Thursday, November 21, 2013

राजधानी वाटिका, पटना : धर्म और प्रकृति का अद्भुत गठजोड़ !

राजधानी वाटिका से जुड़ी पिछली प्रविष्टि में मैंने  आपको वहाँ पर स्थापित शिल्पों की झांकी दिखलाई थी । आज आपको लिए चलते हैं उद्यान के उस हिस्से में जिसकी हरियाली तो नयनों को भाती ही है पर साथ साथ जहाँ धर्म, ज्योतिष और प्रकृति का गठजोड़ एक अलग रूप में ही दृष्टिगोचर होता है।


पिछली चित्र पहेली में आपको जो  धार्मिक प्रतीक नज़र आ रहे थे वे राजधानी वाटिका के इसी हिस्से के हैं। आपको भी उत्सुकता से इंतज़ार होगा पहेली के सही उत्तर के बारे में जानने का। जैसा कि मैंने आपको बताया था पहला चित्र सिख धर्मावलंबियों की विचारधारा का चित्रात्मक प्रस्तुतिकरण था । इस चिन्ह को सिख खंडा (Khanda) के नाम से जानते हैं।


अगर आप इस धार्मिक चिन्ह और ऊपर बनी आकृति का मिलान करें तो दोनों को एक जैसा पाएँगे। 'खंडा' सिख विचारधारा का मुख्य प्रतीक चिन्ह है। ये उन चार शस्त्रों का संयुक्त निरूपण है जो गुरु गोविंद सिंह जी के समय प्रयोग में लाए जाते थे ।



इस धार्मिक चिन्ह को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जा सकता है। चित्र के केंद्र में एक द्विधारी तलवार है जो भगवन की सृजनात्मक शक्ति का प्रतीक है। इस तलवार के साथ एक चक्र या चक्कर है। मध्य की इस तलवार के दोनों ओर दो कृपाण हैं जिन्हें सिख धर्म में 'पीरी' और 'मीरी' के नाम से जाना जाता है। बाँयी ओर की तलवार आध्यात्मिक प्रभुसत्ता यानी 'पीरी' और दायीं ओर की तलवार राजनैतिक प्रभुसत्ता यानी 'मीरी' का प्रतीक है। बीच का वृत इन दोनों के बीच संतुलन को व्यक्त करता है।
इस गुरु वाटिका के ठीक विपरीत दिशा में बुद्ध वाटिका है जिसका चित्र आपने चित्र पहेली में देखा था।


पहेली का दूसरा चित्र बौद्ध धर्म के जाने माने आष्टांगिक मार्ग का निरूपण करता है। बौद्ध धर्मावलंबी इन मार्गों को सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक, सम्यक कर्यात, सम्यक अजीवा, सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति, सम्यक समाधि के नाम से जानते हैं। बौद्ध धर्म में इस आष्टांगिक मार्ग को धर्मचक्र के रूप में निरूपित किया जाता है जिसकी हर एक तीली एक मार्ग को दर्शाती है। बीच में जो बोधि वृक्ष दिख रहा है उसे गया के पवित्र वृक्ष से प्राप्त कर लगाया गया है।


देश के कई अन्य हिस्सों की तर्ज पर यहाँ नक्षत्र वन भी बनाया गया है। जो लोग ज्योतिष को मानते हैं उनके लिए  उद्यान का ये हिस्सा बेहद दिलचस्प साबित होगा। ऐसा माना जाता है कि प्रत्येक राशि में दो या तीन नक्षत्रों का प्रभाव रहता है। पौराणिक और ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो आकाश में स्थित 27 नक्षत्रों का संबंध पृथ्वी पर स्थित वृक्षों से जोड़ा गया है। धरती पर इन वृक्षों की सेवा करने से उस नक्षत्र की सेवा होती है।


इस वन में एक बड़े वृत को राशि चिन्हों के नाम से बारह अलग अलग भागों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक हिस्से में उस राशि से जुड़े पेड़ लगाए गए हैं। अगर आपको अपना राशि चिन्ह मालूम हो तो राजधानी वाटिका के इस हिस्से में आकर आप ये जान सकते हैं कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किस वृक्ष की सेवा से आपका कल्याण हो सकता है।:)

राजधानी वाटिका के आख़िरी हिस्से में जैन तीर्थांकरों से जुड़े केवली वृक्षों (वैसे पेड़ जिनके नीचे  तीर्थांकरों को ज्ञान प्राप्त हुआ) को लगाया गया है इसलिए इसे तीर्थांकर वन का नाम दिया गया है। तीर्थांकर वन तक पहुँचते पहुँचते सूर्यास्त वेला नजदीक आ रही थी। इसलिए मैंने अपने कदम वापस बढ़ाए।

नौका विहार के लिए बनाई झील के पार्श्व में दिखता पुराने सचिवालय का घंटा घर

आशा है राजधानी वाटिका की ये सैर आपको पसंद आई होगी।  अगर आपको मेरे साथ सफ़र करना पसंद है तो फेसबुक पर मुसाफ़िर हूँ यारों के ब्लॉग पेज पर अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराना ना भूलें। मेरे यात्रा वृत्तांतों से जुड़े स्थानों से संबंधित जानकारी या सवाल आप वहाँ रख सकते हैं।

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  2. Could never guess the place! I have faint memories of this place. So much has changed.

    Time to visit again. Thanks for sharing.

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    1. शहर वक़्त के साथ ना बदले तो वो शहर ही क्या.. पटना अभी संक्रमण काल से गुजर रहा है। अगले पाँच सालों में इसके स्वरूप में कई और परिवर्त्तन होंगे ऐसी आशा है।

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