Monday, July 10, 2017

The Sacred Sorrow of Sparrows : विश्व के अलग अलग कोने में उदास मानव हृदयों को जोड़ती दस कहानियाँ !

The Sacred Sorrow of Sparrows कोई यात्रा वृत्तांत नहीं है इसलिए इस किताब के प्रकाशक नियोगी बुक्स ने इसे मेरे जैसे यात्रा लेखकों के पास समीक्षा हेतु भेजने की इच्छा ज़ाहिर की तो मुझे कौतूहल जरूर हुआ। जब इस संग्रह की कहानियों से पर्दा उठने लगा तो समझ आया कि ये हम जैसे यात्रा प्रेमियों को क्यूँ भेजी गयी है? 

बस समझ लीजिए गर कोई घुमक्कड़ लेखक अपनी यात्राओं के दौरान मिले चरित्रों के इर्द गिर्द घटी घटनाओं को उन शहरों के अक़्स और संस्कृति के साथ आत्मसात करते हुए कहानियों की शक़्ल में परोस दे तो ऍसी किताब सामने आती है।


इस किताब के लेखक सिद्धार्थ दासगुप्ता यूँ तो पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा से विज्ञापन जगत से जुड़े हैं पर यात्रा करना उन्हें शुरु से भाता रहा है। उनका पहला उपन्यास Letters from an Indian Summer पेरिस से लेकर बनारस के गली कूचों तक गुजरा था। The Sacred Sorrow of Sparrows की दस कहानियाँ तो सुदुर पूर्व के टोक्यो से लेकर लखनऊ, दिल्ली, पुणे, मुंबई, दुबई, इस्फहान, इस्तांबुल होते हुए लेबनान जा पहुँचती हैं। लेखक का कहना है कि इन कहानी के चरित्रों के अंदर बहती उदासी ही उन्हें एक सूत्र में जोड़ती है। क्या ऐसा सचमुच है ये जानने के लिए आपको ले चलते हैं इन कहानियों की ओर।

दुबई विस्थापितों का शहर है। अपनी जड़ों से कटे होने के बाद लोग यहाँ एक सुनहरे भविष्य की तलाश में आते हैं। ये शहर उन्हें रोज़ी रोटी तो देता है पर साथ ही अपने घर परिवार से दूर कर देता है। कहानी संग्रह की पहली कथा ऐसे ही एक अफ़गानी बेकर की है जो अपने कनाडा में रह रहे बेटे की वापसी के सपने जोह रहा है। पर क्या वो अपने बेटे के लिए बुने सपनों को वो मूर्त रूप दे पाता है? ये कहानी बताती है कि अपने परिवार की खुशहाली के लिए एकाकी जीवन जीते तमाम प्रवासियों को क्या कुछ खोना पड़ता है।

मेरा बचपन भी रेलवे लाइन की पटरियों के पास के घर में गुजरा है और यही संग्रह की दूसरी कहानी का परिवेश भी है। सिद्धार्थ जब पटरियों से सटे ऍसे ही एक घर के सदस्यों का जीवन एक गुजरती ट्रेन के साथ गूँजती दर्दनाक चीख से जोड़ते हैं तो मन सहम कर कहानी से बँध जाता है। सिद्धार्थ की अगली कहानी गुलमोहर ड्राइव पुणे के पारसी परिवार से जुड़ी एक  कामकाजी युवती की पुराने रिश्तों और अतीत के कृत्यों से हुई आत्मगलानि से उबरने की प्यारी दास्तान है।

आरंभिक कहानियों का ये बंधन संग्रह की अगली कहानियों Reversal and its residues, Dawn's Fatal Betrayal, Once Upon A Mystic Sky और In Symphonies we flow में कमज़ोर कथानक की वज़ह से ढीला पड़ता नज़र आता है। पर In deep sleep  के शहर टोक्यो में नींद से जुदा एक कन्या के जीवन में जब वो डा.ड्रीम का रहस्यमयी चरित्र गढ़ते हैं तो पाठक एक बार फिर विस्मित हो जाता है। The Thousandth Bridge  पुलों को अपनी चित्रकला का विषय बनाने वाली एक लड़की की कहानी है जिसमें लेखक ना केवल ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर इस्फहान के गौरवशाली इतिहास की झलक दिखाते हैं  पर साथ में आज के ईरान के बदलते स्वरूप का अंदाजा भी दे देते हैं।

सिद्धार्थ दासगुप्ता

इतना तो तय है कि जहाँ भी लेखक के कदम पड़े हैं उन्होंने उस जगह को बड़ी नज़दीकी से देखा परखा है। दुबई के मीना बाजार की चहल पहल हो या पुणे का कोरेगाँव पार्क का हरा भरा शांत वातावरण, टोक्यो की रात की रंगीनियाँ हो या इस्तांबुल की उदास गलियाँ सब उनकी लेखनी में सहज उतर जाता है। एक यात्री के नाते अगर आप उन जगहों से गुजरे हैं तो यकीनन सिद्धार्थ का वर्णन पढ़कर आपको खासा आनंद आएगा जैसा कि मेरे साथ टोक्यो से जुड़ी कहानी In deep sleep पढ़ते हुए हुआ। पर लेखक नयी जगहों और उनकी संस्कृति व इतिहास में भी रुचि पैदा करने में सफल रहे हैं। ईरान के इस्फहान के उनके विवरण ने तो मेरे मन में वहाँ जाने की उत्सुकता पैदा कर दी।

अच्छे यात्री के आलावा सिद्धार्थ की लेखनी में एक प्रवाह है,एक कविता है। Once Upon A Mystic Sky में जब वो सूफी संगीत का वर्णन करते हैं तो लगता है मन में रागिनी पैदा हो रही हो। लेखक अपने सूक्ष्म चिंतन से आम सी लगने वाली बातों को भी खास बना देते है। । गुलमोहर के पेड़ को ही ले लीजिए चढ़ती गर्मी में कैसा सुर्ख लाल रंग लिए दहकता है और बारिश की रुत आते आते अपनी रंगीनियत अचानक से खो देता है। सिद्धार्थ अपनी कहानी Gulmohar Drive में इस प्राकृतिक घटना को इंसानी रिश्तों से खूबसूरती से जोड़ते हुए कहते हैं..

"वे बारिश की पहली झड़ी को बर्दाश्त कर लेंगे। यहाँ तक और ज्यादा संख्या में फूल कर वो इस बात की गवाही देंगे कि उनमें उमंग की कोई कमी नहीं हुई है। ऐसा लगने लगेगा कि वो मेरी गली में हमेशा यूँ ही खिलते रहेंगे। जब बारिश तेज होगी, जो कि अभी हो रही है तो उनकी पत्तियाँ सिकुड़ने लगेंगी, रंग फीका पड़ जाएगा, अक़्स मिट जाएगा और अचानक एक दिन वो गायब हो जाएँगे। जैसे वे मेरी ज़िंदगी का, गर्मी की उस पहली तपिश का, बरसात में आने वाली उस सोंधी महक का कभी हिस्सा  थे ही नहीं।"

अपनी प्रस्तावना  में लेखक कहते हैं ये कहानियाँ दुखी करने वाली कहानियाँ नहीं है। आपको दुखी करना मेरा उद्देश्य नहीं है। शायद पुस्तक के शीर्षक को सार्थक करने के लिए उनका ये कहना जरूरी रहा होगा। पर अगर वो ये नहीं कहते तो बेहतर होता क्यूँकि पाठक हर कहानी में एक अनहोनी की प्रतीक्षा में रहता है और कई बार उसका पूर्वानुमान भी लगा लेता है। The Baker from Kabul और Dawn's Fatal Betrayal मैं मैं इसी "predictability" का शिकार हुआ। वहीं कुछ प्रेम कथाओं Reversal and its Residues और In Symphonies We Flow में लेखक विरह की आसन्न अवस्था से उपजे दर्द को कथानक में प्रभावी ढंग से उतार नहीं पाते ।

किताब के समापन का लेखक का अंदाज़ निराला है। सूफ़ियत के रंग में रँगी संग्रह की आख़िरी कहानी में लेखक का नायक एक ऐसी शक्ति का स्वामी बनता है जो लोगों के दुखों को उड़न छू करने की ताकत रखता है। लेखक इस शक्ति का सारी कहानियों को एक सूत्र में पिरोने के लिए कैसे  इस्तेमाल करते हैं वो तो मैं अभी आपको नहीं बताऊँगा। हाँ, इतना जरूर कहना चाहूँगा कि  अगर आपके मन में पीछे पढ़ी हुई कहानियों को लेकर प्रश्न उमड़ घुमड़ रहे हों तो आखिरी कहानी को ज़रा ध्यान से पढ़ियगा क्यूँकि वहाँ आपको अपने सारे अनुत्तरित प्रश्नों का जवाब मिल जाएगा।

किताब की अंतिम कथा में मानव जीवन से जुड़ा लेखक का अद्भुत चिंतन

चलते चलते वापस लौटते हैं इस किताब के शीर्षक The Sacred Sorrow of Sparrows की ओर। आख़िर ये शीर्षक रखने की लेखक की क्या मंशा थी? लेखक का मानना है कि मनुष्य द्वारा महसूस की जाने वाली भावनाओं में दुख ही है जो सबसे ज्यादा खिंचता है और अनायास ही चला आता है। हर शख़्स उनके बीच एक छोटी सी गौरैया की तरह अपने पंख फड़फड़ाता है, उनको सहता है और उनके बीच आशा की किरण जगा कर जीता है।

किताब की  जो बातें मुझे पसंद आयीं और जो नापसंद रहीं उसकी चर्चा तो मेंने कर दी। अगर दुनिया के अलग अलग कोने में अपनी सामान्य सी ज़िदगी  जीते इन किरदारों की उदासी में आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आमेजन से ये किताब यहाँ खरीद सकते हैं। मेरे द्वारा की गयी पुस्तक चर्चाओं की सूची आप यहाँ भी देख सकते हैं।

8 comments:

  1. घुमक्कड़ी से अलग कुछ नया पढ़ने को मिला

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    1. घुमक्कड़ी के लिहाज से इस किताब को पढ़ते वक़्त एक नए शहर से मुलाकात हुई। लेखक के दिए विवरण के आधार पर गूगल पर तहकीकात की तो कई हसीन मंज़र देखने को मिले। ये शहर है इरान का इस्फहान!

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  2. एक घुमक्कड़ द्वारा दूसरे घुमक्कड़ की समालोचना अच्छी लगी।

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    1. शुक्रिया! कभी कभी दूसरों की नज़र और परिपेक्ष्य से दुनिया और हमारे आस पास के किरदारों को देखना अच्छा लगता है।

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  3. गौरैयों का पवित्र दुख!! (Translated by google)

    Sir, You're awesome writer. Waiting for at least one book from you too.

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    1. Thanks for the compliment LS ! Writing a book requires more skills and time than what I have right now.

      BTW what is full form of LS :)

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  4. Thank you for this lovely, intelligent review!

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    1. You are welcome Siddharth ! Glad that u liked it

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