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शनिवार, 12 मार्च 2016

कैसा दिखता है आकाश से मेघालय ? Kolkata to Shillong : An aerial view of Meghalaya !

कुछ साल पहले की बात है। हिंदी में यात्रा लेखन पर शोध कर रही एक उत्तर पूर्व की छात्रा ने मुझसे  सिक्किम यात्रा वृत्तांत से जुड़े सवाल पूछे थे। साथ ही ये प्रश्न भी किया था कि सिक्किम के आलावा उत्तर पूर्व के किसी राज्य में क्या आप नहीं गए?  मैंने उससे कहा सोच तो बहुत सालों से रहा हूँ पर लगता है मेघालय व असम जाना शीघ्र ही हो जाए। पर वो 'शीघ्र' उस बातचीत के तकरीबन दो साल बाद आया जब दुर्गा पूजा की छुट्टियों में मेरा शिलांग, चेरापूँजी, मावल्यान्नॉंग और गुवहाटी जाने का कार्यक्रम बना। 

The abode of Clouds मेघों का आलय (घर) मेघालय

पर पूजा की छुट्टियों के समय मेघालय की ओर रुख करने की सबसे बड़ी समस्या रहने की होती है। चेरापूँजी में ज्यादा ढंग के होटल नहीं है और जो हैं वो महीनों पहले पूरी तरह आरक्षित हो जाते हैं। इसलिए अपने मेघालय प्रवास का केंद्र मुझे मजबूरन शिलांग बनाना पड़ा।

कोलकाता से शिलांग पहुँचने के दो रास्ते हैं। कोलकाता से गुवहाटी की उड़ान लीजिए और फिर वहाँ से सड़क मार्ग से सौ किमी की दूरी तीन घंटे में सड़क मार्ग से तय कीजिए। दूसरा तरीका ये है कि कोलकाता से शिलांग की सीधी उड़ान भरिए। पर इसके लिए आपको आरक्षण काफी पहले से कराना होगा  क्यूँकि इस मार्ग पर सिर्फ एयर इंडिया का विमान ही उड़ान भरता है। हमारे समूह में कुछ लोग गुवहाटी होकर आ रहे थे जबकि मुझे कोलकाता से शिलांग की सीधी उड़ान भरनी थी।

At Kolkata Airport नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट कोलकाता
करीब पौने एक बजे हमने कोलकाता से उड़ान भरी। गंगा डेल्टा को पार किया। पर मेघालय की सीमा तक पहुँचने में तकरीबन घंटे भर का समय लग गया। डेढ़ घंटे की उड़ान के आख़िरी आधा घंटे में नज़रें एक बार खिड़की से क्या चिपकी, फिर तो चिपकी ही रह गयीं। मेघालय एक ऐसा राज्य है जहाँ बारिश बहुतायत में होती है। राज्य का सत्तर प्रतिशत इलाका जंगलों से भरा पूरा है। पठार की समतल भूमि पर धान की खेती भी खूब होती है। सो जिधर भी देखिए वहाँ हरियाली ही हरियाली नज़र आती है।

Aerial View, Meghalaya मेघालय के आकाशीय नज़ारे


बुधवार, 24 जून 2015

लहराते खेत... उँघते जंगल : देखिए वियना का आकाशीय नज़ारा ! Aerial View : Vienna, Austria

आसमान की ऊँचाइयों से नीचे दिखते बादलों के झुंड, डिब्बानुमा शहर, हरे भरे खेत खलिहान, पल पल अपना रास्ता बदलती नदी, पतली सर्पीली सड़कें और उस पर रेंगती गाड़ियाँ देखना विमान यात्राओं में मेरा प्रिय शगल रहा है। पर ये सारी छवियाँ अक्सर मन मस्तिष्क में अंकित हो कर रह जाती हैं। उन्हें कैमरे में क़ैद करने का सिर्फ एक मौका होता है और वो तब जब विमान अपने गन्तव्य तक पहुँचने के पहले शहर के आस पास के इलाकों पर मँडरा रहा होता है।जब भी खिड़की के पास मुझे बैठने का मौका मिलता है मैं इसी मौके का बेसब्री से इंतजार करता हूँ।

विदेशो में तो ये आनंद दूना हो जाता है क्यूंकि वहाँ के खेत खलिहान और शहर ऊपर से ही इतनी रंग बिरंगी छटा प्रस्तुत करते हैं कि मन बँधा का बँधा रह जाता है। आपको याद तो होगा ना  टोक्यो के हरे भरे धान के खेतों का जाल और बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स का सुंदर सुव्यवस्थित शहर, जिसे मैंने ब्लॉग के इन पन्नों पर आपको पहले दिखाया था।। तो चलिए आज आपको दिखाते हैं पूर्वी यूरोपीय देश आस्ट्रिया की राजधानी वियना के आकाशीय नज़ारे


दरअसल अपनी यूरोप यात्रा के दौरान लंदन जाते वक़्त हमें वियना के हवाई अड्डे पर अपना विमान बदलना था। विमान को सुबह छः साढ़े छः बजे के लगभग पहुँचना था। सुबह एप्पल जूस का रसपान करने के बाद मेरी तंद्रा पाँच बजे ही भंग हो चुकी थी। विमान ने नीचे आना शुरु नहीं किया था पर इतना पता चल रहा था कि सूर्योदय हो चुका है। अगले आधे घंटे में ज्यों ज्यों हम नीचे आते गए खूबसूत दृश्यों का काफिला नज़रों के सामने से गुजरता गया। तो आइए उनमें से क़ैद कुछ लमहों को देखिए मेरे कैमरे की नज़र से ..


यूरोप में पवनचक्कियाँ आम हैं। हालैंड तो खैर मशहूर ही है अपनी पवनचक्कियों के लिए..पर बाकी देशों में भी इनका खासा इस्तेमाल है।