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शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016

नोहकालिकाई, चेरापूंजी : कैसे नाम पड़ा देश के सबसे ऊँचे जलप्रपात का ? Story of Nohkalikai Falls, Cherrapunji

इस श्रंखला के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि किस तरह रास्ते की हरियाली का स्वाद लेते हुए हम चेरापूंजी पहुँचे। चेरापूंजी मेघालय का एक छोटा सा कस्बा है जिसे हम सभी बारिश की अधिकता के लिए जानते हैं। चेरापूंजी में देखने लायक बहुत कुछ है..... हर जगह फैली प्राकृतिक सुंदरता, ढेर सारे छोटे बड़े जलप्रपात , चूनापत्थर की पहाड़ियों के बीच बनी दुर्गम गुफाएँ और खासियों द्वारा पेड़ों की जड़ का इस्तेमाल कर आवगमन के लिए बनाए लिविंग रूट्स ब्रिज। पर दूसरी ओर इतनी प्राकृतिक संपदा की मिल्कियत सँभाले इस कस्बे में अच्छे होटलों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है। एक डेढ़ महीने पहले से आरक्षण की कोशिश करते रहने के बाद भी हमें यहाँ जगह नहीं मिली। मतलब ये कि हमें यहाँ सुबह चलकर शाम तक शिलांग लौट आना था।
This definitely shows that city of Cherrapunji loves Football चेरापूंजी का फुटबाल प्रेम
चेरापूंजी खासी पहाड़ियों के दक्षिणी सिरे पर बसा एक पठारी भूभाग है जो अपने आस पास की घाटियों से पाँच छः सौ मीटर ऊँचा है। पठार की इन खड़ी ढालों और गहरी घाटियाँ के दक्षिण में बाँग्लादेश का मैदानी इलाका है। जब बाँग्लादेश की ओर से मानसूनी हवाएँ चलती हैं तो जलवाष्प से भरी हवा ऊपर उठकर और ठंडी होती हुई इन खड़ी ढालों से टकराती है जिससे इस इलाके में भारी बारिश होती है। पठारी भाग के घने जंगलों में बने पानी के छोटे बड़े स्रोत मिलकर जब इन खड़ी ढालों से गिरते हैं तो झरनों का निर्माण करते हैं। चेरापूंजी में मैंनै वैसे तो करीब आधा दर्जन जलप्रपात देखे पर इनमें नोहकालिकाई का जलप्रपात मेरी स्मृतियों में हमेशा बना रहेगा।


नोहकालिकाई जाने का रास्ता चेरापूंजी के बाकी आकर्षणों की राह से थोड़ा हटकर है। पठारी इलाकों से बीच से गुजरती इस सड़क के दोनों ओर आश्चर्यजनक रूप से जंगल नदारद हैं। दूर दूर तक जंगली घास और झाड़ियों का ही साम्राज्य दिखाई देता है। आसपास के कुछ इलाके कोयले के खनन के लिए भी इस्तेमाल हो रहे हैं। शायद इसका असर यहाँ की वानस्पतिक संरचना पर पड़ा हो। पाँच छः किमी के इस रास्ते को पार करने के बाद गाड़ियों के जमावड़े को देखकर लगता है कि शायद जलप्रपात आ गया। पर दिक्कत ये है कि घने जंगलों के बीच से गिरते इस अद्भुत प्रपात के पास आप जा नहीं सकते। जहाँ से पर्यटकों को इसे देखने के लिए व्यू प्वाइंट बनाया गया है वहाँ से नीचे की ओर सीढ़ियाँ  तो जाती हैं पर वो झरने से काफी दूर ही खत्म हो जाती हैं।

Nohkalikai Falls नोहकालिकाई का जलप्रपात
पर दूर से ही इस झरने और इसके आस पास की मनोहारी छटा मन को लुभा जाती है। इतने हरे भरे दरख्तों के बीच पानी की गिरती मोटी धार और नीचे बनते नन्हे से नीले सरोवर की छवि नयनों में अटक सी जाती है और महीनों दिल से नहीं निकलती। अपने कैमरे के जूम से धारा और नीचे की जलराशि को क़ैद करने की कोशिश की तो वो एक फ्रेम  में समा ही नहीं पाई। आख़िर समाती भी तो कैसे? एक बार में इतनी ऊँचाई से गिरने वाला ये भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात ठहरा। हम खुशकिस्मत थे कि हमें ये प्रपात ऊपर से नीचे तक देखने का मौका मिला वर्ना अक्सर इसके मुहाने पर मानसूनी बादलों का डेरा रहता है जिसकी वजह से इसकी मुख्य धार और आस पास की हरियाली कैमरे की ज़द के बाहर हो जाती है।

...Where water falls from a height of 340m जहाँ तीन सौ चालीस मीटर की ऊँचाई से गिरता है पानी