Friday, March 13, 2015

प्रकृति व लोकरंग कलाकारों के संग ... International Friendship Art Workshop-cum-Exhibition at Shyamali, Ranchi

किसी नई जगह पर हम जाते हैं तो वहाँ की खूबसूरती को अपने क़ैमरे में क़ैद करने की कोशिश करते हैं। उस जगह के कुछ लोग , कुछ मंज़र, कुछ दिलचस्प बातें जरूर दिमाग में घर कर जाती हैं जैसे जैसे वक़्त बीतता है ये यादें धुंधली हो जाती हैं। पर जब एक कलाकार गाँवों, कस्बों, शहरों से गुजरता है, लोगों से मिलता है और उनके परिवेश को समझता है तो उसका प्रतिबिंब वो मन मस्तिष्क में बसा लेता है। फिर वही बिंब किसी कैनवस, किसी शिल्प पर यूँ उभरता है कि वो उन यादों को पुनर्जीवित कर देता है। 

Painting themes varied from people, nature and local culture

फरवरी के आख़िरी सप्ताह में देश और विदेशों से कलाकारों का जमघट जब राँची के श्यामली स्थित रोज़ गार्डन में उतरा तो इन कलाकारों के मन की भावनाओं को कैनवस और तराशे जा रहे पत्थरों पर प्रत्यक्ष देखने का अवसर मिला। अक़्सर ऐसी कार्यशाला और प्रदर्शनी बड़े शहरों में लगा करती हैं पर   International Friendship Art Workshop-cum-Exhibition के तहत पहली बार आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, थाइलैंड, नेपाल, बाँग्लादेश और भारत के लगभग तीस कलाकारों को काम करते और अपनी कलाकृतियों को अंतिम रूप देते देखने का मौका राँची के लोगों को मिला।

Rose Garden, Shyamali, Ranchi
उद्यान के मुख्य भाग में बनी हुई पे्टिंग की प्रदर्शनी चल रही थी जब की शिल्पकार और चित्रकार बागीचे के अलग अलग भागों में बने सफेद गुलाबी कक्ष के अंदर अपने शिल्प और चित्रों को सँवार रहे थे। अपने काम में तल्लीन इन कलाकारों को चित्रों और शिल्पों को मूर्त रूप देते देखना अपने आप में एक अलग अनुभव था।

Artist at work  : Clockwise from left Manoj Sinha, Australia's Birgit Grapentin, Raghu Nath Sahu, Susant Panda & Bina Ramani



मनोज सिन्हा की इस पेंटिंग को प्रदर्शनी के शुरु में बनते हुए और फिर उसके अंतिम रूप में देखा।।
Manoj Sinha's Creation बाँस के झुरमुटों के दर्शन कराते मनोज सिन्हा
सिन्हा जी के पीछे कोलकाता से आया कलाकार बड़ी बड़ी इमारतों की तस्वीर बना रहा था। उनका कहना था कि कोलकाता में आपको राँची जैसी हरियाली नहीं दिखेगी पर उस कंक्रीट जंगल में भी अपनी एक खूबसूरती है जिसे मैं अपनी पेंटिंग में उभारने की कोशिश  कर रहा हूँ।


उड़ीसा के गंजाम जिले से आए सुशांत पंडा  ने प्रकृति को अपनी चित्रकला का विषय बना रखा था। मैंने जब उनसे पूछा कि क्या वो पहले से ही ये सोचकर आए थे कि अपनी पेंटिंग में गुलाब की रंगत और चिड़ियों की चहचहाहट बिखेरेंगे तो उन्होंने कहा कि नहीं ये थीम तो मुझे इस गुलाब वाटिका और राँची के शानदार मौसम को देख के सूझा। सच उनकी इस उड़ती चिड़िया को देख मेरे मन का पंछी भी उड़ने लगा।

Raghu Nath Sahu 's theme A cute girl outside his house
रघुनाथ साहू उड़ीसा के एक ऐसे कलाकार हैं जिन्हें वॉटर कलर में महारत हासिल है। ग्रामीण परिवेश पर बनाए गए उनके चित्र वाकई शानदार हैं पर यहाँ वो बड़े चटकीले रंगों में एक लड़की को अपने छोटों से घर के बाहर सजाते दिखे। उनकी सोच देखिए घर के ऊपर लतर की तरह फैलती बेलें लड़की के कपड़ों में उतर आयी हैं। मैंने उनसे पूछा कि ये लड़की कुछ विदेशी सी दिख रही है तो उन्होंने बताया कि इसे बनाते वक़्त उनके मन में देशी विदेशी का नहीं बल्कि सिर्फ एक लड़की का ख्याल था..

A colourful creation by Sapna Das
सी आर हेम्बरम झारखंड के जमशेदपुर से सटे घाटशिला इलाके से आते हैं। गढ़वा के नवोदय विद्यालय में कला के शिक्षक हैं। पिछले साल उड़ीसा की ललित कला अकादमी द्वारा सम्मानित भी किए गए थे।  एक्रिलिक रंगों में माहिरी रखने वाले हेम्बरम अपने कैनवास को धातुई रंगों से एक अलग ही पहचान देते नज़र आए। उनके चित्रों में रंगीन चश्मा पहने नवयुवती सबका ध्यान आकर्षित कर रही थी।

C R Hembram's creation !
शिल्पकारों में सबसे खूबसूरत शिल्प मुझे थाइलैंड से आए कलाकार Loppadon Viroonchatapun का लगा। पहली बार राँची आने वाले Loppadon ने यहाँ के झरनों के बारे में गूगल के माध्यम से पहले ही जानकारी ले ली थी। सो उन्होंने ने अपना ही चेहरा बनाया जो एक झरने की गोद में सोया हुआ प्रकृति का आनंद ले रहा है।

Final sculptors of various artists
आस्ट्रेलिया की ब्रिजिट को अपने शिल्प (ऊपर के कोलॉज में नीचे सबसे बाएँ )  को बनाते वक़्त मन में भारत की बोझ ढोती मजदूर महिलाओं द्वारा करीने से पहनी साड़ी याद आ रही थी। चुन्नटों में सिमटे  इस परिधान को ही उन्होंने अपने शिल्प में बाँधने की कोशिश की। राँची की बीना रमानी का शिल्प प्रकृति का दमन कर उभरते कंक्रीट जंगलों को दिखा रहा था।

पूरे आयोजन में सबसे अधिक लाभान्वित वे बच्चे हो रहे थे जिन्हें कल के इन धुरंधरों के क्रियाकलापों को देखने का मौका मिल रहा था। बहुतेरे ऐसे लोग भी उत्सुकतावश पहुँचे थे जिन्होंने जीवन में कभी भी ऐसी प्रदर्शनी में हिस्सा नहीं लिया था। मेरी समझ से ऐसे आयोजन हर छोटे बड़े शहरों में होने चाहिए ताकि जो लोग कला से जुड़ी इन विधाओं में रुचि रखते हैं वो इससे प्रेरित होकर अपने हुनर को और विकसित कर सकें।

तो कैसी लगी आपको ये कला प्रदर्शनी? उड़ीसा की यात्रा को ज़ारी रखते हुए अगली पोस्ट में लौटेंगे बरहमपुर के एक प्रसिद्ध मंदिर को देखने। अगर आपको मेरे साथ सफ़र करना पसंद है तो फेसबुक पर मुसाफ़िर हूँ यारों के ब्लॉग पेज पर अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराना ना भूलें। मेरे यात्रा वृत्तांतों से जुड़े स्थानों से संबंधित जानकारी या सवाल आप वहाँ रख सकते हैं।

5 comments:

  1. अच्छी कला प्रदर्शनी का आयोजन हुआ है रांची में.... कला चित्रो सहित जानकारी देने के लिए शुक्रिया…!!

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    1. आपको लेख रुचिकर लगा जानकर प्रसन्नता हुई।

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  2. अच्छी कला प्रदर्शनी का आयोजन हुआ है रांची में.... कला चित्रो सहित जानकारी देने के लिए शुक्रिया…!!

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  3. हमें तो पता ही नहीं चला... :(

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    1. राँची के सारे अख़बार में तो ख़बर छपी थी।

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