Monday, June 30, 2014

झीलें नैनीताल की : भीमताल और सतताल Lakes of Nainital : Bhimtal and Sattal

पिछली दफ़े आपको नैनीताल कै नौकुचियाताल और उसके आस पास की प्राकृतिक सुंदरता की एक झलक दिखलाई थी। इसी कड़ी में आज बारी है भीमताल और सतताल की। वैसे तो लोग गर्मियों में भी तालों के इस शहर में जाते हैं क्यूँकि तभी बच्चों की छुट्टियाँ भी होती हैं। पर अगर नैनीताल की खूबसूरत वादियों का अकूत सौंदर्य आपको अपने कैमरे में क़ैद करना हो तो अक्टूबर के उत्तरार्ध या फिर नवंबर में यहाँ जरूर जाएँ। देवदार के जंगलों के बीच गहरा नीला आसमान आपके स्वागत के लिए हमेशा तैयार मिलेगा। 

अक्टूबर के पहले हफ्ते की सुबह भी कुछ ऐसी ही सुबह थी। अपने गेस्टहाउस से बाहर चहलकदमी करने निकला तो इन चार पेड़ों को बुलंदी से सीना ताने खड़ा पाया। पेड़ों के पत्ते सूख चुके थे पर फिर भी वो ऐसे खड़े थे मानो इससे उन्हें कोई फर्क ना पड़ता हो। 


सुबह जब हम नैनीताल के तालों का दर्शन करने निकले तो घड़ी की सुइयाँ साढ़े दस बजा रही थीं। मौसम का मिजाज़ सुबह की अपेक्षा बदल सा गया था। आकाश में बादल की हल्की परत नीले आकाश को मटमैला बना चुकी थी। जब तक हम नैनीताल की भीड़ भाड़ से निकल 22 किमी की दूरी पर स्थित भीमताल पहुँचे साढ़े ग्यारह बज चुके थे।


अब नाम भीमताल है तो महाबली भीम से जुड़ी कहानियाँ भी होंगी। कहते हैं पांडवों के निर्वासन के समय भीम यहाँ पधारे थे। वैसे ये झील भीमकाय तो नहीं फिर पौने दो किमी लंबी और लगभग आधा किमी चौड़ी जरूर है। झील के पास ही भीमेश्वरमहादेव का मंदिर भी है जो सत्रहवीं शताब्दी में यहाँ के कुमाऊँ राजाओं ने बनाया था। यानि भीमताल का अस्तित्व नैनीताल से भी पुराना है।



Sunday, June 22, 2014

नौकुचियाताल : शांति और सुंदरता का अद्भुत समन्वय Naukuchiatal : Beauty in tranquility !

कौसानी, बिनसर और अपनी नैनीताल यात्रा को आगे बढ़ाते हुए आज चलते हैं नैनीताल के सबसे खूबसूरत ताल नौकुचियाताल की ओर। वैसे प्राकृतिक सुंदरता की बात करें तो सात ताल और खुरपा ताल भी ज्यादा पीछे नहीं रहेंगे पर अपने नौ किनारों के विस्तार और उनके पार्श्व में ओक के जंगलों को समेटे इस ताल के किनारे किनारे चलना या फिर इसमें नौका विहार करना कम से कम मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। 

पेड़ों की इस धानी छाँव का सुख कोई इस झील से पूछे !
अक्टूबर के महीने में जब हम नैनीताल से चौबीस किमी की दूरी पर स्थित इस झील के पास पहुँचे तो आसमान में बदली छाई थी। इस झील की सबसे बड़ा आकर्षण इसके किनारे लगे वृक्षों की कतारें और उन पर पास की पहाड़ियों से नज़र रखते घने जंगल थे। बादलों ने सूरज की रोशनी पर ऐसा पहरा लगाया था कि गहरे हरे रंग के पत्तों और धानी पत्तों के पेड़ एक दूसरे से बिल्कुल पृथक नज़र आ रहे थे। रंगों का ये विभेद हमारे सामने जो दृश्य उपस्थित कर रहा था वो मेरी स्मृतियों से ना निकला है ना निकल सकेगा। 

बोलो कैसे अपनी प्रीत दिखाऊँ.. धानी चुनरिया ओढ़ मैं साजन पे झुक जाऊँ !

ऐसा लगता था मानो पानी में खड़े ये खिले खिले से पेड़ झील के जल से अपना ममत्व दर्शा रहे हों। पेड़ों की झुरमुट में खड़ी बत्तखनुमा नौकाएँ और उनके बीच से निकलकर किनारे आते इस बत्तख के समूह को कैमरे में क़ैद करने का आनंद को बस महसूस ही किया जा सकता है।

देखो मैंने देखा है ये इक सपना झीलों के शहर में हो घर अपना..

Saturday, June 14, 2014

ब्रसल्स शहर और हवाई अड्डा (Brussels City and Airport : Aerial View)

पिछली पोस्ट में मैंने आपको बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स के आस पास के हरे भरे इलाकों के आकाशीय नज़ारे दिखाए थे। आज बारी है ब्रसल्स शहर को और करीब से देखने की। पर इससे पहले अगर इस देश के बारे में थोड़ा जान लें तो कैसा रहे ? बेल्जियम की संस्कृति और भाषा बहुत कुछ उसके पड़ोसी देशों से प्रभावित है। बेल्जियम के उत्तर में हालैंड, दक्षिण में फ्रांस और पूर्व में जर्मनी है। यही वज़ह है कि इसके उत्तरी फ्लेमिश इलाके में डच भाषा बोलने वालों का बोलवाला है तो दक्षिण में फ्रेंच बोलने वालों का। पूर्व के छोटे से हिस्से में जर्मन भाषियों की भी छोटी सी तादाद है।

A panoramic view of outskirts of Brussels
बेल्जियम के लगभग मध्य में पड़ने वाली राजधानी यूँ तो फ्लेमिश इलाके में पड़ती है पर यहाँ फ्रेंच और डच दोनों भाषाएँ बोलने वाले लोग मिल जाते हैं। वैसे कुछ देर के लिए हम जब यहाँ के हवाई अड्डे पर उतरे तो अंग्रेजी में बात करने में कोई कठिनाई नहीं हुई। एशिया से अमेरिका की उड़ान भरने वाले कई विमान कंपनियाँ ईंधन फिर से भराने या अपने पॉयलटों को आराम देने के लिए एमस्टरडम के आलावा ब्रसल्स के हवाई अड्डे का भी इस्तेमाल करती हैं।

The maroon saga...

हवाई जहाज से ब्रसल्स शहर के कई इलाके एक ही रंग में रँगे नज़र आते हैं और ये रंग है कत्थई रंग। घर की सामने की दीवारें भलें अलग हों पर छत के ऊपर के रंग में साम्यता साफ झलकती है।

A Church with in the densely populated area of Brussels

वैसे जनसंख्या के घनत्व के हिसाब से भारत और बेल्जियम लगभग बराबर हैं। पर नीचे में चित्र में देखिए किस तरह घरों के फैलाव के बीच हरित इलाकों का सही अनुपात रखा गया है।


Sunday, June 8, 2014

कैसा दिखता है ब्रसल्स (बेल्जियम) आसमान से ? Aerial View of Brussels and its adjoining areas !

पिछले महीने आपसे नैनीताल के यात्रा विवरण को साझा कर ही रहा था कि पहले घर की एक शादी के सिलसिले में नई दिल्ली जाना पड़ा और फिर वहीं से अनायास एक हफ्ते के लिए कनाडा के नियाग्रा जाने का कार्यक्रम बन गया। इन वज़हों से पिछले दो तीन हफ्तों से इस ब्लॉग पर झाँकने की भी फुरसत नहीं मिली। बहरहाल अपनी नैनीताल यात्रा की आगे की कड़ियों को तो कुछ दिन बाद फिर आगे बढ़ाऊँगा ही। पर आज आपको दिखाने जा रहा हूँ उत्तर पश्चिमी यूरोप में हालैंड के दक्षिण में स्थित  देश बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स के कुछ आकाशीय नज़ारे जिन्हें कनाडा से आते वक़्त मैंने अपने कैमरे में क़ैद किया। जापान के धान के उन खेतों की हरियाली ने मन मोह लिया था पर यूरोप तो अपने खूबसूरत गाँवों और कस्बों के लिए पहले से ही मशहूर है। क्या यूरोप का ये देश उसकी इस छवि को सार्थक कर पाया? आप खुद ही देख लीजिए।

First View of Belgium बेल्जियम की पहली छवि

दरअसल नई दिल्ली से टोरंटो तक की यात्रा में हमें आते और जाते वक़्त ब्रूसेल्स में अपना विमान बदलना था। देर से टिकट होने की वज़ह से जाते वक़्त तो खिड़की के बगल वाली सीट हाथ नहीं लगी पर लौटते वक़्त ब्रूसेल्स के आस पास के अद्भुत नज़ारों को करीब से देखने का मौका मिला।  टोरंटो से शाम साढ़े छः बजे चलने वाली  उड़ान जब बेल्जियम की इस खूबसूरत राजधानी के पास पहुँची तो स्थानीय घड़ी के हिसाब से वहाँ सुबह के सात बज रहे थे। बाहर का तापमान बारह डिग्री था पर हल्की हल्की धूप बेल्जियम के कस्बों और शहरों में फैल रही थी।

Tiny hamlets surrounded by abundant greenery  हरे भरे जंगलों के बीच बसा छोटा सा कस्बा

तिकोनी छत यूरोप और अमरीका के घरों की पहचान है। शायद ही हममें से कोई ऐसा हो जिसने अपनी ड्राइंग की कक्षा में ऐसे घर ना बनाए हों। जाड़े में बर्फ छतों पर ना जमें इसीलिए ऐसे घर यहाँ आम होते हैं। इन चित्रों से कई बातें स्पष्ट हैं। सारे गाँव और कस्बे सड़कों से जुड़े हैं और बेहद साफ सुथरे हैं। घरों के पास सड़कों की बगल में जो आप लाल धारियाँ देक रहे हैं वो फुटपाथ की हैं। हमारे गाँव और कस्बों में तो ऐसी कल्पना करना भी मूर्खता होगी।
How beautiful is this town कितना प्यारा है ना ये कस्बा ?

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