Thursday, September 6, 2012

मेरी जापान यात्रा : माउंट फूजी व हरे भरे खेत खलिहान !

चीन , अमेरिका, ब्राजील और भारत की तुलना में जापान एक छोटा सा देश है। एक ऐसा देश जहाँ की शहरी आबादी भारत के महानगरों को भी टक्कर दे सके। पर जापान के टोक्यो (Tokyo) और ओसाका (Osaka) जैसे महानगरों में दूर दूर तक दिखते कंक्रीट के जंगलों के परे भी एक दुनिया है जो दिखती तब है जब आप  इन शहरों से इतर जापान के अंदरुनी भागों का सफ़र करते है। अब आप ही बताइए जिस देश का अस्सी फीसदी इलाका छोटे बड़े पहाड़ों से घिरा हो वो भला प्रकृति की अनमोल छटा से कैसे विलग हो सकता है? हाँ ये जरूर है कि चार हजार द्वीपों के इस देश में विकास और नगरीकरण ने यहाँ की नैसर्गिक सुंदरता को चोट जरूर पहुँचाई है। पर पहाड़ों के रहने की वज़ह से अभी भी जापान के बहुत सारे इलाके इस प्रभाव से मुक्त रह पाए हैं।

पहाड़ों से सटी इन हरी भरी वादियों के बगल से जब भी हम गुजरे एक दृश्य हमें अपने मुल्क की याद बार बार दिलाता रहा । ये दृश्य था धान के लहलहाते खेतों का। दरअसल जून का महिना जापान में बारिश का होता है। ये बारिश मध्य जुलाई तक चलती है और इसी समय में धान की फसल भी बोई जाती है। 

दक्षिण और पूर्वी भारत की तरह ही जापान में चावल भोजन का अभिन्न अंग माना जाता है। चावल का शाब्दिक जापानी अनुवाद कोमे है। वैसे जापानी इसे ओ कोमे (o kome) और पकाने के बाद गो हान (go han) भी कहते हैं। वेसे 'ओ' और 'गो' उपसर्ग सम्मानसूचक हैं जिससे ये पता चलता है कि जापानी संस्कृति में शुरु से चावल को कितना महत्त्व दिया जाता रहा है। 

हवाई जहाज से जापान की इस हरियाली को देखने का अपना ही आनंद है। तोक्यो से जापान के दक्षिणी प्रदेश फुकोका की ओर जब हमारे विमान ने उड़ान भरी तो कंक्रीट के जंगलों की जगह जो दृश्य सबसे पहले दिखा था वो था हरे भरे जंगलों और धान के इन खूबसूरत खेतों का। तो चलिए ना आखिर इस हरियाली का आनंद उठाने से आप क्यूँ वंचित रहेंगे? 


बादल के पुलिंदे , बलखाती नदी , नदी के किनारे छोटे छोटे मकान और उनके पीछे  हरे भरे खेतों का काफ़िला... दिल नहीं करता आपका पंछी की तरह इन बादलों की संगत में मँडराने का...


जापान में गाँव की कोई अलग पहचान नहीं होती। आकार के मामले में वो भारत के छोटे कस्बे के समतुल्य होते हैं पर ये समानता यहीं खत्म हो जाती है। नीचे चित्र में ऐसे ही तथाकथित ग्रामीण इलाकों का नज़ारा आप देख सकते हैं।


और हाँ खेतों की ओर जाने के लिए आपको जापान में पगडंडियाँ नहीं मिलेंगी। जो लकीरें आपको खेतों के चारों ओर दिख रही हैं वो पतली पर पक्की सड़कों की हैं।


खेतों में छाया देकर कम धूप की जरूरत वाले पौधों को व्यापक पैमाने पर उगाया जाता है।


अब ये खेत हैं या गोल्फ कोर्स इसका निर्णय तो आप ही लें :)



आयताकार खेतों को घेरती आयताकार सड़कें, मजाल है कि ज़रा भी तिरछी हो जाएँ। बच्चों को त्रिकोणमिति में आयतों की परिभाषा बताने में ये चित्र बड़े काम का रहेगा ना..:)


टोक्यो  के हवाई अड्डे के आस पास के इलाके में आप अपने हवाई जहाज के नीचे से दूसरे हवाई जहाज़ को निकलता देख सकते हैं। बड़ा ही रोमांचक दृश्य होता है ये..


जापान के प्रतीक चिन्हों में अगर इसकी प्राकृतिक विरासत की बात होती है तो पहला नाम आता है माउंट फूजी  (Mount Fuji) का। अगर आपका भाग्य साथ दे तो तोक्यो की किसी गगनचुंबी इमारत से आप इस खूबसूरत पर्वत का नज़ारा ले सकते हैं। हम अपनी जापान यात्रा में इस पर्वत के पास से तीन चार बार गुज़रे पर बरसाती मेघों ने इसके दिव्य दर्शन से हमें अछूता रखा। तोक्यो से हकाता जाते हुए हवाई जहाज से जरूर इसकी चोटी दिखी पर वो भी मेरी खिड़की के विपरीत दिशा में जिसे मेरे दोस्तों ने अपने कैमरे में क़ैद किया।


माउंट फूजी जिसे जापानी फूजी सान (जापानी में सान एक सम्मानसूचक शब्द है जिसका हिंदी में समानार्थक शब्द है 'जी')  कह कर बुलाते हैं, तोक्यो से 100 किमी की दूरी पर स्थित जापान का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी पर्वत है। 3776 मीटर ऊँचा ये ज्वालामुखी आज से करीब तीन सौ साल पहले अंतिम बार सक्रिय हुआ था। दूर से शंकु के आकार की इसकी बर्फ से ढकी उज्ज्वल चोटी का सम्मोहन, घुमक्कड़ों को देश विदेश से आकर्षित करता रहा है।


तो कैसी लगी जापान की ये हरी भरी झांकी ? अगली पोस्ट में आपको रूबरू कराएँगे आधुनिक जापान के एक उभरते नगर हकाता से जो जापान के दक्षिणी प्रदेश फुकोका की राजधानी है ।
    तोक्यो दर्शन (Sights of Tokyo) की सारी कड़ियाँ

      27 comments:

      1. मनीष जी.....
        बहुत अच्छी लगी जापान की हरी भरी झांकी....बहुत ही खूबसूरत...फोटो और विवरण भी माउन्ट फुजी के बारे में पहले भी काफी सुन रखा हैं....आज फोटो भी देख लिया ...|
        धन्यवाद !
        :-)

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        1. चित्र तुम्हें पसंद आए जान कर खुशी हुई रीतेश !

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      2. Bahut ache photos ke saath ne narration ko ekdum live bana diya, Manish ji. Concrete ke jangal se pare in kheto ne man moh liya...behad sunder post.

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        1. Thx Deep for your kind appreciation.

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      3. सुन्दर विवरण! चित्र भी अच्छे लगे।

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        1. शुक्रिया अनूप जी लेख पसंद करने के लिए !

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      4. From the pics they appear to be punctilious :)

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      5. we know your quality so thanks japan journay

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        1. Thx kushwaha ji !Hope you will be there all along !

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      6. Dear Manish great photo graphs. Like to know more about Japan. People, their strength and success after WW -II. As an intense explorer you must have notice which make them great.

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        1. I will off course tell about it Vijay in my future posts. But so far I have not landed to the place of our stay. So you have to wait a bit to know those details.

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      7. मनोरम दृश्य लिए है अपने केमरे से ... माउंट फूजी की अच्छी जानकारी ....

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        1. शुक्रिया दिगंबर नासवा जी लेख पसंद करने के लिए !

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      8. जानकारी भरी पोस्ट के लिए धन्यवाद ।
        आज से मैंने अपना चौथा ब्लॉग "समाचार न्यूज़" शुरू किया है,आपसे निवेदन है की एक बार इसपे अवश्य पधारे और हो सके तो इसे फ़ॉलो भी कर ले ,ताकि हम आपकी खबर रख सके । धन्यवाद ।
        हमारा ब्लॉग पता है - smacharnews.blogspot.com

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      9. हरा भरा जापान, यह तस्वीरें कांक्रीट के जंगलों में छिप जाती हैं।

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      10. बढ़िया :)
        आपने जहाज के अन्दर से इतनी फोटो क्लिक कैसे किया ? :)

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        1. जैसे पहले करता आया हूँ।:)
          तुम्हारे पुराने शहर पुणे, अपनी राँची, कोलकाता और दिल्ली की कई तसवीरें पहले भी तो शेयर की हैं। इनमें से ज्यादातर तसवीरें तब खींची गई हैं जब विमान लैडिंग नहीं कर पाने की वजह से हवाई अड्डे के चारों ओर चक्कर लगा रहा होता है या फिर टेक आफ के चार पाँच मिनट बाद।

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      11. Puneet ChoubeySeptember 13, 2012

        Nice effort. visited for the first time. would like to enjoy the details whenever I get time

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        1. Sure sir do visit and give ur views whenever possible.

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      12. मनीष जी आपके साथ की गयी जापान की ये यात्रा बहुत मनमोहक है...इतना छोटा सा देश लेकिन कितना खूबसूरत है और विकसित भी...लोगों के दिल में देश प्रेम की कूट कूट कर भरी भावना की वजह से ही ये देश कहाँ से कहाँ पहुँच गया है...हम सिर्फ अपने देश के लिए शब्दों में चिंचित होते हैं...लेकिन यूँ कोई प्रेम नहीं रखते

        नीरज

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        1. सही कह रहे हैं नीरज जी !

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      13. Replies
        1. शुक्रिया शालिनी। तुम्हारा लेख पढ़ा अच्छा साक्षात्कार है।

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      14. आपके जो चित्र है बड़े अच्छे है हम जापान के बारे में u tube से किया जो आनंद आपकी इस यात्रा व्रातंत से मिलाता है बह कही भी नहीं हिन्दी में लिखते और मजा आ जाता है धन्यबाद

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        1. शुक्रिया कुशवाहा जी..आप सफ़र में साथ बने रहें मेरी कोशिश रहेगी कि आपको इसी तरह आनंदित करता रहूँ।

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