Friday, September 12, 2014

झारखंड जहाँ हरियाली सर्वत्र पसरी है The Green Jharkhand : A train journey from Ranchi to Bokaro !

वैसे तो आज आपको दशनोक के चूहों के मंदिर में घुमाने के बाद आपको बीकानेर का शानदार किला दिखाना था। पर पिछले हफ्ते शताब्दी एक्सप्रेस से राँची से दुर्गापुर जाते हुए प्रकृति ने इतने हरे भरे लमहे दिए कि उनको आप तक पहुँचाए बगैर मन ही नहीं मान रहा था। राजधानी राँची, नामकुम और टाटीसिलवे से निकलने के बाद झारखंड का रमणीक रूप आँखों के सामने आ जाता है। ऊँचाई पर चलती ट्रेन से टाटीसिलवे और गंगाघाट के बीच की घाटी को देखना मैं अपनी किसी यात्रा में नहीं भूलता। हर बार यही सोचता हूँ कि काश वहाँ कोई हॉल्ट होता तो कुछ पल तो उन सुरम्य वादियों को अपलक निहार पाता।

गंगाघाट के आगे जंगल रेलवे की पटरियों के एक ओर सट के चलते हैं तो दूसरी ओर विरल होते जंगलों के बीच छोटे छोटे खेत खलिहान दिख जाते हैं। पर नयनों को असली तृप्ति तब मिलती है जब गाड़ी गौतमधारा से किता की ओर सरपट भागती है। मानसून के इस मौसम में धान के लहलहाते खेतों के पीछे की पहाड़ियाँ भी हरे रंग से सराबोर हो जाती हैं. विश्वास नहीं आता तो खुद ही देख लीजिए


पर हुज़ूर दुनिया आप पर ध्यान तभी देती है जब आप लीक से हट कर कुछ करें। अब किता स्टेशन पर खड़े इस अकेले पेड़ को ही देखिए। सारी धरती जब हरियाली की चादर ओढ़े है तो ये महाशय अपने को पत्तीविहीन कर किस दर्प के साथ सीना ताने खड़े हैं। और सच ध्यान इनकी खूबसूरती से हट ही कहाँ पा रहा है?


किता से सिल्ली आते आते पहाड़ियाँ दूर चली जाती हैं। दूर दूर तक जिधर नज़र जाती है इस हरीतिमा का सामना होता है।

राँची के बाद का प्रमुख स्टेशन है सुवर्णरेखा नदी के साथ लगा मूरी जहाँ एल्यूमिनियम का कारखाना है। मूरी बंगाल की सीमा से बिल्कुल सटा है। सुवर्णरेखा नदी को पार कर हम कुछ देर के लिए बंगाल की सीमा के अंदर आ जाते हैं।

झारखंड की सीमा पार करते ही पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का छोटा सा स्टेशन आता है झालदा। झालदा में घुसने से पहले ही शिक्रा की पहाड़ियाँ अपने चौड़े सपाट सीने के साथ आपका स्वागत करती हैं।

Shikra Hills , Jhalda

धान के खेतों के पीछे खड़ी ये पहाड़ियाँ हर मौसम में अपना रंग बदलती हैं। वैसे झालदा एक ऐसी जगह है जो घुमक्कड़ी के लिए आदर्श है पर पर्यटकों के लिए वांछित सुविधाएँ ना होने के कारण अपनी खूबसूरती अपने में समेटे बैठी है। यहाँ के जलाशय , जंगल और पहाड़ियाँ किसी भी प्रकृति प्रेमी का दिल हरने के लिए काफी हैं।


बोकारो  और फिर चंद्रपुरा से धनबाद तक का इलाका विभिन्न संयंत्रों व कोयला खदानों के साथ साथ चलता है। इन खदानों ने देश का तो भला किया है पर यहाँ रहने वालों के जीवन और आस पास के परिवेश की कालिमा मन व आँखों दोनों को निराश करती है। जमुनिया नदी का प्रवाह इस निराशा को कुछ ही क्षणों के लिए सही धोने की कोशिश जरूर करता है।


मुसाफ़िर हूँ यारों पर मानसूनी बयार


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12 comments:

  1. Sir me bhi aap ki iss yatra me samil hona chahta hu thanx sir

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    1. ये यात्रा तो कार्यालय के काम के दौरान की गयी यात्रा थी। आप भी निकल पड़िये कहीं हमसफ़र ख़ुद ब ख़ुद मिल जाएँगे और ना भी मिले तो ये खूबसूरत प्रकृति है ना आपके साथ।

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  2. Awesome greenery on this route..Enjoyed the same journey for 4 long years..

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    1. और मुझे बीस साल.. मेसरा में तो छुट्टियों में ही आना जाना हो पाता था पर अब तो हर मौसम में इस रास्ते के अकग अलग रूपों को देख चुका हूँ नौकरी की वज़ह से !:)

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  3. Jharkhand ke jitne v rail route hai savi prakritik ke kariv & manoram dirisya hai. Aap ko aisa lagta ki yatra thoda or rahta par aapki manzil aa jati hai........ thanks ji.

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    1. सहमत हूँ आपकी बात से !

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  4. आपके देखने का नजरिया तो पत्थर को भी फूल बना सकता है फिर यहाँ तो असली में ही हरियाली है। काफी विहंगम दृष्टि है आपकी, नहीं तो इस खेत के गुलाबी साड़ी पर आपकी नज़र नहीं जाती। आपकी लेखनी भी कमाल है। एक-एक शब्द पढ़ते वक्त ऐसा लगता है, जैसे मानों हमने भी आपके साथ यात्रा की हो। आपके नए पोस्ट का इंतज़ार रहेगा।

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    1. आपके देखने का नजरिया तो पत्थर को भी फूल बना सकता है
      आइ ला इतनी कूवत होती तो हर समय फूलों के उपवन में बैठे रहते। :)
      बहरहाल आपको मेरा लिखा पसंद आता है जानकर बेहद खुशी हुई। इसी तरह अपनी पसंदगी नापसंदगी ज़ाहिर करते रहिए।

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  5. Superb narrative and best combo of pics
    All the best

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    1. शुक्रिया हर्षल चित्रों और लेख को पसंद करने के लिए !

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  6. वाह क्या सुंदर और मनोरम दृश्य है .. वाकई आपने शानदार यात्रा करवाई है सबको इस ब्लॉग के माध्यम से .
    मेरे ब्लॉग पर भी आइए ना.
    आपका स्वागत है.
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

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  7. Ghar ki yad aagai(Bokaro) . thanks

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