मंगलवार, 24 नवंबर 2009

चित्र पहेली 10 : खा गए ना चकमा! जिन्हें आप सचमुच की इमारत समझ रहे थे वे थे कोलकाता के पूजा पंडाल......

इस बार की चित्र पहेली में कोलकाता के शिल्पकारों ने पाठकों को ऐसा दिग्भ्रमित किया की पहेली में दिखने वाली इमारतों को आप सभी सचमुच का मान बैठे। दरअसल इन नकली हवेलियों द्वारा शिल्पकारों ने कोलकाता के पुराने स्वरूप का चेहरा दिखाने की कोशिश की थी। मौका था इस साल की दुर्गा पूजा का ! यानि जर्जर हवेली और अंग्रेजों के ज़माने की साफ सुथरी इमारत की खासियत ये थी कि वे दोनों ही दुर्गा पूजा के पंडाल थे। विश्वास नहीं हो रहा तो चलिए मेरे साथ इन हवेलियों के अंदर...

दक्षिणी कोलकाता में जादवपुर और धाकुरिया के बीच में एक इलाका है जोधपुर पार्क (Jodhpur Park) और उसके नज़दीक ही है बाबूबागान। ये दोनों जगहें दुर्गा पूजा पंडालों के लिए जानी जाती हैं। तो सबसे पहले बात करते हैं बाबू बागान की जहाँ पर बनाया गया था प्लाइवुड और थर्मोकोल की सहायता से पुरानी जर्जर सी हवेली का ये सजीव प्रारूप।

इस दुर्गापूजा पंडाल की थीम भी बड़ी दिलचस्प थी। कलाकार रूपचंद्र कुंडू ने भगवान का रूप धारण कर कस्बों और गाँवों में घूमने वाले बहुरुपियों को ध्यान में रखकर इस प्रारूप को रचा। इमारत के अंदर पुरानी दुकानें,टूटती दीवारों पर देवी देवताओं के चित्र बनाए गए थे ताकि माहौल कुछ दशक पहले की झाँकी प्रस्तुत कर सके।

पंडाल के दोनों किनारों पर बनी सीढ़ियाँ दुर्गा पूजा पंडाल के पहले तल्ले पर ले जाती थीं जहाँ अनेक प्रकाशदीपों से सुसज्जित झाड़फानूस लगाया गया था।
और ठीक इसके सामने दुर्गा, लक्ष्मी, कार्तिक, गणेश और असुर की प्रतिमाएँ इस तरह से रची गई थीं मानों ऐसा लगे कि सामने सचमुच के बहुरुपिए खड़े हों। तो मान गए ना लोहा आप इन कारीगरों की मेहनत और अद्भुत सोच का।

(ऊपर के सभी चित्रों के छायाकार हैं मेरे सहकर्मी प्रताप कुमार गुहा)
दूसरे चित्र में अंग्रेजों के ज़माने में बनाई गई इमारत दिख रही थी। ये भी एक पूजा पंडाल था जो जोधपुर पार्क में लगाया गया था। प्लाइवुड थर्मोकोल और कार्डबोर्ड से रची इन इमारतों को इतने बेहतरीन तरीके से बनाया गया कि खिड़कियों की बनावट और वास्तुशिल्प का अध्ययन करते वक़्त आपके मन में ये ख्याल नहीं आया कि ये साज सज्जा नकली हो सकती है।

पिछली पोस्ट के चित्र में दिखाई दे रहे हवेली के सामने का बाग और मुस्तैदी से रक्षा करते पहरेदार ने आपके भ्रम को बढ़ाए रखने में मदद की। इसलिए छत के ऊपर का डिजाइन, बिल्कुल बेदाग दीवारें और चित्र के दाँयी ओर Entry का साइनबोर्ड भी आपकी नज़रों को नहीं खटका।


चित्र साभार : कुणाल गुहा

मुझे आशा थी कि कोलकाता से जुड़ा कोई व्यक्ति इस पहेली का सही उत्तर बता सकेगा। बाकी लोगों के लिए इतना अनुमान लगा लेना की हवेली नकली है काफी होता। फिर भी आप सब ने पूरी मेहनत से अपने अनुमान लगाए उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद। दरअसल मेरा उद्देश्य दुर्गापूजा के पुनीत पर्व पर हर साल बनाए जाने वाले इन अद्भुत पूजा पंडालों की ओर आपका ध्यान खींचना था।
इस चिट्ठे की अगली कुछ पोस्टों में आपको मैं कोलकाता की दुर्गापूजा के कुछ और नयनाभिराम पंडालों की सैर कराऊँगा।

7 टिप्‍पणियां:

  1. अद्भुत कलात्मक पण्डाल और सुन्दर प्रस्तुति । हार्दिक बधाई ।

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  2. बेहतरीन पंडाल बनाये.. जोधपुर पार्क मजा का गया..

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  3. कमाल की कलाकारी है जी
    सचमुच चकमा खा गये हम सब

    आपका बहुत-बहुत आभार इस ज्ञानवर्धन के लिये

    प्रणाम स्वीकार करें

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  4. Amezing!!! thanks a lot for sharing this...

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  5. सच में अद्भुत...नमन है कलाकारों की लाजवाब कलाकारी को...शुक्रिया आपका इन्हें दिखने का और हमें भरमाने का...:))
    नीरज

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  6. वाह....आपने भी चित्र पहेली शुरू कर दी .....कोई आसान सी पूछते ....हम तो ताऊ जी की पहेली में ही आज तक उत्तीर्ण नहीं हो पाए .....!!

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