चार डॉलर्स में मिल जाता है. घोर कलयुग है न???

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    1. इस जानकारी के लिए धन्यवाद पुनीत। जापान में भी कमोबेश ऐसा ही मूल्य है अगर किलो में बदलें तो। पानी और बीयर वाली बात यहाँ भी लागू है :)

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  9. अच्छा लगा जापान के सब्जी बाज़ार में घूम कर .....धन्यवाद !

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    1. शु्क्रिया पसंदगी का !

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  10. Bahot khoob. Interesting post.

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  11. जापान का सब्जी बाजार घूम कर मजा आ गया.. अगली पोस्ट का इंतजार है.....

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    1. एक पाँच सितारा होटल और विशिष्ट शाकाहारी भोजन से जुड़े प्रसंग भी बड़े रोचक रहे थे मेरे लिए।

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  12. सही है, वैसे अब तो भारत में भी सब्जियाँ महँगी हैं.. हम सऊदी गये थे तो वहाँ पर लगभग सभी सब्जियों के दाम भारत के दाम जितने ही थे..

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