Tuesday, January 24, 2017

क्यूकेनहॉफ ट्यूलिप गार्डन : देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए Keukenhof Tulip Garden, Holland

अपनी यूरोप यात्रा की योजना बनाते समय मुझे सबसे ज्यादा जिस जगह को देखने की तमन्ना थी वो था क्यूकेनहॉफ का ट्यूलिप उद्यान। फूलों के खेत होते होंगे ऐसा तो बचपन में कभी सोचा ही नहीं था। पहली बार जब सिलसिला के गीत देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए  में अमिताभ और रेखा को ट्यूलिप के इन बागों के बीच रोमांस करते देखा तो बाल मन अचरज से डूब गया। वाह ! ऐसी भी दुनिया में कोई जगह है जहाँ दूर दूर तक रंग बिरंगे फूलों के आलावा कुछ भी ना दिखाई दे। वो अस्सी का दशक था। तब तो हवाई जहाज में चढ़ना ही एक सपना था इसलिए इन फूलों तक पहुँचने का ख़्याल फिर मन में नहीं आया। 

क्यूकेनहॉफ ट्यूलिप गार्डन : देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए
पर कुछ साल पहले से जब  यूरोप जाने का ख़्याल आकार लेना लगा तो हालैंड का ये ट्यूलिप गार्डन मेरी सूची में सबसे पहले शामिल हो गया। इस उद्यान को देखने की हसरत रखने वालों के लिए सबसे बड़ी बाधा है इसका सीमित समय में खुलना। ट्यूलिप के खिलने का समय मार्च के मध्य से लेकर मई मध्य तक का  है और हमारे यहाँ स्कूलों  में गर्मी की छुट्टियाँ मई के महीने में शुरु होती है। मतलब अगर आप परिवार के साथ क्यूकेनहॉफ जाना चाहते हैं तो आपके पास चंद दिन ही बचते हैं। इसी वज़ह से जब अंत समय में थामस कुक ने हमसे अपने कार्यक्रम को बदलने की पेशकश की तो हमें उसे अस्वीकार करना पड़ा था क्यूँकि वैसा करने से हमें ये उद्यान देखने को नहीं मिलता। सच मानिए हमारा वो निर्णय बिल्कुल सही था क्यूँकि जिन चंद घंटों में हम फूलों को इस दुनिया के वासी रहे वो पल हम जीवन पर्यन्त नहीं भुला पाएँगे।

देखो मैंने देखा है ये इक सपना, फूलों के शहर में हो घर अपना
वैसे जानते हैं आख़िर क्यूकेनहॉफ का मतलब क्या है? क्यूकेनहॉफ यानि किचेन गार्डन। कहते हैं कि हॉलैंड  में  पन्द्रहवीं शताब्दी में ये शब्द प्रचलन मे आया जब  जंगलों से फलों और सब्जियों के पौधे लोग घर के आस पास लगाने लगे। जहाँ तक इस इलाके का सवाल है तो यहाँ क्यूकेनहॉफ कैसल 1641 ई में अस्तित्व में आया और बढ़ते बढ़ते दो सौ हेक्टेयर क्षेत्र में फैल गया।

पर आज जिस रूप में आप इस बागीचे को देख रहे हैं उसकी नींव लैडस्केप विशेषज्ञों द्वारा तब डाली गयी थी  जब हमारा देश आजादी के पहले संग्राम यानि 1857 के सिपाही विद्रोह में लीन था। चालीस के दशक में नीदरलैंड के ट्यूलिप उत्पादकों ने फैसला किया कि वो अपने उत्पाद की प्रदर्शनी इस बाग के माध्यम से लगाएँगे। 1950 से ये जगह आम जनता के लिए खोल दी गयी और तभी से हर साल लाखों लोग इसकी खूबसूरती का आनंद लेते रहे हैं। 

फूलों की बात हो और गीत एवम् कविताएँ ज़हन में ना आएँ ऐसा कैसे हो सकता है? तो आइए कुछ फिल्मी गीतों के साथ इन फूलों की सुंदरता का स्वाद चख लें। वैसे गीतों से याद आया कि प्रसिद्ध वादक हरि प्रसाद चौरसिया जी को इस बाग से खासा लगाव है और इसके करीब ही उन्होंने हालैंड में अपना एक ठिकाना भी बनाया है जहाँ वो अक्सर आते रहते  हैं ।

फिर कहीं कोई फूल खिला.  . चाहत ना कहो उसको


जिंदगी फूलों की नहीं फूलों की तरह महकी रहे

फूलों की तरह लब खोल कभी, खुशबू की जुबाँ में बोल कभी


इस बाग में वैसे अप्रैल में आना सबसे श्रेयस्कर है। मार्च अपेक्षाकृत ठंडा रहा है और मई के अंत तक फूलों की फसलें खेतों से कटने लगती हैं। हर साल यहाँ के लैंडस्केप विशेषज्ञ फूलों को लगाने व सजाने के नायाब तरीके ईज़ाद करते रहते हैं।
दीवाना मस्ताना हुआ दिल जाने कहाँ होके बहार आई
जब जब बहार आई और फूल मुस्कुराए,  मुझे तुम याद आए

कलियों ने घूँघट खोले हर फूल पे भँवरा डोले

बागों में बहार है : हाँ है, आज मंगलवार है : हाँ है बोलो इस ब्लॉग से प्यार है... :p :)


तेरा मेरा साथ रहे..धूप हो छाया हो दिन हो कि रात रहे

मैं आपको यहाँ की कितनी भी तसवीरें क्यूँ ना दिखा दूँ वो आँखों से देखी हुई सुंदरता का बस एक तुच्छ सा हिस्सा होगी। इसलिए अगर कभी आप हालैंड जाएँ तो इस बाग का रुख करना ना भूलें। समझ लें कि सोलह यूरो का टिकट जन्नत सरीखा ही होगा।  यहाँ का टिकट आप इंटरनेट पर भी पहले से आरक्षित कर सकते हैं। इस यात्रा के अंतिम चरण में आपके साथ कुछ वक़्त बिताएँगे नीदरलैंड्स (हालैंड) की राजधानी एमस्टर्डम में।


यूरोप यात्रा में अब तक
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30 comments:

  1. बेहतरीन ! लाजवाब ! अद्भुत ! अनुपम !

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    1. हाँ ये जगह इन सारे विशेषणों के लायक है :)

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  2. मनीष तुम्हारी कोशिश की वजह से ये खूबसूरत garden देख पाये. क्या मनमोहक फूल , रंगीले , रंगो का लाजावाब मिश्रण था . तारीफ इनकी देखरेख करने वालो की भी . तुमने याद ताजा करा दी .

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    1. हाँ सर, उन चंद घंटों का सफ़र सम्मोहित करने वाला था :)

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  3. अहा!! क्या गज़ब का नज़ारा है....
    काश कि कभी जा सकूँ मैं भी...बेहद खूबसूरत पोस्ट...
    इन फूलों में खुशबू भी है क्या? शायद नहीं....कुदरत ने अक्सर जिन फूलों को रंगत दी है उनको खुशबू से महरूम रखा है :-)

    शुक्रिया !!

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    1. हम्म सही कहा..हमारा गुलाब एक अपवाद है वैसे :)

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  4. ये सब नज़ारे देख दिल गार्डन गार्डन हो गया सच में बहुत ही खूबसूरत मनीष जी ....और बागो में बहार है हमें ना सिर्फ इस ब्लॉग से बल्कि आपके हर ब्लॉग से प्यार है ....

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    1. जानकर खुशी हुई कि ये सुंदरता तुम्हें भी उतनी ही प्यारी लगी। ये साथ बना रहे :)

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  5. कभी कभी कुछ सपने हम नहीं देखते है ..लेकिंन समय आने पे वो हम हकीकत मे देख लेते है..तो परम आनन्द होता है ..

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    1. दिल की बात कह दी आपने तो आशा जी :)

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  6. कौन देता है जान फूलों पर
    कौन करता है बात फूलों की ।

    उत्तरः- मनीष भाई!

    कुछ याद आया? हमें तो इसलिए याद आया कि:-

    फिर छिड़ी रात बात फूलों की
    रात है या बारात फूलों की ।

    आपका साथ, साथ फूलों का
    आपकी बात, बात फूलों की।

    आपने मख़दूम साहब की गज़ले ताज़ा कर दीं, ताज़े फूलों की तरह।

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    1. हा हा हा शुक्रिया ! बड़ी प्यारी ग़ज़ल की याद दिलाई आपने। आपकी बात से याद आया कि हम तो फूलों के इन खूबसूरत गलियारों से गुजरकर हर्षित और विस्मित दोनों थे पर हमारे एक सहयात्री जिनकी शादी हाल फिलहाल में हुई थी ये कहते हुए निकले कि आख़िर क्या था यहाँ जहाँ देखो एक तरह के फूल इससे अच्छा तो हम एमस्टर्डम के में खरीददारी कर रहे होते :)

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  7. :) फूलों वाले मौसम में फूलों का ज़िक्र छेड कर क़यामत ढा दी आपने....शुक्रिया

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    1. हा हा हा शुक्रिया मोहतरमा !

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  8. जी साहब! इस ब्लाग से प्यार है!!!

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  9. #Manish
    Bahut hi acha likhte hai aap.

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    1. तारीफ़ के लिए शुक्रिया गोविंद !

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  10. फूल तो सभी सुन्दर है लेकिन उससे ज्यादा सुन्दर उनके कैप्शन लगे

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  11. बहुत सुन्दर फूलो की चित्र है देख के दिल खुश हो जाता है और साथ में आपने जिस हिसाब से लिखा है ये लेख मुझे बहुत पसंद आया.

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    1. धन्यवाद सुमित !

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  12. बहुत कम लोगो को इस तरह अपने सपनो को जीने का मौका मिलता है...देखा एक ख्वाब तो मेरा पसंदीदा गीतों में से एक है....और आपने थॉमस कुक से संघर्ष करके इसको देखा है तो आपको बहुत बहुत धन्यवाद....है हमको इस ब्लॉग से प्यार है....

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    1. शुक्रिया! ये प्रेम बना रहे :)

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  13. Kya baat hai Manish Ji. Really honoured to read this Beautiful post.

    Kya kismat hai Phoolon ki:
    Khud toh Mehekte hi hain,
    Jo unhe todte hain, unhe bhi mehekate hain.
    Kaash humari insaniyat mein, thodi insaniyat bachi hoti,
    Toh hum bhi inn Phoolon se bahut kuch seekhte...

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    1. ब्लॉग पर पधारने के लिए शुक्रिया जतिन। सही कहा आपने फूलों के बारे में। बस उनसे इंसान इतना सीख ले कि
      फूलों की तरह लब खोल कभी
      खुशबू की जुबाँ में बोल कभी

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