Sunday, July 5, 2015

आराधना और प्राकृतिक सुंदरता का संगम : गणपतिपुले Beaches of Konkan : Ganpatipule !

जब भी भारत के पश्चिमी समुद्रतटों की चर्चा चलती है तो सबसे पहले गोवा के सुंदर तटों का ख्याल आता है। पर गोवा से उत्तर दक्षिणी महाराष्ट् में भी कई खूबसूरत समुद्र तट मौजूद हैं और गणपतिपुले इनमें से एक है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित गणपतिपुले एक छोटा सा गाँव था जो अब सैलानियों और उनकी आवाभगत में बने होटलों और रिसार्ट्स की वज़ह से अब एक कस्बे में तब्दील हो चुका है। 


महाराष्ट में इसके पहले मैं सिर्फ मुंबई और पुणे ही मुख्यतः देख पाया था। गोवा की यात्रा भी पहले हो चुकी थी। उस साल अक्टूबर की छुट्टियों में मुंबई के पहले आने वाले कस्बे अंबरनाथ में एक रिश्तेदार के यहाँ मेल मुलाकात के लिहाज़ से जाना था। तो उसके बाद दक्षिणी महाराष्ट्र जाने की योजना बन गई। हमलोग सपरिवार सड़क मार्ग से अम्बरनाथ से गणपतिपुले के लिए चल पड़े। मुंबई और पुणे से गणपतिपुले के समुद्र तट की दूरी क्रमशः 375 और 331 किमी है। वैसे कोंकण रेलवे से रत्नागिरी तक आया जा सकता है जो गणपतिपुले से मात्र पच्चीस किमी की दूरी पर है।


अम्बरनाथ से नौ बजे सुबह हमारा कुनबा निकल लिया। राष्ट्रीय राजमार्ग 66 से होते हुए हमें चार सौ से कुछ ज्यादा किमी की दूरी तय करने में साढ़े नौ घंटे लग गए। उसमें दिन में एक घंटे का लिया गया भोजन अवकाश शामिल था। गणपतिपुले में यूँ तो ठहरने के लिए समुद्र तट के बगल में बना MTDC का गेस्ट हाउस सबसे बढ़िया है पर वहाँ आरक्षण ना मिलने की वज़ह से हमने तट की ओर जाती सड़क पर स्थित होटल दुर्वांकुर में रात बिताई। दुर्वांकुर (Hotel Durvankur) एक बजट होटल है। समुद्र तट से पास भी है। हमें एक रात ही वहाँ रहना था और साफ सफाई और तट से निकटता की वजह से हमें वो पसंद भी आया।



सात बजे शाम के लगभग जब होटल से निकले तो सबसे पहले गणपति के दर्शन का विचार आया। आख़िर इस समुद्र तट के प्रहरी तो असल में वहीं हैं तभी तो पश्चिम की ओर मुख कर के समुद्र के रास्ते आने वाले हर आंगुतक पर अपनी पैनी निगाह रखते हैं। सामान्यतः भारतीय मंदिरों में देवी देवता पूर्वोन्मुखी होते हैं पर कहते हैं कि आज से चार सौ वर्ष पूर्व समुद्र के साथ लगती पहाड़ी के नीचे जब जमीन के अंदर से यहाँ भगवन प्रकट हुए तो उनका चेहरा पश्चिम की ओर ही था। 

गणपति का ये मंदिर छोटा सा ही है। मुख्य कक्ष के चारों ओर बनी गेरुए रंग की दीवारों में गणेश विभिन्न मुद्राओं में आसीन हैं। बाहर के चबूतरे पर आप चिंतन मनन कर सकते हैं या फिर अरब सागर से आती लहरें की आवाज़ में अपने को डुबो सकते हैं। दिन भर की सड़क यात्रा की थकान हम पर हावी होने लगी थी। सो मंदिर में कुछ वक़्त बिता कर हम वापस होटल की ओर चल पड़े।


सुबह सात बजे तक हम फिर तट के करीब पहुँच चुके थे। मंदिर से आगे बढ़ते ही नारियल के पेड़ और उनके पीछे की हरियाली देख मन हरा भरा हो गया। तट के बगल में पुराने गेस्ट हाउस हैं जो इस हरीतिमा के बीच समुद्र का सुंदर नज़ारा पेश करते हैं। गणपतिपुले के तट की एक विशेषता ये भी है कि यहाँ बालू से पटी धरती के मध्य में छोटी छोटी चट्टानें उभर आई हैं जो तट को एक अलग ही रूप में सँवार देती हैं। संभवतः सदियों पहले पहाड़ियाँ समुद्र को छूती हों और समय के साथ अपरदित होकर इस रूप में परिवर्तित हो गई होंगी।


शुरुआत में तट उतना साफ नहीं दिखा पर जैसे जैसे हम आगे बढ़ते गए दृश्य बदलता गया । अब तो सिर्फ समुद्र की लहरें थीं , रेत की चादर थी और उनके साथ थे हमारे कदमों के निशां !


दूर दूर तक वहाँ कोई पर्यटक मौजूद नहीं था। कुछ पल उस एकांत में  हम समुद्र की उठती गिरती लहरों को यूँ ही निहारते रहे। समुद्र तट के साथ बिताया यही समय तो मन में अद्भुत शांति का संचार करता है। तभी हमें लगा कि तट के उत्तरी किनारे पर जमीन से सटे कुछ हलचल सी हो रही है।


पास गए तो पता चला कि यहाँ तो इन नन्हे नन्हे पक्षियों की पूरी मज़लिस ही चल रही है। समुद्र के किनारे रेत के कोरों से अपना भोजन निकालते इन पक्षियों को देखना सुबह सुबह समुद्र तट पर बिताया सबसे यादगार लमहा था। तट के किनारे टहलते टहलते हम उस किनारे तक पहुँच चुके थे जहाँ अंदर ही अंदर MTDC के गेस्ट हाउस से समुद्र की ओर जाने वाला रास्ता निकलता है।


घंटे भर की चहलकदमी के बाद चाय की चुस्कियां लेने की इच्छा हो रही थी। MTDC का रेस्त्राँ भी सामने ही दिख रहा था। बड़े करीने से सामने कुर्सियाँ सजी थीं। बस और क्या चाहिए चाय की चुस्कियों और अतिथि गृह की हरियाली के बीच कुछ पल विश्राम किया गया। MTDC की उन कॉटेज मे रहने वाले पर्यटकों के लिए सुबह नहीं हुई थी। सीमेंट के बनें झोपड़ीनुमा घरों में से कहीं कहीं से छोटे बच्चे हम बिन बुलाए मेहमानों को दरवाजे की ओट से देख रहे थे। 


सामने आकाश में सफेद पक्षियों का झुंड पूरे इलाके की गश्त लगा रहा था। अचानक ही मेरा ध्यान बालू के साथ फैलती इन लतरों पर पड़ा। रेत में धानी और बैंगनी का ये संगम मुझे मुग्ध कर गया। लिहाज़ा मैं भी तट पर फैले उनके इस आँचल की गोद में बिछ गया।


सुबह की इस तफ़रीह और जलपान के बाद समुद्र की लहरों के साथ अठखेलियाँ करने का वक़्त था। सब खूब उछले कूदे। खूब मस्ती हुई। दोपहर हम मुंबई गोवा मार्ग पर आगे की ओर बढ़ गए। हमारा अगला पड़ाव क्या था जानने के लिए बने रहिएगा कोकण यात्रा से जुड़ी इस श्रंखला में...


कोंकण से जुड़ी इस श्रंखला की सारी कड़ियाँ  (Beaches of Konkan)
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12 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (06-07-2015) को "दुश्मनी को भूल कर रिश्ते बनाना सीखिए" (चर्चा अंक- 2028) (चर्चा अंक- 2028) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    1. हार्दिक आभार इसे चुनने के लिए !

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  2. बहुत अच्छा लगा ।

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  3. Have you visited Tarkali beach too?
    Another wonderful location beside sea shore.

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    1. Yeah will write about it soon . :) but not in the next post !

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  4. बहुत ही स्वच्छ और सुन्दर समुद्री किनारा

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    1. हाँ मंदिर से थोड़ा दूर निकलने पर इसके साफ सुथरे रूप की झलक मिलती है।

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  5. I have to go see Ganapatipule soon and this link is my newest inspiration. Thanks for sharing!

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    1. Not only Ganpatipule, there are many other beaches in Konkan which are worth a visit. Will deliberate abt them in my coming posts :)

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  6. Manishji, I am fond of reading all yr posts. I stayed in Ratnagiri and visited this place several times. No need to say that I loved this place. Long beach with silver coloured sand and beautiful temple is added attraction. In Konkan there are so many places to visit and explore...beaches, mountains, ghats, temples, forts....really beautiful specially in rainy season.

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    1. Nice to know that smile emoticon. I visited some other places around Ratnagiri during that visit . Will share my experience of Konkan in my coming posts !

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