गुरुवार, 25 अक्तूबर 2012

मेरी जापान यात्रा : माउंट साराकुरा बारिश और वो रात की जगमगाहट

जैसा कि पिछली पोस्ट में आपको बताया स्लोप कॉर से उतरते ही मौसम में आई तब्दीली साफ नज़र आ रही थी। शाम के छः बजने में अभी भी पन्द्रह मिनट बाकी थे। माउंट साराकूरा के शिखर पर एक रेस्ट्राँ भी था पर उसमें हमारे काम लायक ज्यादा कुछ था नहीं। इससे पहले कि मौसम और बिगड़ जाए हमने शिखर के आस पास फैले उद्यान से अलग अलग दिशा से दिखते दृश्यों को देख लेना उचित समझा। 

अभी हम शिखर से नीचे जाती सीढ़ियों से पास के उद्यान में बने व्यू प्वाइंट की ओर जा ही रहे थे कि बूँदा बाँदी शुरु हो गई। हम भाग कर उद्यान के दूसरे कोने में बनी छतरी के अंदर जमा हो गए। छतरी तक पहुँचते पहुँचते बारिश तेज़ हो चुकी थी। छतरी से दूसरे कोने का दृश्य तो दूर कुछ ही देर में हमें चारों ओर से बरसाती मेघों ने यूँ घेर लिया कि पचास मीटर ऊपर बना भोजनालय भी आँखों से ओझल हो गया। सबके कैमरे तुरत फुरत जेबों के अंदर आ गए। कुछ देर गपशप चली, गाने गाए गए पर बाहर ना बारिश थम रही थी ना धु्ध छटने का नाम ले रही थी। एक घंटे बिताने के बाद भी जब बारिश कम नहीं हुई तो हम सबने अनमने मन से भींगकर ही वापस भोजनालय तक जाने का निश्चय किया।

कुछ लोग तो बादलों की आवाजाही देखकर वापस लौटने का भी मन बनाने लगे पर मुझे पूरा यकीं था कि तेज़ हवा क साथ ये बादल भी छँट जाएँगे। ऐसा बीच बीच में कई बार हो भी रहा था पर जैसे ही बादलों का एक रेला कीटाक्यूशू शहर को पार करता उसके पीछे उसकी जगह भरने के लिए बादलों के और झुंड वापस आ जाते। बस बीच बीच में हमें शाम की परछाइयों में डूबते कीटाक्यूशू की कुछ झलकें नसीब हो जाती थीं।



इधर हम सब माउंट साराकुरा से दिखने वाले रात के दृश्य की आस लगाए बैठे थे उधर सूरज महाराज डूबने के लिए तैयार ही नहीं हो रहे थे। शाम के सात बजे इनके कुछ ऐसे मिज़ाज थे। बादलों के पीछे से निकल कर जब मन करता मुँह चिढ़ाकर वापस चले जाते।
 


दूर क्षितिज में शाम के हल्के अँधेरे के साथ सूर्य किरणों की सुनहरी लाल पट्टी करीब एक घंटे और हमारे साथ रही।


कोकुरा के कारखाने अभी भी दूर से धुआँ उगलते दिखाई दे रहे थे।


शाम के साढ़े सात बजने को थे पर अभी भी आसमान नीली गुलाबी आभा से प्रकाशित था। शाम के साढ़े सात बजने को थे पर अभी भी आसमान नीली गुलाबी आभा से प्रकाशित था। ब्लास्ट फ्रनेस के पास स्थित Amusement Park  Space World अब रोशनी से नहा उठा था।


आठ बजते ही सूर्य की आखिरी किरणें भी नेपथ्य में चली गयीं और रह गया रात के अँधेरे में प्रकाशमान कीटाक्यूशू शहर। हमेशा की तरह हममें से किसी के पास भी त्रिपाद (Tripod) भी नहीं था जिससे की कैमरे को स्थिर रख कर चित्र खींचे जा सकें। 


माउंट साराकुरा से दिखने वाले दृश्य को जापान अपने यहाँ के तीन प्रमुख रात्रि दृश्यों million dollar view में से एक मानता है। वैसे इस दृश्य को आप इंटरनेट पर यहाँ और अच्छे रूप में देख सकते हैं।

शहर की जगमगाती रोशनी को जी भर के निहारने के लिए मैं रेस्त्राँ की छत पर चला गया।  तेज हवाओं के बीच में चमकते दमकते कीटाक्यूशू शहर को देखना अविस्मरणीय अनुभव था।
ये देखें काले और सफेद भूतों का जमावड़ा....

रात्रि के साढ़े आठ बजे हमने माउंट साराकुरा से विदा ली इस संकल्प के साथ कि जापान से लौटने के पहले इसके शिखर तक पैदल पहुँचने की कोशिश जरूर की जाएगी। ख़ैर उस कोशिश की चर्चा में तो वक़्त है।
इस श्रृंखला की अगली कड़ी में करायी जाएगी आपको मोज़िको की सैर पर उससे पहले तैयार रहें जापान दर्पण में जापान का एक और ही रंग देखने के लिए... मुसाफिर हूँ यारों  हिंदी का एक यात्रा ब्लॉग

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपके साथ जापान का सूर्यास्त भी देख लिया . इसके लिए आभार

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    1. वैसे आगे साथ रहिएगा तो जापान का प्रसिद्ध सूर्योदय भी आप देख पाएँगे।

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  2. प्रकृति के रंग बहुत अद्भुत हैं ।

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  3. hanks for sharing with us your wonderful experiences and memories. We feel like having witnessed ourselves. एक मुसाफ़िर को दुनिया में क्या चाहिये, सिर्फ़ थोडी सी दिल में जगह चाहिये......

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  4. रात की जगमगाहट देख कर आनंद आ गया...| लेख अच्छा रहा आपका....

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  5. प्रशंसा के लिए शुक्रिया रीतेश और शालू !

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