सोमवार, 23 अप्रैल 2012

रंगीलो राजस्थान : मूली रे मूली तू क्यूँ हुई इतनी रंगीली ?

हमारा देश विविधता से भरा देश है। देश के एक कोने से दूसरे कोने में सफ़र करते वक़्त ना केवल लोगों की भाषा और पहनावे में फर्क आता है बल्कि वहाँ के पशु धन और शाक सब्जी भी विविधता लिए हुए होते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में अगर अपनी गौ माता को देखें तो निरीह सी लगेंगी पर वहीं राजस्थान में इन गायों की कद काठी और नुकीले सींग दोनों जबरदस्त होते हैं। 

जो इस चिट्ठे के पुराने हमसफ़र हैं ‌उन्हें याद होगा कि मुन्नार की यात्रा में हमें कैसी बड़ी बड़ी हरी मिर्चें देखने को मिली थीं। जिस तरह राजस्थान में उदयपुर के ग्रामीण इलाकों में बच्चे शरीफा बेचते नज़र आए वही केरल के मुन्नार में हमें जगह जगह हरे पत्तों के साथ तुरंत तोड़े हुए ताजे गाजर बेचती महिलाएँ नज़र आयीं।

वहीं माउंट आबू में जब हम गुरुशिखर की यात्रा पर निकले तो बीच के नाके पर हमने  इस रंग रंगीली मूली को देखा और एक नज़र में ही हम सभी इस पर फि़दा हो गए। स्वाद भी जनाब अपने तरफ़ मिलने वाली सफेद मूली से कहीं मीठा 


वैसे राजस्थान के रेगस्तानी इलाके में एक बार फिर हमारा ऍसे ही एक रंगीन फल से सामना हुआ। उसका स्वाद हम ले पाए या नहीं वो किस्सा तो बाद में जल्द ही हाज़िर होता हूँ गुरुशिखर की आनंददायक यात्रा का विवरण लेकर..

 मुसाफिर हूँ यारों हिंदी का एक यात्रा ब्लॉग

 माउंट आबू से जुड़ी इस श्रृंखला की सारी कड़ियाँ

30 टिप्‍पणियां:

  1. यही तो मज़ा है यात्रा का................हर प्रान्त के अलग फल फूल.....अलग भाषा...अलग सूरतें........
    गुरुशिखर की तैयारी है.......

    अनु

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    1. सही कह रही हैं आप सफ़र में मिलने वाली ये विविधता आनंद को और बढ़ा देती है।

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  2. सुंदर चित्र....मैं तो इसे कोई नई वैरायटी का सेब समझ रहा था ....बहुत अच्छे .

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    1. हा हा हा ! पास से लिया गया चित्र है ना इसीलिए आपको ऐसा प्रतीत हो रहा है।

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  3. Adbhut kism ki mooli prateet ho rahi hai manishji!maine kabhi dekhi bhi nahi isprakar ki mooli kya is ki seed Banaras me available hai

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    1. Beej agar mil bhi jaye to benaras jaisi garm jagah mein kahan ugne wali hai !

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    2. Maine bahut khayi hain ye mooliyaan. Got seeds from abroad & grew them at home. Not anymore. ‎@Amarsingh, You can find that from a good seed company. They'll mail you the seeds. Manish Kumar ji, it grows in Delhi weather too... needs care. :)

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  4. उत्तर
    1. हाँ जी ये मूली ज्यादा लंबी ना होकर गोल मटोल हो जाती है। अक्सर ठंडी जगहों पर ही ये ऐसे चटकीले रंगों में मिलती हैं। कई यूरोपीय देशों में लाल के आलावा गुलाबी रंग की मूलियाँ बहुतायत मिलती हैं।

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  5. .यहाँ मुंबई में तो ऐसी मूली मिल जाती है...
    चित्र में तो यह बिलकुल सेव जैस अलग रहा है...

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    1. रश्मि जी आपकी बात से डोकोमो का वो विज्ञापन याद आ गया जिसमें रणबीर कहते हैं कि फोटो पास से लिया गया है इस लिए इडली इतनी बड़ी नज़र आ रही है। दूर से देखोगे तो वैसी ही लगेगी जैसी प्लेट में दिख रही है। यहाँ भी माज़रा कुछ ऐसा ही है।

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  6. लाल मूली मैंने सहारनपुर यू़पी में भी देखी थीं और कभी दिल्ली में भी आती हैं ।

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  7. मूली की इतनी खूबसूरत तस्वीर पहले कभी नहीं देखी...

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    1. 'रंग' तो किसी को भी खूबसूरत बना देते हैं फिर ये तो निरी मूली है

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  8. मूली की यह किस्म राजिस्थान में पी जाती है मजा आ गया

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    1. ओह..हमने तो बस इसे खाया भर शायद अगली बार जाएँ तो जूस पी कर आएँ !

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  9. आपनें दिखा तो दिया पर अगर खाने को भी देते तो सचमुच मजा आ जाता..
    खैर.. लगता है देख कर ही संतोष करना पड़ेगा..
    :-)

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    1. हाँ जी इस आभासी दुनिया में तो सिर्फ आँखों से तृप्त होना पड़ता है।

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  10. achha laga ham bhi parichit hi gaye vinhinna pranton ki prakartik uaharon se.

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  11. अच्छा लगा देख कर ...यहाँ कनाडा में ज्यादातर ऐसी ही मूली मिलती है...
    सफ़ेद लम्बी मूली चाइनीज या फिर इंडियन दुकानों में ही मिलती है...
    आपका आभार..

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  12. माउण्‍ट आबू पर ऐसे ही कई अन्‍य मीठे फल भी मिल जाते हैं। अच्‍छी पोस्‍ट।

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