Saturday, January 6, 2018

कैसे बीता इस मुसाफ़िर का पिछला साल ? Flashback 2017 Musafir Hoon Yaaron...

घूमने के लिहाज़ से पिछला साल बेहतरीन रहा। शुरुआत हुई  कच्छ की यात्रा से। जनवरी की ठंड ने रण उत्सव में कँपकपाया बहुत पर उन सर्द रातों में खुले आकाश के नीचे से दिखती चाँद के साथ असंख्य तारों की झिलमिलाहट मन को मुदित कर देने वाली थी। आकाशगंगा में छुपे कई जाने माने तारे और ग्रह पहली बार देखने का अवसर भी मिला। सबसे खूबसूरत मंज़र तो तब देखने को मिला जब चाँदनी रात में नमक के रेगिस्तान में जा पहुँचे। कच्छ की कहानियाँ पिछले साल तो लिख नहीं पाए पर इस साल उन्हें आपके सामने लाने का इरादा है।

कच्छ, गुजरात : मध्य रात्रि में चाँद की रोशनी से नहाया हुआ नमक का समंदर

कच्छ के बाद मु्ंबई का सफ़र अबकि बांद्रा की गलियों तक सीमित रहा। इस यात्रा के दौरान बांद्रा की वाल आर्ट के कुछ खूबसूरत नमूने देखने को मिले। ये भी समझ आया कि कला की हल्की सी छौंक किस तरह एक अनजान से मोहल्ले में जान फूँक देती है।

बांद्रा, मुंबई  जहाँ मिली मुझे अनारकली
वसंतोत्सव तो मैंने ढेर सारे फूलों के सानिध्य में राँची में मनाया पर मानसून में झारखंड की उन सड़कों पर विचरने का मन हुआ जो छोटे छोटे कस्बों और गाँवों से होते हुए नेतरहाट के बाँस और साल के जंगलों तक ले जाती थीं। धान और मकई के खेतों ने जहाँ मैदानों में दिल जीता वहीं छोटानागपुर की रानी नेतरहाट के जंगलों के सन्नाटे को हम अपनी इस यात्रा में बेहद करीब से सुन पाए।

मानसूनी रंग में रँगे नेतरहाट के जंगल

पर इस यात्रा का सबसे ज्यादा आनंद आया लोध जलप्रपात को देखने और उसमें छपाका लगाने में। झारखंड का सबसे ऊँचा जलप्रपात छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर घने जंगलों के बीच स्थित है और कहना ना होगा कि बरसात में ये इस राज्य का सबसे सुंदर जलप्रपात बन जाता है।

घने जंगलों के बीच स्थित लोध जलप्रपात जिसकी गूँज दूर तक सुनाई देती है।

प्रकृति के इस अद्भुत रूप का दर्शन करने के बाद मन हुआ कि मराठा शासकों के बीते वैभव की एक झलक ले लें और इस ललक ने मुझे पहुँचा दिया ग्वालियर। सिंधिया  खानदान का महल देख सचमुच दिल बाग बाग हो गया। सिंधिया घराने की दाद देनी होगी कि उन्होंने अपनी विरासत को अपने इस संग्रहालय में बखूबी सँभाल कर रखा है।

सिंधिया खानदान की धरोहर समेटे है ग्वालियर का जय विलास पैलेस
ग्वालियर से आगे बढ़कर फिर मैंने बुंदेलों की राजधानी ओरछा में धूनी रमाई। इस यात्रा में बतौर मार्गदर्शक कत्थक की मशहूर नृत्यांगना और इतिहास की जानकार नवीना ज़फ़ा का भी हमें साथ मिला। नवीना ने ओरछा के इतिहास के कुछ अनछुए पहलुओं से भी हमारे समूह को रूबरू करवाया। ओरछा और ग्वालियर यात्रा से जुड़े वृत्तांत भी आने वाले दिनों में आपके सामने होंगे।

ओरछा, मध्यप्रदेश : बेतवा नदी के किनारे बनी बुंदेल शासको की छतरियाँ
इस बार की दुर्गा पूजा राँची के साथ बंगाल के तेजी से उभरते शहर दुर्गापुर में बीती। आदिवासी कला से लेकर मिश्र की प्राचीन मूर्ति कला पंडालों की दीवारों पर उभर कर मुझे मंत्रमुग्ध कर गयी।

दुर्गापुर, बंगाल के एक दुर्गापूजा पंडाल की अंदरुनी साज सज्जा

फिर बारी आयी रवींद्रनाथ टैगोर की कर्म भूमि शांतिनिकेतन की। शांतिनिकेतन का सुरम्य वातावरण और वहाँ से निकली विभूतियों के शिल्प और उनसे जुड़े प्रसंगों को सुन मन टैगौर के व्यक्तित्व से और अभिभूत हो गया।

दीपावली के बाद का समय मेरा पश्चिमी घाट की हरी भरी वादियों में बीता। इस बार पुणे के आगा खाँ पैलेस से भी हो आए। वहाँ की मंदिर परिक्रमा हुई सो अलग। पुणे और उसके आस पास की इस हफ्ते भर की यात्रा में लवासा सिटी, पंचगणी और महाबलेश्वर जाने का अवसर मिला। महाबलेश्वर मेरी आशा से भी ज्यादा खूबसूरत निकला। बादलों के साथ धूप की लुका छिपी को देख आँखें तृप्त हो गयीं।

महाबलेश्वर, महाराष्ट में ये विहंगम दृश्य दिखता है आर्थर सीट से !
साल का अंत मध्य उड़ीसा की बारह सौ किमी लंबी सड़क यात्रा से समाप्त हुआ। इस यात्रा में महानदी के किनारे एक रात गुजारने का मौका मिला। वहीं चाँदीपुर समुद्र तट पर सुबह सूर्य भी अपनी मुँह दिखाई दे गया।

अंगुल, उड़ीसा :टीकरपाड़ा के पास महानदी के पार बालू का विशाल पाट

इसके आलावा पिछले साल मैंने आपको बंगाल के बिष्णुपुर से लेकर यूरोप में हालैंड, फ्रांस और स्विट्ज़रलैंड की हसीन वादियों के दर्शन करवाए। इस साल भी यूरोप यात्रा का बचा हिस्सा आपके सामने होगा। साथ ही होंगी लद्दाख के पुराने सफ़र से जुड़ी दास्तान।

लद्दाख जहाँ के अनुभव अभी बाँटने हैं आपसे

मुसाफ़िर हूँ यारों को पिछले साल यात्रा से जुड़े कुछ मशहूर जाल पृष्ठों की बेहतरीन ब्लॉग सूची में शामिल होने का सौभाग्य मिला।  Holidify द्वारा घोषित देश के सौ बेहतरीन ब्लॉगों की सूची में ये इकलौता हिंदी ब्लॉग रहा। साथ ही ये Thrillophilia और Top Blogs द्वारा चुने बेहतरीन ब्लागों का भी हिस्सा रहा।  साल के आख़िर में देश की सबसे बड़े ब्लागर समुदाय से जुड़ी संस्था Indiblogger ने जब तीस जूरी सदस्यों की मदद से विभिन्न श्रेणी के विजेताओं की घोषणा की तो उसमें अन्य अंग्रेजी ब्लागों के बीच मुसाफ़िर हूँ यारों भी शामिल हो पाया।  इसे झारखंड के हिंदी और अंग्रेजी ब्लागों में सबसे बेहतरीन ब्लॉग घोषित किया गया।

आपका चहेता ब्लॉग Indian Blogger Awards 2017 में पुरस्कृत !


ये सब इसलिए संभव हुआ कि पाठकों का साथ हमेशा इस ब्लॉग को मिलता रहा है। आशा है कि आप सभी इस ब्लॉग और इससे जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स Facebook Page Twitter handle Instagram Networked Blogs के माध्यम से इस ब्लॉग पर प्रस्तुत आलेखों और फोटो फीचर्स के प्रति अपनी राय ज़ाहिर करते रहेंगे। 

18 comments:

  1. बहुत बहुत बधाइयाँ आपको सर

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    1. धन्यवाद हर्षिता !

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  2. ढेरो बधाइयाँ व अनंत मंगल कामनाएं जी

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया इन शुभकामनाओं के लिए !

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  3. Your blog is indeed like a book - I enjoy reading it every time. The summary part is equally enjoyable. My best wishes to you for winning so many awards and please keep up the journey!

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    1. Nice to know that Sandeep ! Hope ur wishes come true :)

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  4. बहुत सी शुभकामनाएँ और बधाई आपको मनीष जी। आप की यात्रा यूँ ही चलती रहे और हमें कई नयी जगहों का पता रहे।

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    1. बिल्कुल। आशा है यूँ ही आपका साथ बना रहेगा।

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  5. आप घूमन्तू बने रहे और हम बैठे बैठे आन्नदित होतेरहे।

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    1. बस आप जैसों का साथ रहे... तो ये घुमन्तु "लिखन्तु" भी बना रहेगा। :)

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  6. रोचक फ्लैशबैक
    आपको जन्मदिन के साथ ही नववर्ष की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

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    1. कविता जी मेरा जन्म दिन मकर संक्राति यानि 14 को है। अग्रिम शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार !

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  7. बहुत बहुत बधाई आपको कच्छ से लेकर लेह ताज के सफर की और आपका आने वाला साल इससे भी ज्यादा घुमक्कड़ी करवाये इसकी अनेको अनेक शुभकामनाये

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    1. धन्यवाद इन शुभकामनाओं का !

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  8. मनीष जी वास्तव में घुम्मकड़ो के लिए आप का ब्लॉग बेहद पसंददीदा है। मैं इसका नियमित पाठक हु। लिखते भी आप बहुत अच्छा हैं। सोचता घूमने के लिए कैसे इतना समय और अर्थ की व्यवस्था कर लेते हैं। विजय सिंह, दैनिकभास्कर, मुम्बई

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    1. मेरा लेखन पसंद करने के लिए धन्यवाद ! ये सारी यात्राएँ सामान्य अवकाश और साल में मिलने वाली पन्द्रह दिनों की छुट्टियों में ही की गयी हैं। घूमना मेरी प्राथमिकता है और मेरी यात्राओं में आने जाने के आलावा अन्य खर्चे बजट वाले ही होते हैं।

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