अब तक जैसलमेर से जुड़ी इस श्रंखला में आपने थार मरुस्थल, सोनार किला और लोद्रवा के खूबसूरत मंदिरों की यात्राएँ की। आज चलिए आपको ले चलें जैसलमेर के बड़ा बाग इलाके में जो लोद्रवा के मंदिरों और जैसलमेर के बीचो बीच पड़ता है।
सत्रहवीं शताब्दी में महाराजा जय सिंह द्वितीय ने यहाँ बाँध बनाकर एक तालाब बनाया था। पानी का स्रोत मिलने से इस रेगिस्तानी इलाके में भी हरियाली का एक टुकड़ा निकल आया। जय सिंह द्वितीय के पुत्र लुनाकरण ने यहाँ एक बाग का निर्माण किया और साथ ही अपने पिता की स्मृति में एक समाधिस्थल बनाया जिसे राजस्थान में 'छतरी' के नाम से भी जाना जाता है। तभी से भाटी राजाओं की छतरियाँ यहाँ बनने लगीं। इन छतरियों पर जब सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूरज की रोशनी पड़ती है तो नज़ारा देखने लायक होता है।
सत्रहवीं शताब्दी में महाराजा जय सिंह द्वितीय ने यहाँ बाँध बनाकर एक तालाब बनाया था। पानी का स्रोत मिलने से इस रेगिस्तानी इलाके में भी हरियाली का एक टुकड़ा निकल आया। जय सिंह द्वितीय के पुत्र लुनाकरण ने यहाँ एक बाग का निर्माण किया और साथ ही अपने पिता की स्मृति में एक समाधिस्थल बनाया जिसे राजस्थान में 'छतरी' के नाम से भी जाना जाता है। तभी से भाटी राजाओं की छतरियाँ यहाँ बनने लगीं। इन छतरियों पर जब सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूरज की रोशनी पड़ती है तो नज़ारा देखने लायक होता है।

