Sunday, September 28, 2014

कैसा है जूनागढ़ किला, बीकानेर का संग्रहालय ? Museums inside Junagarh Fort, Bikaner

जूनागढ़ किले के अंदर बने महलों का दर्शन तो आपने पिछली बार ही कर लिया जिससे आपको उस पर मुगलकालीन स्थापत्य की झलक भी देखने को मिली। पर बीकानेर के राजाओं के रहन सहन को देखने के लिए आपको किले परिसर में मौज़ूद संग्रहालयों में विचरण करना होगा। मेहरानगढ़ किले की तरह जूनागढ़ किले का रखरखाव बढ़िया है। किले में महलों के इतिहास को समझने के लिए आपको जो गाइड दिए जाते हैं उनका अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता। किले के सांस्कृतिक संग्रहालय का नाम 'प्राचीना' है जो सुबह नौ बजे से शाम छः बजे तक खुला रहता है। इसके आलावा किले के अंदर निचले तल्ले पर महाराज गंगा सिंह के महल को भी संग्रहालय बना दिया गया है।

इस संग्रहालय में आप बीकानेर के शाही कमरे की साज सज्जा देख सकते हैं। उस समय के बनाए हस्त शिल्प, पहने जाने वाले वस्त्र, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, अस्त्र शस्त्र सब बड़े करीने से यहाँ प्रदर्शित किए गए हैं। तो चलिए आपको उन की कुछ झलकें दिखा देते हैं आज के इस फोटो फीचर में...

बीकानेर की महारानियाँ देशी साज श्रंगार के साथ यूरोपीय प्रसाधनों का भी इस्तेमाल करती थीं।संग्रहालय में यूरोप से मँगाए गए ऐसे कई प्रसाधन दिखाई देते हैं।  नीचे चित्र में आपको गेंडे की खाल से बनी ढाल भी दिखेगी जिस पर पीतल की जड़ाई का काम भी किया गया है। 
 

साथ ही है सुनहरी आभा लिए राजस्थान में निर्मित कप प्लेट जिन पर उस वक़्त के यूरोपीय डिजाइन का पूरा असर था।  खाली समय में मनोरंजन के लिए महल के अंदर ताश और चौपड़ जेसे खेल हुआ करते थे। रईसी का ये आलम था कि लोग बाग हाथी दाँत के बने ताश के पत्तों से खेलते थे। वैसे संग्रहालय में इनके आलावा बीकानेर की छवियों से अलंकृत ताश के पत्ते भी प्रदर्शित हैं। नीचे चित्र में देखिए चौपड़ की एक बिसात।



संग्रहालय में चंदन की लकड़ी से बने हस्त शिल्प अपने महीन काम की वज़ह से ध्यान खींचते हैं। खास तौर से नक्काशीदार तलवार और नीचे दिख रही बेहद खूबसूरत हाथ की ये पंखी।


संग्रहालय में जाकर और कहीं आप तसवीर खिंचाए ना खिचाएँ , विभिन्न कोटि के अलंकरणों और वस्त्र से सुसज्जित इस घोड़े के साथ तो फोटो खींचना बनता है।


महाराज गंगा सिंह का महल जो अब एक संग्रहालय बन चुका है में एक बड़ी अस्त्र शस्त्रों की दीर्घा है। इसमें उस वक़्त प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न हथियारों जैसे भाला, बरछी, तलवार आदि का जबरदस्त संग्रह है।


हल्के भूरे रंग की दीवार पर बनी ये सफेद नीली टाइल्स से बनी खिड़की बरबस अपनी ओर ध्यान खींच लेती है।


बादल महल के अंदर की साज सज्जा भले सफेद और नीले रंग का समावेश हो पर पीले रंग के बूटों से बना बादल महल का ये मुख्य दरवाजा भी कम आकर्षक नहीं है।


पूरे राजस्थान में गणगौर का त्योहार बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। गण से मतलब भगवान शिव से है जबकि गौर , गौरी यानि पार्वती से आया है। इसमें महिलाएँ पार्वती की विशेष पूजा करती हैं ताकि इन्हें अच्छा पति मिले और जिनकी शादी हो गई है उनके पति का भविष्य उज्ज्वल रहे। नीचे चित्र में सजी धजी माँ पार्वती का एक प्रदर्शित रूप


और ये है हाथी दाँत की बनी एक खड़ाऊँ



नीचे के चित्र को ध्यान से देखें । ये उस्ता कला ( Usta Art ) का एक बेहतरीन नमूना है।  दरअसल उस्ता शब्द उस्ताद से आया है और उस्ता कलाकार पहली बार राजा राय सिंह के प्रश्रय से बीकानेर पधारे। जूनागढ़ महल में इनके द्वारा की गई कलाकारी सबसे ज्यादा स्पष्ट रूप से अनूप महल में दिखाई देती है। वैसे करण महल और फूल महल में भी इस कला का प्रयोग हुआ है़। उस्ता कला को मोटे तौर पर दीवारों , छतों, शीशे, संगमरमर और लकड़ी पे की गई सुनहरी नक़्काशी से जाना जाता है़। नीचे चित्र में दर्पण का फ्रेम पर कौ गई नक़्काशी को आप देख सकते हैं ।



संग्रहालय में राजमहल में रहने वाली महिलाओं के शाही वस्त्रों को भी बखूबी प्रदर्शित किया गया है और एक पूरी दीर्घा इन पर समर्पित है ।


गंगा महल में रखा उस ज़माने का संचार उपकरण जो टेलीफोन एक्सेंज सा काम करता था।


सुराही पर चाँदी की नक़्काशी


तो ये तो थी संग्रहालय की एक झलक ! इस पोस्ट को मैं कोलकाता से लिख रहा हूँ जहाँ दुर्गा पूजा की गहमागहमी शुरु हो चुकी है। आप सब को भी मेरी तरफ़ से दुर्गा पूजा और दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

16 comments:

  1. बहुत अच्छी जानकारी है। संग्राहलय की सभी वस्तुएँ अच्छी है। दर्पण की खुबसूरती तो लाजबाब है। इसके अलावा संचार यंत्र काफी रोचक है।

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    1. शुक्रिया स्वर्ण लिपि लेख पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए !

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  2. आपका ब्लॉग RSD Web mideya पर भी लगाया गया हैँ । आपका यहाँ पर स्वागत हैँ।

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  3. Nice description.... have u seen the spoon used by maharajas for drinking soup...which contains a blade so that the soup doesn't get stuck yo their moustache...

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    1. Oh yes guide told us about that but couldn't take picture of that spoon. Thx for sharing this info here & do write your name while commenting :)

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  4. Very nice

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  5. Bahut achaa hai

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  6. Nice to see vernacular language in the blog post. Thanks to share with us this informative post about Junagarh fort.

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  7. Neeraj GuptaDecember 27, 2014

    Very nice Manish ji

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  8. Very very nice sir ji

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