Sunday, January 24, 2016

सफॉरी वर्ल्ड, बैंकाक : आइए ले चलें आपको पक्षियों के रंग बिरंगे संसार में Safari World, Bangkok Part-I

बैंकाक की यात्रा में मैं आपको पिछली दफ़े ले गया था शहर के मध्य से बहने वाली नदी चाओ फराया के नाइट क्रूज पर। अगर आप परिवार के साथ बैंकाक की यात्रा पर हों तो यहाँ के सफारी वर्ल्ड की यात्रा करना ना भूलें। यहाँ बिताया हर एक पल आप अपनी स्मृतियों में बरसों सँजोयें रहेंगे। आप भी सोच रहे होंगे कि आख़िर  ऐसा क्या है ऐसा इस सफारी पार्क में ?

दुनिया का सबसे रंग बिरंगा पक्षी मकाव  Macaw

दरअसल बैंकाक से चालीस किमी दूर स्थित इस पार्क को एक खुले चिड़ियाघर की तरह बनाया गया है जिसके अंदर आप भी  जानवरों व पक्षियों के संग होते हैं। यानि यहाँ आप होंगे अपनी कार में  और शेर,जेब्रा, जिराफ़ से लेकर तरह तरह के पक्षी  एकदम आपके बगल से यूँ गुजर जाएँगे कि आप हक्के बक्के ही रह जाएँ।

फ्लेमिंगों का एक झुंड Flamingos in all their glory

सफारी वर्ल्ड दो हिस्सों में बँटा हुआ है । एक तो सफारी पार्क जिसमें करीब पाँच सौ एकड़ भूमि जानवरों को खुले में विचरने के लिए छोड़ दी  गयी है जबकि बाकी के 180 एकड़ भूमि पर जलचरों का कब्जा है। दूसरे हिस्से में मेरीन पार्क है जहाँ जाने वालों के मनोरंजन के लिए तमाम शो की व्यवस्था है। बैंकांक शहर से सफारी वर्ल्ड की चालीस किमी की दूरी तय करने में करीब एक घंटा लगता है। सफारी पार्क के अंदर आप अपनी आरक्षित कार या फिर पार्क की मिनी बस से प्रवेश कर सकते हैं। इस खुले चिड़ियाघर के चारों ओर फैली सड़कों पर धीरे धीरे चलती आपकी गाड़ी कुल पौन घंटों का समय लेती है। तो चलिए आज की इस कड़ी में आपको मिलवाते हैं दुनिया के विभिन्न हिस्सों से यहाँ बसाए कुछ पक्षियों से.

सफारी पार्क की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि यहाँ आप उन पक्षियों को भी देख पाते हैं जो इस इलाके के सामान्यतः बांशिदे नहीं है। हमारा सफर शुरू ही हुआ था कि ठुम्मक ठम्मक की चाल से चलते इन मुकुटधारी क्रेन की जोड़ी दिखी तो ड्राइवर से कह कर इन्हें करीब से देखने के लिए गाड़ी रुकवा ली गई।

मुकुटधारी स्याह क्रेन, Gray crowned crane

केन्या, कांगो और यूगांडा में पाए जाने वाले इस सुन्दर व दुर्लभ पक्षी को वहाँ देख कर हम निहाल हो गए। इन पक्षियों की खूबी ये है कि प्रणय निवेदन करते समय नर और मादा दोनों ही नृत्य करते हैं। और तो और बेगानी शादी में अबदुल्ला दीवाना की तर्ज पर जब प्रेमी युगल ये नृत्य कर रहे होते हैं तो बाकी युवा क्रेन भी इस नाच में शामिल हो जाते हैं। वैसे एक खास बात और है इनकी। ये पक्षी एक देश के राष्ट्रीय ध्वज का भी हिस्सा हैं। बताइए तो कौन सा देश है वो?


थोड़ी दूर और आगे बढ़े तो ये पीली चोंच वाला सारस एक बुजुर्ग की तरह हमारी आवाभगत के लिए तैयार मिला। छोटी सी काली पूँछ, सफेद पर व गुलाबी पैरों वाला ये सारस मूलतः पूर्वी अफ्रिका का निवासी है। पर इसे पहली नज़र देखने पर निगाहें इसकी पीली घुमावदार चोंच पर ही जा ठहरती है।

पीली चोंच वाला सारस Yellow billed stork

सड़क के दोनों तरफ, छोटे बड़े तालाबों में जिधर देखो तरह तरह के जलीय पक्षियों की बहार थी। कुछ तैर रहे थे तो कुछ किनारे आराम फरमा रहे थे।


और इन जनाब ने तो पेड़ की फुनगियों पर मोर्चा सँभाल रखा था।

यहाँ से ठीक से दिखेगा भोजन हमारा :) Pelicans at the top of the tree

हवासील A group of Pelicans
पेलिकन प्रजाति के पक्षियों के जमावड़े से आगे हमें अगला झुंड फ्लेमिंगो का मिला।  हिंदी में इन्हें मराल के नाम से जाना जाता है पर ज्यादा प्रचलित फ्लेमिंगो ही है जो एक स्पैनिश शब्द 'फ्लेमेनको' से बना है जिसका अर्थ होता है आग के रंग का। अब मराल का जो झुंड हमें दिखा वो लाल से ज्यादा अपने शरीर पर गुलाबियत ओढ़े था। भाई  इनकी सुराहीदार गर्दन व गुलाबी चोंच और पैरों पर कोई क्यूँ ना फिदा हो जाए? हमें तो ये अपने दोनों पैरों पे खड़ी दिखाई दीं पर इनके बारे में मशहूर है कि ये पानी में घंटों एक पैर पर खड़ी रह सकती हैं। ऐसा शायद ये शरीर से गर्मी ना निकलने देने के लिए करती हैं।

मराल समूह Group of beautiful Flamingos
जलीय पक्षियों के इलाके को छोड़ जब हम मेरीन पार्क पहुँचे तो हमें भांति भांति के तोते देखने को मिले। लाल, पीले , नीले यानि वो सभी रंग जिनमें उन्हें हमने पहले नहीं देखा था और इनका तो रंग संयोजन ही कुछ अलग था। 


फिर इनके सहोदर मकाव की तो बात ही क्या थी। सारे कैमरों की आँखें इन पर ही टिकी थीं। भगवान ने इन्हें इतने भड़कीले रंग देकर इनकी ज़िंदगी ही खतरे में डाल दी है। पक्षियों के व्यापार में ज्यादा माँग होने की वज़ह से ये अक्सर शिकारियों के निशाने पर रहते हैं। सवाना के वर्षा वनों से लेकर कैरेबियन तक का इलाका इन की रिहाइश का इलाका है।

नीले पीले मकाव A group of blue yellow Macaw
वैसे खुले चिड़ियाघर से अलग मेरीन पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए एक बर्ड शो अलग से होता है। चलते चलते वहाँ की एक मजेदार घटना बताता हूँ। ट्रेनर चिड़िया को कंधे में बिठाकर लोगों को पूछता है कि आपके पास कितने तरह के नोट हैं? पहले तो कोई दर्शक बताता नहीं  कर कि पता नहीं क्यूँ पूछ रहा है? ख़ैर ट्रेनर बताता है कि आप सारे नोट इस पक्षी की ओर दिखाएँ। पक्षी नोट देखते ही उड़ान भरता है और अपनी चोंच से नोटों का मुआयना कर सबसे बड़े मूल्य वाला नोट ले कर फुर्र हो जाता है। थोड़ी देर भुक्तभोगी को तनाव में रख पैसा लौटा दिया जाता है पर बच्चे व बड़े भी एक विशाल  से पक्षी को ऐसा करते देख अचरज और खुशी से तालियाँ बजाते हैं।


शो के अंत में तोते रस्सी पे साइकिल चलाते हुए  हम से विदा लेते हैं। पर अगर आप सोच रहे हें कि सफारी वर्ल्ड का दि एन्ड भी इसी के साथ हो गया तो ये बता दूँ कि इस भाग में तो मैंने आपको पक्षियों से मिलाया है। अगली कड़ी में बताएँगे जंगल के राजा व जिराफ से कुछ फुट दूर से हम किस तरह मिले? 

अगर आपको मेरे साथ सफ़र करना पसंद है तो फेसबुक पर मुसाफ़िर हूँ यारों के ब्लॉग पेज पर अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराना ना भूलें। मेरे यात्रा वृत्तांतों से जुड़े स्थानों से संबंधित जानकारी या सवाल आप वहाँ रख सकते हैं।

11 comments:

  1. सुन्दर चित्र, सुन्दर वृत्तान्त...

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    1. सराहने के लिए शुक्रिया !

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  2. यहाँ ज़ू में भी रंग-बिरंगे बहुत सुन्दर पंछी है

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    1. हाँ बस अंतर इतना है कि यहाँ वो किसी जाली के अंदर नहीं बल्कि आप के साथ घूम रहे होते हैं। मुकुटधारी क्रेन व मकाव तो मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार यहीं देखे।

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  3. शानदार सफारी का बेहतरीन वर्णन

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    1. जानकर खुशी हुई कि आपको ये विवरण पसंद आया।

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  4. अति सुन्दर पंक्षीयो के चित्र है ।
    seetamni. blogspot.in

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  5. बहुत ही अनूठे और सुंदर तस्वीरें.

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    1. सराहने का शुक्रिया !

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  6. शुक्रिया रितेश गुप्ता जी का इसकी facebook पोस्ट में आपका लिंक मिला धन्यवाद

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