शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

चलिए जापान..पर पहले सुनिए जापान रेडिओ पर दिया गया मेरा साक्षात्कार !

पिछले डेढ़ महिने से ये ब्लॉग सुसुप्तावस्था में पड़ा है। अब करें भी तो क्या पहली बार विदेश यात्रा पर गए थे और वो भी जापान जहाँ सप्ताहांत के दो दिन छोड़कर जापानियों ने हमारा बाकी समय इस तरह सुनोयोजित तरीके से बाँटा हुआ था कि आप ब्लॉग लिखने के समय के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। और हफ्ते में शनिवार व रविवार को सुबह से ही हम कूच कर देते थे एक नए मुकाम के लिए, एक नए अनुभव की खोज़ में।

(चित्र में टोकियो टॉवर जो कुछ  महिनों पहले तक टोकियो की पहचान माना जाता था।)

इतनी लंबी अवधि का ट्रेंनिंग कार्यक्रम होने की वज़ह से मुझे जापानी लोगों की कार्यशैली, उनके तौर तरीके को करीब से देखने का मौका मिला। सच मानिए घुमक्कड़ी का मज़ा सिर्फ नई जगहों को देखने भर का नहीं होता। पूर्ण आनंद तो तब आता है जब आप जहाँ गए हैं उनकी संस्कृति को समझ पाते हैं। देखिए मैंने अपने इस ब्लॉग पर शुरुआत से घुमक्कड़ रिक स्टीवस की जो पंक्तियाँ साइड बार में लगाई हैं उन्हें आज फिर से दोहराने का मन कर रहा है..

यात्रा एक लत की तरह है, यह आपको खुशमिज़ाज और किसी एक जगह का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का नागरिक बना देती है। इसी की बदौलत जाना जा सकता है कि पृथ्वी एक घर है, जहाँ छः बिलियन से ज्यादा लोग बिल्कुल हमारी ही तरह महत्त्वपूर्ण व प्रेम, आतिथ्य, सौहार्द, मित्रता, सहानुभुति से सराबोर हैं। यात्रा व्यक्तित्व में बदलाव लाती है, परिपेक्ष्य में विस्तार करती है और जीवन के गुणों को नापने के नए तरीके सिखाती है।

और सच कहूँ तो मेरी इस जापान यात्रा ने रिक स्टीव्स के ये शब्द चरितार्थ कर दिए हैं। इन चालिस दिनों में हम पन्द्रह भारतीयों का समूह अधिकतर जापान के दक्षिणी पश्चिमी औद्योगिक शहर कीटाक्यूशू में रहा पर जापान के विभिन्न संयंत्रों को देखने के लिए हम टोकयो, क्योटो, ओसाका, कोबे और हिरोशिमा जैसे बड़े शहरों से भी गुजरे। जिस प्रेम और आतिथ्य का हमने स्वाद चखा उसे शब्दों में उतारना सरल नहीं है। फिर भी मेरी कोशिश होगी कि अगले कुछ महिनों में अपने अनुभवों को आप तक ईमानदारी तक पहुँचा सकूँ।

अपनी इस यात्रा के दौरान जापान की राष्ट्रीय प्रसारण सेवा NHK के हिंदी प्रभाग द्वारा मेरा एक साक्षात्कार भी लिया गया। कभी कभी जब बहुत सारे यादगार लमहे आपके ज़ेहन में आ जाते हैं तो मन तुरंत निर्णय नहीं ले पाता कि क्या कहें और क्या ना कहें। इस बातचीत के दौरान मेरी मानसिक परिस्थिति कुछ ऐसी ही रही।चूंकि ये बातचीत टेलीफोन के माध्यम से हो रही थी और फोन की दूसरी ओर मुनीश भाई थे इसलिए मुझे ऐसा लग रहा था कि ये बातचीत परिचितों की लंबी गप्प का हिस्सा है। बातचीत का आरंभिक भाग जापान में चल रही हमारी ट्रेनिंग के बारे में था जबकि दूसरे भाग में ज्यादा बातें जापान प्रवास के दौरान बटोरे मेरे अनुभवों के बारे में रहीं। ये बातचीत कल और परसों रेडिओ जापान की हिंदी सेवा पर दो भागों में प्रसारित हो चुकी है। तो इससे पहले जापान का विधिवत यात्रा संस्मरण शुरु हो आप पहले इस बकबक को झेल लीजिए।



और हाँ मेरा राजस्थान पर चल रहा यात्रा वृत्तांत माउंट आबू से आगे नहीं बढ़ पाया था। वो सिलसिला भी इस नई श्रृंखला के बाद या साथ साथ जारी रखने की कोशिश करूँगा। मुसाफिर हूँ यारों हिंदी का यात्रा ब्लॉग

24 टिप्‍पणियां:

  1. Good to have you back and blogging. I am sure there are many interesting stories out of Japan waiting for us.

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  2. Wow Must say grt job. Ur voice and way of talking is amazing

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  3. तोक्यो में आपसे बातचीत रेकॉर्ड करके मज़ा आया मनीष भाई । आशा है भारत पहुँच कर आप अनुभव ब्लौग पर जमकर लिखेंगे ।

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    1. जैसा कि मैं पहले भी आपको कह चुका हूँ आपकी आवाज़ का प्रशंसक पहले से था पर फोन पर सुनकर मुरीद हो गया। शुक्रिया जापान के बारे में अपनी राय साझा करने का यह अवसर देने के लिए।

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  4. सच है. घूमने वालों के लिये नित नया स्थान देखना एक लत ही हो जाती है..

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    1. लत इसलिए कि घूमना, लोगों को जानना समझना एक घुमक्कड़ को नई ऊर्जा से संचारित करता है।

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  5. Welcome back. Now the time is for interesting stories and photos. :)

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    1. थैंकू सर, मेरे लिए ये पहला ऐसा अनुभव था।

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    1. मैड हैटर देख के तो मैं घबड़ा गया। भाई बैटमैन का खूँखार शत्रु मेरे ब्लॉग पर कैसे धमक गया ? नीचे आपका नाम देखा तो राहत की साँस ली। फिर ये सोचा लोग अपने व्यक्तित्व से उलट निक कैसे सोच लेते हैं :p? बहरहाल आपको ये गपशप अच्छी लगी जानकर खुशी हुई।

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    2. oh main toh 'alice in wonderland' ki mad hatter hoon :D. batman na padha hai, na dekha hai, toh woh wala reference pata nahin tha before you pointed it out.

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  8. शानदार !
    जापानी श्रृंखला निश्चय ही रोचक रहेगी !

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  9. Dear Manish
    I have gone through your complete programme and am really impressed with your such a simple and sincere conversation about Japan and India, moreover the entire dicussion was very very impressive.

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  10. Dear Manish
    I heard the broadcast as sent by you. Its inspiring and makes us feel proud. Wish you good luck and best wishes.
    regards
    Puneet

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  11. Manish-ji, Namaskar! I always read your blog posts and find them very interesting. It was good to know about your recent trip to Japan. Having visited the land of rising sun many-a-times and also having lived there, I felt quite nostalgic to view some of those photos you had posted. By the way, since I myself have been a great fan of Japanese movies and possibly like any other GAIJIN (a foreigner, i.e. a non-Japanese) living in Japan, I came across this fabulous character named TORA-san; a simple and tenderhearted bachelor hawker, who I liked almost instantaneously and watched almost 20-25 movies of the series "Otoko wa Tsurai yo"! I just thought of sharing a link with you, just in case if you haven't heard about it. If you get some free time, you may try visiting here: http://www.japantimes.co.jp/text/nn20020608c1.html

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