Friday, June 3, 2016

उत्तर कोरिया में कोई भगवान नहीं है ... There are no Gods in North Korea!

घूमने के लिहाज़ से उत्तर कोरिया कैसी जगह है ? आप ये प्रश्न सुनकर यही कहेंगे कि मज़ाक कर रहे हैं क्या! पर आपसे यात्रा से जुड़ी जिस किताब का आज जिक्र छेड़ना चाह रहा हूँ उसका शीर्षक ही है There are no gods in North Korea. पुस्तक का मुखड़ा देख कर तो यही लगता है कि ये किताब उत्तर कोरिया के बारे में होगी। पर ऐसा है नहीं। पेशे से एक समय वकील व फिर पत्रकार रह चुकी अंजली थॉमस  ने इस किताब में उत्तर कोरिया के साथ मंगोलिया, चीन, यूगांडा, केनिया और तुर्की जैसे देशों के अपने संस्मरणों को भी जगह दी है। 



कम्युनिस्ट उत्तर कोरिया अपने आप में हम सबके लिए अबूझ पहेली रहा है। इसलिए जब लेखिका ने इस पुस्तक को समीक्षा के लिए मेरे पास भेजा तो लगा कि मुझे अब इस देश को एक नए सिरे से जानने का मौका मिलेगा। पर उत्तर कोरिया की सरकार ने ये पहले से ही सुनिश्चित कर रखा है कि वहाँ आने वाला क्या देखे, क्या सुने और क्या खाए। अंजली को ये दुखद सच वहाँ जाकर मालूम हुआ। पर इतनी रोक टोक के बीच वो ये जानने में सफल रहीं कि उत्तर कोरिया में भगवान आसमान की तहों में नहीं पर ज़मीन पर अपनी निरंकुश  सत्ता से राज करते हैं।

हर एक यात्रा लेखक का यात्रा का अपना नज़रिया होता है। अंजली का भी है। वो लोगों से घुलती मिलती हैं। स्थानीय स्वाद का ज़ायका लेना नहीं भूलती  और इन सब के बीच वो अपने मन में चल रही उधेड़बुन के बारे में इतना जरूर बता देती हैं कि आप उनके व्यक्तित्व का खाका खींच सकें।

पर वो अपने गन्तव्य के बारे में हल्की सी भूमिका देकर उसे अपनी आँखों से रूबरू नहीं करातीं।  मसलन आप ये नहीं जान पाते कि पहली बार जब उत्तर कोरिया में सरकारी निगाहों से दूर एक छुक छुक चलती गाड़ी में  वो बैठीं तो उन्हें वो देश अपने वास्तविक रूप में कैसा नज़र आया? केनिया  के घने जंगलों की सरसराहट और उनमें रहने वाले बाशिंदों का खौफ़ आप तक पहुँच नहीं पाता। यूगांडा में नील नदी का मुहाने या फिर उसमें स्थित Murchison Falls या तुर्की के बालों के संग्रहालय तक तक पहुँचने का रोमांच तो होता है पर मंजिल पर पहुँचने के बाद बिना किसी विवरण के वो रोमांच कुछ क्षणों में काफूर हो जाता है।

पर वहीं जब वो हर एक देश के अलग अलग लोगों से मिलती हैं। उन्हें अपना दोस्त बनाती हैं तो उस मेलजोल से बहुत सारी ऐसी बातें निकल कर आती हैं जो वहाँ के लोगों की सोच,रहन सहन और मान्यताओं को दर्शाती हैं और यही इस किताब का सबसे मजबूत पक्ष भी है। जैसे उत्तर कोरिया में हर कोई अमेरिका नहीं बल्कि चीन में जाने के सपने देखता है। चीन में लड़कियाँ ऊपर से कितनी चिकनी सुंदर दिखें पर अपनी आर्मपिट पर रेज़र नहीं चलातीं। यूगांडा में  वहाँ के शाही स्मारक में शुक्रवार को जाना आपको काबका के शाही हरम में दाखिला करा सकता है। तुर्की में एक नए आंगुतक का स्वागत लोग थालियाँ तोड़ कर करते हैं। मंगोलिया विश्व के नज़रिए की परवाह किए बगैर आज भी अपनी पहचान लड़ाके चंगेज़ खाँ में खोजता है।

शाकाहारियों को इस किताब को पढ़कर ये आसानी से समझ आ सकता है कि मंगोलिया, उत्तर कोरिया और चीन जैसी जगहें उनका वज़न घटाने के लिए कितनी माकूल साबित हो सकती हैं। अंजली के अनुभव ये बताते हैं कि अकेले घूमते हुए  हॉस्टल और डारमेट्रियाँ में रहना न केवल आपकी जेब को हल्का नहीं होने देता बल्कि आपकी ज़िन्दगी में नयी पहचानों का भी सबब बनता है। 

बहरहाल अगर आप कॉफी और बियर के शौकीन हों, किसी जगह के इतिहास, भूगोल व प्रकृति से ज्यादा वहाँ के लोगों और खान पान में डूबना आपको  पसंद हो, किसी यात्रा वृत का  लेखक की निजता से जुड़ना आपको असहज नहीं करता और सहज कथ्य शैली आपको रुचती हो तो ये किताब आपको जरूर पसंद आएगी अन्यथा उत्तर कोरिया की तरह ही इसे आप अपनी पुस्तकों की आलमारी से दूर रख सकते हैं।

पुस्तक के बारे में
प्रकाशक : नियोगी बुक्स, पृष्ठ संख्या : 235, मू्ल्य : 350 रुपये

अगर आपको मेरे साथ सफ़र करना पसंद है तो फेसबुक पर मुसाफ़िर हूँ यारों के ब्लॉग पेज पर अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराना ना भूलें। मेरे यात्रा वृत्तांतों से जुड़े स्थानों से संबंधित जानकारी या सवाल आप वहाँ रख सकते हैं।

12 comments:

  1. बहुत दिन बाद ढंग की किताब के बारे में पढा । flipcart पर मिल जाएगी ना ?

    ReplyDelete
  2. उत्तर कोरिया एक अजीब सा देश है, और उससे भी अजीब है उसका तानाशाह.. हिस्ट्री टी.वी. पे एक कार्यक्रम देखा था इस देश से जुड़ा.. तभी से जब भी इस देश का नाम सामने आता है, आंख, कान खड़े हो जाते हैं.. :) :)
    बहरहाल, किताब पढ़ने का मन है.. कहां से ले सकते हैं?

    ReplyDelete
    Replies
    1. आमेजन पर यहाँ से खरीद सकते हैं.. http://www.amazon.in/There-Are-Gods-North-Korea

      Delete
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (04-06-2016) को "मन भाग नहीं बादल के पीछे" (चर्चा अंकः2363) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार !

      Delete
  4. अच्छी समीक्षा

    ReplyDelete
  5. आपके मर्मस्पर्शी शब्दों ने पूरी पुस्तक ही पढ़ा दी है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. मैंने तो आपको बस एक झलक दिखलाई है इस पुस्तक की !

      Delete
  6. north korea mai bus waha k tanashah ki chalti hai,,,apka acha post tha,,read krke acha laga
    http://www.yatrapackage.com

    ReplyDelete

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails