Sunday, January 31, 2016

सफॉरी वर्ल्ड, बैंकाक : खिलाइए जिराफ़ को भोजन और देखिए हाथियों का नाच ! Safari World, Bangkok Part-II

सफारी वर्ल्ड के इस सफर की पिछली कड़ी में आपने पंक्षियों के संसार की एक झलक पाई। आज बात उन जंगली जानवरों की जिनसे हम अपनी इस यात्रा में कुछ फुट की दूरी तक पहुँच गए। जिराफ़ के तो इतने करीब कि वो आपनी लंबी जीभ तक आपके हाथों मे छुला दे। 


 तो आइए देखें बैंकॉक के सफारी पार्क का ये रूप आज की इस झांकी में..

Main Gate of Safari Park ये है सफारी पार्क का मुख्य द्वार
आप  थाइलैंड के किसी भी पार्क में जाइए हाथी के बिना उनकी कोई साज सज्जा पूरी नहीं होती। पार्क के मुख्य परिसर में टिकट लेने के बाद देश विदेश के अन्य यात्रियों के साथ आपको एक मिनी वैन मैं बैठा दिया जाता है। पार्क के टेढ़े मेरे रास्तों से गुजरने के बाद आप उस हिस्से  में पहुँचते हैं जहाँ वनराज का वास है।


पार्क के इस हिस्से को बाकी के खुले हिस्से से अलग  रखा गया है। इस हिस्से में घुसने के लिए एक यंत्रचालित गेट हैं जो ये सुनिश्चित करता है कि परिसर के अंदर गाड़ियों की संख्या एक सीमा से ज्यादा ना हो जाए। हमारी वैन के बाहर कोई जाली नहीं है। बस एक शीशे  की दीवार है। मन में सुरक्षा को लेकर थोड़ी शंका है पर वो अगले कुछ पलों में ही निर्मूल साबित होती है। हमें बताया जाता है कि कुछ ही देर बाद महाराजाधिराज की झलक मिलने ही वाली है।

The Lion King वनराज सिंह
हमें शेर अपने परिवार के साथ दिखाई पड़ता है। हमारी गाड़ी उससे करीब दस मीटर के फासले पर रुकती है पर उसका ध्यान शेरनी पर ही केंद्रित है। आपस में दौड़ भाग में व्यस्त उसका ध्यान हमारे समूह पर नहीं जाता। भाग दौड़ के बाद वो वापस आ कर सुस्ताने लगता है हमें फोटो खींचने का मौका देता हुआ।

Tiger in all its glory ..बाघ की सुंदरता की बात ही क्या !

कुछ किमी आगे बाघों का इलाका शुरु होता है। एक मचान पर दो बाघ दिन की धूप से अपने आपको बचाते उँघते दिखाई पड़ते हैं। उनका एक साथी पानी के पास धूनी रमाए बैठा है। उसकी नज़रें हमारे समूह से टकराती हैं। पर वो ये अच्छी तरह जानता है ये तो रोज़ के मुसाफ़िर हैं जिससे उसकी ज़िंदगी में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। इसलिए वो तुरंत ही मुंह फेर लेता है ।


Sunday, January 24, 2016

सफॉरी वर्ल्ड, बैंकाक : आइए ले चलें आपको पक्षियों के रंग बिरंगे संसार में Safari World, Bangkok Part-I

बैंकाक की यात्रा में मैं आपको पिछली दफ़े ले गया था शहर के मध्य से बहने वाली नदी चाओ फराया के नाइट क्रूज पर। अगर आप परिवार के साथ बैंकाक की यात्रा पर हों तो यहाँ के सफारी वर्ल्ड की यात्रा करना ना भूलें। यहाँ बिताया हर एक पल आप अपनी स्मृतियों में बरसों सँजोयें रहेंगे। आप भी सोच रहे होंगे कि आख़िर  ऐसा क्या है ऐसा इस सफारी पार्क में ?

दुनिया का सबसे रंग बिरंगा पक्षी मकाव  Macaw

दरअसल बैंकाक से चालीस किमी दूर स्थित इस पार्क को एक खुले चिड़ियाघर की तरह बनाया गया है जिसके अंदर आप भी  जानवरों व पक्षियों के संग होते हैं। यानि यहाँ आप होंगे अपनी कार में  और शेर,जेब्रा, जिराफ़ से लेकर तरह तरह के पक्षी  एकदम आपके बगल से यूँ गुजर जाएँगे कि आप हक्के बक्के ही रह जाएँ।

फ्लेमिंगों का एक झुंड Flamingos in all their glory

सफारी वर्ल्ड दो हिस्सों में बँटा हुआ है । एक तो सफारी पार्क जिसमें करीब पाँच सौ एकड़ भूमि जानवरों को खुले में विचरने के लिए छोड़ दी  गयी है जबकि बाकी के 180 एकड़ भूमि पर जलचरों का कब्जा है। दूसरे हिस्से में मेरीन पार्क है जहाँ जाने वालों के मनोरंजन के लिए तमाम शो की व्यवस्था है। बैंकांक शहर से सफारी वर्ल्ड की चालीस किमी की दूरी तय करने में करीब एक घंटा लगता है। सफारी पार्क के अंदर आप अपनी आरक्षित कार या फिर पार्क की मिनी बस से प्रवेश कर सकते हैं। इस खुले चिड़ियाघर के चारों ओर फैली सड़कों पर धीरे धीरे चलती आपकी गाड़ी कुल पौन घंटों का समय लेती है। तो चलिए आज की इस कड़ी में आपको मिलवाते हैं दुनिया के विभिन्न हिस्सों से यहाँ बसाए कुछ पक्षियों से.

सफारी पार्क की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि यहाँ आप उन पक्षियों को भी देख पाते हैं जो इस इलाके के सामान्यतः बांशिदे नहीं है। हमारा सफर शुरू ही हुआ था कि ठुम्मक ठम्मक की चाल से चलते इन मुकुटधारी क्रेन की जोड़ी दिखी तो ड्राइवर से कह कर इन्हें करीब से देखने के लिए गाड़ी रुकवा ली गई।

मुकुटधारी स्याह क्रेन, Gray crowned crane

केन्या, कांगो और यूगांडा में पाए जाने वाले इस सुन्दर व दुर्लभ पक्षी को वहाँ देख कर हम निहाल हो गए। इन पक्षियों की खूबी ये है कि प्रणय निवेदन करते समय नर और मादा दोनों ही नृत्य करते हैं। और तो और बेगानी शादी में अबदुल्ला दीवाना की तर्ज पर जब प्रेमी युगल ये नृत्य कर रहे होते हैं तो बाकी युवा क्रेन भी इस नाच में शामिल हो जाते हैं। वैसे एक खास बात और है इनकी। ये पक्षी एक देश के राष्ट्रीय ध्वज का भी हिस्सा हैं। बताइए तो कौन सा देश है वो?

Sunday, January 10, 2016

क्या आपने देखा है राँची का खूबसूरत जैव विविधता उद्यान ? The beauty of Bio Diversity park, Ranchi !

राँची शहर से बीस किमी की दूरी पर लालखटंगा की पठारी भूमि पर जंगलों के बीचो बीच एक उद्यान है जिसे झारखंड की जैव विविधता को दर्शाने व उसका संरक्षण कर पोषित करने की कोशिश की गई है। यूँ तो 542 हेक्टेयर मैं फैले इस प्राकृतिक बागीचे को खुले दो साल से ज्यादा का वक़्त हो गया है पर मुझे इसमें विचरने का मौका पिछले महीने ही मिला।

जैव विविधता उद्यान इतनी दूर दूर तक फैला है कि दिन भर में इसकी चौहद्दी नापना अच्छे अच्छों को थका सकता है। राँची के खुले आसमान में नवंबर दिसंबर की धूप इतनी सख़्त होती है कि अगर गलती से आपने दोपहर में गर्म कपड़े पहन रखे हों तो पसीने पसीने होते देर नहीं लगेगी। पर अंदर के नज़ारों ने अपने मोहपाश में ऐसा बाँधा कि कैसे दिन के पाँच घंटे इसमें बीते ये पता ही नहीं चला।


जैव विविधता उद्यान का सबसे मशहूर हिस्सा धनवंतरी औषधीय उद्यान के नाम से जाना जाता है जो यहाँ के मुख्य लॉन के दाहिनी तरफ़ है। जिन पौधों को मसाले या दवा के रूप में हम अक्सर इस्तेमाल करते हैं उन्हें करीब से देखना बड़ा दिलचस्प होता है।



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