Monday, February 1, 2010

आइए दिखाएँ आपको मुन्नार की ये खूबसूरत नर्सरी !

मुन्नार की खूबसूरत सुबह का जिक्र तो आपने पिछली पोस्ट में पढ़ा आइए आज देखते हैं केरल सरकार के वन विकास विभाग की ये खूबसूरत नर्सरी । फूलों के इन रंगों में हम सब तो रंग गए, देखें ये पुष्प और पादप आपका मन कितना रंग पाते हैं?




ये है 'टी रोज' (Tea Rose)अब चाय बागानों के बीच कोई गुलाब खिल जाए तो उसे क्या कहेंगे ? पर हुजूर ध्यान से इसकी पत्तियों और तने को देखिए। इसमें काँटे नहीं होते। है ना कमाल की बात!





है ना रंगों का ये अद्भुत मिश्रण बेजोड़ ?

अब शादी के बाद हनीमून पर जाना तो आजकल आम बात है। पर आप सोच रहे होंगे इस बात का इस पौधे से क्या संबंध ? इस पौधे की खासियत ये है कि शुरुआत में इसके चौड़े पत्ते हरे रंग के होते हैं जो बाद में सुर्ख लाल रंग ले लेते हैं। और ये लाली शायद हनीमून मना रहे जोड़ों की चेहरों की लाली से मिलती हो इसीलिए तो इनका नाम दिया गया हनीमून रेड (HoneyMoon Red) !

क्या आपको नहीं लगता कि यहाँ पत्तियाँ ही फूल बन गईं !



और ये अलग सा पौधा है पेपेरोमिया (Peperomia) का। पत्तों से निकलती लतरें इसे अद्भुत बनाती हैं।
और इन पंखुड़ियों का जादू तो दिल को ऍसा लुभा गया कि मन कह उठा

फूलों की तरह लब खोल कभी
खुशबू की जुबाँ में बोल कभी...

इस श्रृंखला की सारी कड़ियाँ

  1. यादें केरल की : भाग 1 - कैसा रहा राँची से कोचीन का 2300 किमी लंबा रेल का सफ़र
  2. यादें केरल की : भाग 2 - कोचीन का अप्पम, मेरीन ड्राइव और भाषायी उलटफेर...
  3. यादें केरल की : भाग 3 - आइए सैर करें बहुदेशीय ऍतिहासिक विरासतों के शहर कोच्चि यानी कोचीन की...
  4. यादें केरल की : भाग 4 कोच्चि से मुन्नार - टेढ़े मेढ़े रास्ते और मन मोहते चाय बागान
  5. यादें केरल की : भाग 5- मुन्नार में बिताई केरल की सबसे खूबसूरत रात और सुबह
  6. यादें केरल की : भाग 6 - मुन्नार की मट्टुपेट्टी झील, मखमली हरी दूब के कालीन और किस्सा ठिठुराती रात का !
  7. यादें केरल की : भाग 7 - अलविदा मुन्नार ! चलो चलें थेक्कड़ी की ओर..
  8. यादें केरल की भाग 8 : थेक्कड़ी - अफरातरफी, बदइंतजामी से जब हुए हम जैसे आम पर्यटक बेहाल !
  9. यादें केरल की भाग 9 : पेरियार का जंगल भ्रमण, लिपटती जोंकें और सफ़र कोट्टायम तक का..
  10. यादें केरल की भाग 10 -आइए सैर करें बैकवाटर्स की : अनूठा ग्रामीण जीवन, हरे भरे धान के खेत और नारियल वृक्षों की बहार..
  11. यादें केरल की भाग 11 :कोट्टायम से कोवलम सफ़र NH 47 का..
  12. यादें केरल की भाग 12 : कोवलम का समुद्र तट, मछुआरे और अनिवार्यता धोती की
  13. यादें केरल की समापन किश्त : केरल में बीता अंतिम दिन राजा रवि वर्मा की अद्भुत चित्रकला के साथ !

8 comments:

  1. फूलों के रंग से, दिल की कलम से...
    बहुत खूबसूरत पोस्ट !

    गुलाब को तो हमेशा कांटो के साथ जोड़कर ही देखा जाता है... बिना कांटो के पहली बार सुना.

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  2. वाह जी, मजा आ गया. अब हमारी मैडेम मुन्नार जाने की जिद पर अड़ी हैं. :)

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  3. बहुत अच्छे चित्र ।
    बढिया शुरुआत की मनीष , बेहद खुशी हुई ।
    इसे लिखते रहें और खूब खूब रोचक व उपयोगी जानकारियाँ दें हमें ,ढेरों चित्र दिखाएँ ।

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  4. अनुराग, अभिषेक, सुजाता और समीर जी चित्र आपको पसंद आए जानकर बेहद खुशी हुई।

    समीर भाई , भाभी जी सही कह रही हैं। यहाँ जाकर आपके कवि हृदय को अपार संतोष मिलेगा , ऍसा विश्वास है।

    सुजाता कोशिश तो यही रहेगी। देखूँ कितना सफल हो पाता हूँ ?

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  5. इतनी खूबसूरत फूलों की तस्वीरें देखकर आनंद आ गया...शुक्रिया अपने अनुभव हम सभी के साथ शेयर करने के लिए..

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  6. Mind blowing :)
    Tea Rose padha tha but kabhi socha nahi tha ke waqai mein aisa hai.. :) so that ws a good information shared -Thanks
    aur orchids bhai oonka kya hai oonki adbhudta to dekhne se hee banti hai
    Beautiful flowers I must say....I didnt know that one is called Honeymoon Red :D
    Cool

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  7. बहुत खूब ..मनीष जी बेहद सुंदर चित्रण...इस खूबसूरत प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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