Sunday, November 16, 2014

डगर थाइलैंड की भाग 5 : फुकेट ( फुकेत ) के समुद्र तट Beaches of Phuket, Thailand

वो आठ अक्टूबर की सुबह थी। पिछले दिन की थकान अच्छी तरह सो लेने की वज़ह से खत्म हो चुकी थी। पर ये क्या.. बाहर तो मूसलाधार बारिश हो रही थी। मतलब इंटरनेट पर एक महीने पहले देखा हुआ मौसम का पूर्वानुमान सही साबित हो रहा था। पर खुशी की बात ये थी कि मैंने इसी वज़ह से दूसरे दिन फुकेट शहर के अंदर ही घूमने का कार्यक्रम बनाया था। ऐसे मौसम में घूमने के लिए छतरी का होना आवश्यक था। छतरी तो हम ले गए थे पर वो छः लोगों के हमारे समूह को पूरी तरह ढकने में असमर्थ थी। तैयार हो कर जब नीचे उतरे तो अचानक ही होटल के स्वागत कक्ष पर रखी इन बड़ी बड़ी रंग बिरंगी छतरियों पर नज़र पड़ी। होटल वाले से पूछा तो उसने बताया कि ये अतिथियों के लिए ही रखी गई हैं। फिर क्या था हम लोगों ने दो छतरियाँ उठायी और चल पड़े  सुबह के नाश्ते की तलाश में।

चली बारिश की बयार..  हम छतरी ले तैयार !

होटल चुनते समय हमने ये ध्यान रखा था कि भारतीय भोजनालय पास में ही हो। पिछली रात तो खाना फुकेट फैंटासी में ही हो गया था इसलिए वहाँ जाने की जरूरत नहीं पड़ी थी। पर सुबह जब वहाँ पहुँचे तो रेस्ट्राँ को बंद पाया। पता चला कि यहाँ दिन के ग्यारह बारह बजे से पहले ज्यादातर रेस्ट्राँ नहीं खुलते। कारण साफ था। फुकेट में रात की रंगीनियाँ इतनी देर तक चलती हैं कि बाहर से आए हुए मुसाफ़िर सुबह उठ जाएँ ऐसा कम ही होता है। ख़ैर तय हुआ कि एक आध और रेस्ट्राँ के चक्कर मारे जाएँ नहीं तो मक्खन पावरोटी से काम चलाया जाए। होटल के बगल के एक इतालवी रेस्ट्राँ में झाड़ू लगता देख हमें आशा बँधी सोचा शायद अमेरिकन ब्रेकफॉस्ट के नाम पर टोस्ट बटर यहीं मिल जाए।

अब इतालवी रेस्ट्राँ में आए हैं तो साज सज्जा तो यूरोपीय होगी ही !
अंदर जाकर जब हमें मेनू में मक्खन पावरोटी के साथ आलू के पराठे दिखे तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इतालवी रेस्टाँ में स्वादिष्ट आलू के पराठे खाना हमारे लिए थाइलैंड प्रवास का एक यादगार अनुभव रहा।

जलपान करने के बाद बाहर देखा तो पाया कि बारिश फुहार में बदल गई थी। हमारा उस दिन का कार्यक्रम मुख्यतः फुकेट के खूबसूरत समुद्र तटों और मंदिरों की सैर का था। फुकेट शहर में एक से बढ़कर एक समुद्र तट हैं। काथू, जहाँ हम ठहरे थे वहाँ से कुछ क़दमों के फासले पर Patong Beach है जो शहर के व्यस्ततम इलाके से सटी हुई है। Patong Beach के उत्तर की ओर जाने पर Kamala और Surin Beach मिलती है वहीं इसके दक्षिणी सिरे पर जाने से Karon और Kata के समुद्र तट मिलते हैं। Kamala के तट का दर्शन तो हम पिछली रात Phuket Fantasea देखने के पहले ही कर चुके थे।

फुकेट ( फुकेत ) के समुद्र तट

जो मेटाडोर हमें लेने आई थी वो हमें शहर के दक्षिणी सिरे की ओर ले जाने लगी। पर इन आधे दिन के भ्रमण वाले कार्यक्रम में इतना समय नहीं होता कि इन समुद्र तटों पर इच्छा के मुताबिक आपको वक़्त बिताने का मौका मिल सके। इसलिए ऐसे टूर लेने से बेहतर है कि आप वहीं जाकर अपनी पसंद की जगहों पर ज्यादा वक़्त बिताएँ। गाड़ी ढूँढने का काम या तो होटल वालों पर छोड़ दें या फिर टुकटुक वालों से मोलभाव की हिम्मत रखें :)। मेटाडोर हमें सबसे पहले एक छोटी सी पहाड़ी पर ले गई जहाँ से Karon और Kata के खूबसूरत समुद्र तट एक साथ दिखते हैं।

क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि ज़मीन के इस टुकड़े को समुद्र ने आपने आगोश में ले रखा हो !

बादल अभी भी किसी क्षण बरसने का अंदेशा दे रहे थे। पर तेज़ चलती हवा उन्हें तितिर बितर हो जाने पर मजबूर कर दे रही थी। पहाड़ी के शीर्ष से दिखता वो नज़ारा अद्भुत था। काता और कारोन दोनों समुद्र तटों पर लहरें पूरी तेजी के साथ अपने प्रहार कर रहीं थीं।  कारोन के उत्तर में पातोंग का विशाल समुद्र तट है जो दो  समुद्र के अंदर तक घुसी पहाड़ियों की वज़ह से छुप जा रहा था। 

हाथों में हाथ, हैं हमेशा साथ साथ : काता और कारोन ( Kata and Karon Beach Phuket )

पातोंग की तरह काता और केरोन में भी होटल उपलब्ध हैं और अगर आप पातोंग के हंगामे से दूर रहना चाहते हैं और रहने पर थोड़ा ज्यादा खर्च कर सकें तो इन्हीं समुद्र तटों के पास रहना श्रेयस्कर है। नैसर्गिक सुंदरता के मामले में भी पातोंग के मुकाबले कारोन और काता कहीं बेहतर हैं। काता का समुद्र तट दो भागों में बटा है उत्तरी हिस्सा काता मध्य और दक्षिणी काता नोई के सामने से जाना चाहता है। काता नोई के और दक्षिण नाई हार्न व रवाई के समुद्र तट हैं जहाँ जाने का हमें समय नहीं मिला।

काता नोई मेरे सामने ना आए कोई :) Kata Noi Beach Phuket
इन समुद्र तटों को दर्शन कर निकले तो इस जोड़ी से बाहर पार्किंग में मुलाकात हो गई। अच्छा तो नहीं लगा इनके पैरों में पड़ी बेड़ियों को देख कर पर उनका चित्र सही सही क़ैमरे में क़ैद करने में ये बंधन ही काम आए।

हुज़ूर इतनी नाराजगी क्यूँ है कब तक नज़रे फिराए रहेंगे ?
पातोंग के समुद्र तट पर हम अगली सुबह गए। सुबह सुबह समुद्र तट पर मुट्ठी भर लोग ही थे। इस तट पर लोग सूर्य निकलने के बाद ही आते हैं वो वहाँ रखी इन खाली आरामकुर्सियों को देखकर ही समझ आ रहा था।


ये सुबह की तन्हाइयाँ और अब तक ना आए तुम..खाली कुर्सियाँ यहीं तो कह रही हैं जनाब !
पातोंग में समुद्र का पानी कारोन और काता की तरह स्वच्छ नहीं था। ये तट साढ़े तीन किमी की लंबाई में अपना विस्तार लिए हुए है और फुकेट के सबसे लोकप्रिय तटों में एक है।

पातोंग का समुद्र तट  Patong Beach
समुद्री स्नान का असली आनंद हमें अपनी फुकेट ( फुकेत ) यात्रा के आख़िरी दिन मिला। थाइलैंड यात्रा की अगली कड़ी में आपको ले चलेंगे फुकेट के सबसे प्रसिद्ध मंदिर की सैर पर..

लहरों के साथ सुबह का सफ़र

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थाइलैंड की इस श्रंखला में अब तक

11 comments:

  1. :) मजा आ गया... रंग बिरंगी छतरियां वो भी अतिथियों के लिए... कितना खयाल रखते हैं....

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    1. हाँ बारिश कभी भी आ जाती है यहाँ इसी बात को ध्यान में रखकर ये सुविधा उपलब्ध रहती है वहाँ। वैसे भारत में मैंने राउरकेला के होटल मेफेयर में ये सुविधा देखी है।

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  2. बहुत ही सुन्दर समुद्र तट

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    1. हाँ सचमुच पर इस यात्रा में हमें इससे भी खूबसूरत तट दिखे।

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  3. आपने इन दृश्यों को अपने कैद कर जीवंत बना दिया है। जानकर अच्छा लगा कि वहाँ परांठे भी मिलते हैं।

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    1. शुक्रिया स्वर्ण लिपि !

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  4. Excellent post Manish ji, Thoroughly enjoyed it. I request you to kindly provide a "Home" button to your blog, so as to enable us navigate the blog comfortably. Actually I have bookmarked your blog at my browser and every time when I click the bookmark it shows the old post page on which it was bookmarked. If Home button would be there, it will be rather easy to explore the blog.

    Thanks.

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    1. Nice to know that you liked the post Mukesh ! Home button is not explicitly written but blog header caption is actually designed as HOME button in the template :).

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  5. Maja aa gaya aapke yatra ko padh kar !! Ummed karta hooon aur bhi padhne ko milega !!

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  6. Holi ki chhutti aapke blog padkar bita rahaa hoon. Aur inmein jo aanand aa rahaa bai vo bilkul majedar hai. Holi ke rango se bhi jyada rang hain aapki post mein. Thailand ke blog aur bhi padhe hain lekin english mein. Apni bhasha mein padhne mein alag hi majaa aata hai

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