Monday, December 19, 2016

क्या दिखता है लंदन आई से ? What you can see from London Eye ?

पिछली पोस्ट में आपने मेरे साथ लंदन शहर की परिक्रमा की और मिले मैडम तुसाद के पुतलों से । चलिए आज आपको दिखाते हैं लंदन की एक और पहचान से और ले चलते हैं आपको लंदन की आँख यानि London Eye पर।
लंदन आई के प्रतीक के सामने बैठे स्कूली बच्चे
लंदन के शहर की पहचान के तौर पर अब तक मैंने आपसे यहाँ के लाल रंग के टेलीफोन बूथ और डबल डेकर बसों का जिक्र किया। अब इनका ये लाल रंग दशकों तक रहे ना रहे पर लंदन की एक और पहचान है जो शायद सबसे दीर्घकालिक रहे और जिसे आप लंदन की सड़कों से गुजरते हुए हर समय देखेंगे़। ये पहचान हैं यहाँ की लंदन प्लेन ट्री। आपको बता दूँ कि शहरी लंदन के आधे से ज्यादा पेड़ लंदन प्लेन के ही हैं। 


वैसे लंदन प्लेन के इतिहास को देखें तो पाएँगे कि ये पेड़ लंदन के लिए बहुत पुराना भी नहीं सत्रहवीं शताब्दी में ये पेड़ पहली बार इस शहर में देखा गया। विशेषज्ञ इस पेड़ को अमेरिकी सिकामोर और यूरोप के ओरियंटल प्लेन का संकर मानते हैं। पर इतनी बड़ी तादाद में लंदन में ये पेड़ आए कैसे? औद्योगिक क्रांति से  लंदन में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बड़ी संख्या में इन पेड़ों को लगाया गया। इन पेड़ों की खासियत है कि ये वातावरण की गंदगी को अपने में समा लेते है और फिर अपनी गिरती छाल से वो गंदगी पेड़ के बाहर भी चली जाती है।

लंदन प्लेन London Plane tree

इस पेड़ की पत्तियों को देखकर आप सहज ही मेपल की पत्तियों से धोखा खा जाएँ। पर दोनों में क्या अंतर है ये नियाग्रा आन दि लेक के सफ़र में मैंने आपको बताया था। लंदन प्लेन की पत्तियाँ मेपल की तरह पतझड़ में लाल ना होकर पीली भूरी ही रहती हैं। तीस मीटर तक की लंबाई हासिल करने वाला ये पेड़ हर तरह की मिट्टी में उग आता है और इसकी जड़ें ज्यादा फैलती भी नहीं।

लंदन प्लेन ट्री आज के लंदन की एक और पहचान Leaves of London Plane
तकरीबन आधे घंटे के सफ़र के बाद हम लंदन आई के सामने थे। अब आपको दूर से ते ये अपने मेलों में लगने वाला एक साधारण सा झूला नज़र आएगा। दरअसल ये है भी वही 😄। पश्चिमी जगत में ये फेरीज़ व्हील के नाम से मशहूर है। जापान और कनाडा में इसके नमूने मैं पहले भी देख  चुका था। हमारे झूलों और विदेशों की इन फेरीज़ में दो मुख्य अंतर हैं। हमारे यहाँ इस तरह के झूले रोमांच पैदा करने के लिए गति से घुमाए जाए जाते हैं जबकि विदेशों में इनका मूल उद्देश्य ऊँचाई से शहर के दृश्यों का अवलोकन करना होता है। इसलिए इन्हें बिल्कुल मंथर गति से घुमाया जाता है।

लंदन आई फेरीज़ व्हील
अगर लंदन आई की बात करूँ तो ये एक सेकेंड में मात्र 26 सेमी का सफ़र तय करती है। 120 मीटर व्यास वाला इसका चक्र बनने के समय विश्व में  सबसे ऊँचा था । अब भी इसे यूरोप की सबसे ऊँची व्हील का सम्मान प्राप्त है। वैसे अंग्रेजों को लंदन आई बनाने का ख्याल कहाँ से आया? अब करते भी क्या ? चिरकालिक प्रतिद्वन्दी फ्रांस मे उन्नीसवी शताब्दी के अंत में एफिल टॉवर बनाकर मैदान पहले ही मार लिया था । लंदन ने जवाब में एक फेरीज़ व्हील बनाई जिसे Giant Wheel का नाम दिया गया था। 94 मीटर ऊँचे इस घूमते पहिये की उम्र जब बीस साल की थी तो इसे हटा लिया गया। पर लंदनवासियों को कोई तो बिंदु चाहिए था जिसकी ऊँचाइयों से वो शहर के केंद्र को देख सकें। लिहाज़ा एक नई फेरीज़ व्हील बनाई गई सत्रह साल पहले जो आजकल कोका कोला लंदन आई के नाम से जानी जाती है।

लंदन आई के बैठने का कक्ष London Eye's Capsule

हमारे झूलों की तरह इन फेरीज़ में बैठने का हिस्सा खुला नहीं रहता। आप शीशे के खाँचे में बंद रहते हैं। लंदन आई में ये खाँचा वातानुकूलित है। इसमें एक साथ दो दर्जन लोग बैठ और घूम भी सकते हैं।

हंगरफोर्ड ब्रिज Hungerford Bridge
लंदन आई थेम्स के दक्षिणी किनारे पर बनी  है। ऊपर उठते हुए इसके दक्षिण पूर्व  में सबसे पहले हमें हंगरफोर्ड ब्रिज नज़र आया जो कि एक रेलवे ब्रिज है। स्टील ट्रस संरचना पर आधारित ये पुल दूर से दिखने में बेहतरीन लगता है। इसके और आगे वाटरलू सड़क ब्रिज है। थेम्स नदी यहाँ से टॉवर ब्रिज की तरफ़ घुमाव लेती है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है इस पुल की नींव वाटरलू के युद्ध की जीत की खुशी में पड़ी थी।

वाटरलू पुल के पास घुमाव लेती थेम्स Waterloo Bridge

लंदन आई से सबसे खूबसूरत नज़ारा जुबली गार्डन का मिलता है। रानी एलिजाबेथ द्वितीय के शासन की सिलवर जुबली के उपलक्ष्य में इस पार्क को बनाया गया था। दो हजार बारह में लंदन ओलंपिक के ठीक पहले इस पार्क को इसकी गोल्डन जुबली के अवसर पर और खूबसूरत बनाने की क़वायद शुरु हुई और नतीजा आपके सामने है।

जुबली पार्क Jubilee Gardens
पार्क के एक हिस्से में लकड़ियों को बेतरतीब ढंग  से सजा कर उस पर एक जाल बनाया गया था जिसे बच्चे पूरी लगन से पार कर रहे थे वहीं दूसरी ओर युगल जोड़े पार्क की मखमली घास पर लेट कर लंदन की धूप का आनंद ले रहे थे।
जुबली पार्क Jubilee Gardens

जुबली पार्क Jubilee Gardens
लंदन की आँख से दिखने वाला अगला नज़ारा यहाँ की मशहूर बिग बेन और वेस्ट मिनिस्टर पैलेस का था। विश्व में लोकतंत्र के फैलाव में लंदन की इसी संसद में  कई अहम फैसले लिए गए । थेम्स नदी के उत्तरी किनारे पर बने इस महल में पहली बार संसद तेरहवीं शताब्दी में बैठी। हमारी लोक सभा और राज्य सभा के नामकरण का  प्रेरणास्रोत  यहीं का हाउस आफ कामन्स और हॉउस आफ लार्ड्स है।

बिग बेन और वेस्ट मिनिस्टर पैलेस
आपको जान कर अचरज होगा कि बिग बेन यानि क्लॉक टॉवर तक पहुँचने के लिए अंदर कोई लिफ्ट नहीं है। आज भी इसके ऊपर पहुँचने के लिए तीन सौ से ऊपर सीढ़ियाँ ख़ुद ही चढ़नी पड़ती हैं और ये सुविधा भी ब्रिटिश नागरिकों को ही उपलब्ध है।

सी लाइफ लंदन एक्वेरियम Sea Life London Aquarium
लंदन शहर रिवायतों का शहर है। यहाँ के लोगों का पहनावा, बातचीत करने का ढंग यूरोप के अन्य देशों से बिल्कुल अलग है। लंदन घूमते समय हमें वहाँ की परम्पराओं से जुड़ी कई बातें हमारी गाइड ने बताई जो तार्किक नहीं थी पर फिर भी लोग उनका पालन करते हैं। यही वजह है की ये देश यूरोप के अन्य देशों की  अपेक्षा दिल में एक अलग छाप छोड़ देता है।

परम्परागत परिधानों की परेड देखनी हो तो लंदन का रुख कीजिए :)
पर इस शहर का मिजाज़  धीरे धीरे ही सही अब बदल रहा है। इसका एक उदाहरण तो का शहरी विकास ही है। लंदन को बहुत दिनों तक गगनचुंबी इमारतों से परहेज़ था पर अब केन्द्रीय लंदन में हर तरफ़ आप ऐसी इमारतों को पाएँगे। हालांकि ये बदलाव आँखों को बहुत सुकून नहीं पहुँचाता।

ऊँची ऊँची इमारतों से घिरता हुआ संत पॉल कैथेड्रल High rise buildings stealing the beauty of London

लंदन के बाहर खेतों में पीले फूलों की बहार थी। दूर से हमें लगा कि कहीं ये सरसों तो नहीं पर वहाँ के लोगों से पता चला कि इन पौधों का प्रयोग पशुओं के चारे के तौर पर होता है। जो भी हो घुमावदार  सड़कों के किनारे मिनटों तक साथ चलते ये खेत आँखों को गज़ब का सुकून दे रहे थे। यूरोप के लुभावने दृश्यों में ये भी मेरे लिए एक यादगार था ।

लंदन के पार  पीले फूलों की बहार Outskirts of London
लंदन में दो दिन रहकर हम फिर एक नए सफ़र के लिए निकल रहे थे। ये सफ़र न आसमान के रास्ते था और ना ही सड़क मार्ग से । यानि रात भर का समुद्री क्रूज़ हमारा इंतज़ार कर रहा था। कौन सा देश था हमारा अगला गन्तव्य? जानिएगा मेरी यूरोप यात्रा की अगली कड़ी में।

यूरोप यात्रा में अब तक

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10 comments:

  1. सभी चित्र अत्यंत खूबसूरत हैं..बेहतरीन वर्णन..

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  2. शानदार वर्णन और उतनी ही बढ़िया फोटोग्राफी ज़िन्दगी आगे क्या गुल खिलाएगी यह तो मालुम नहीं पर यह पक्का है यूँही आप साथ बने रहे तो ज़िन्दगी का सफ़र तो शानदार होगा ......अगले सफ़र के इंतज़ार में

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    1. आपको ये आलेख व मेरे खींचे गए चित्र पसंद आए जान कर खुशी हुई।

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  3. लन्दन में दिल गार्डन गार्डन हो गया जी । बेहतरीन प्रस्तुति, शानदार चित्र , मनमोहक चित्रण !

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    1. पसंदगी का शुक्रिया !

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  4. बहुत सुन्दर फोटोग्राफी और आलेख..... फेरीज व्हील में डर नहीं लगता..? :p

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    1. उससे ज्यादा तो डर राँची की रथ यात्रा के साथ मेले में आए झूलों में लगता है। :) इनकी गति पर तो ध्यान दीजिए।

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  5. सर जी,मैं सूरज मिश्रा भदोही उत्तर प्रदेश से हु, ट्रेवल स्टोरीज का बहुत शौक है, आप की विदेश यात्राये हिंदी में सोने पर सुहागा लगती है, बहुत बढ़िया जारी रखियेगा।

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    1. शुक्रिया सूरज ! आप सब का प्यार रहा तो देशी और विदेशी यात्राएँ चलती रहेंगी। ब्लॉग या फेसबुक पर अपने विचारों से अवगत कराते रहिएगा।

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