सोमवार, 22 अगस्त 2011

चाँदीपुर समुद्र तट भाग 3 : दिन की मौज मस्ती और अलविदा.

दिन के बारह बजे मौसम बिल्कुल साफ हो गया था। इस बार चूँकि हमे पानी मरं छपाके लगाने थे इसलिए सूर्य की रोशनी में चमकते अपने अतिथि गृह सागर दर्शन को छोड़कर हम समुद्र के अंदर एक दूसरे से रेस लगाते हुए भागे।




करीब ढाई किमी चलने के बाद करीब घुटनों भर पानी मिला । वैसे आगर आप एक दो किमी और भी चल लें रो पानी कमर से ऊपर नहीं जाएगा। इसलिए यहाँ के लोग कहते हैं कि इस तट पर चाहे आप कितनी भी कोशिश कर लें आप समुद्र में डूबकर आत्म हत्या नहीं कर सकते।

अगर आपकों इन तटों पर नहानों हों तो पूरे पैर फैलाकर पानी में बैठ जाइए । लहरें फिर आकर आपको तर कर जाएँगी। एक बार पानी में गीले होने के बाद हमारी मौज मस्तियाँ शुरु हो गयीं। इस बार मैं धूप की वजह से काले चश्मे को पहन कर आया था। पानी में दो तीन डुबकियों के बाद ज्यूँ ही सिर बाहर निकाला बेटे ने कहा पापा आपका चश्मा कहाँ गया?  लगा कि हजार दो हजार का चूना तो लग ही गया पर गनीमत थी कि तेज धार ना होने के कारण अगली डुनबकी में चश्मा वहीं सुरक्षित मिल गया।

 समुद्र में दौड़ते भागते यूँ वक़्त गुजर गया कि पता ही नहीं चला...


चाँदीपुर के समुद्र तट का असली आनंद दूसरे समुद्र तटों से हटकर है। आप यकीन मानिए समुद्र के अंदर दो तीन किमी जब आप चल कर चारों ओर देखते हैं तो आपको दूर दूर तक पानी के सिवा और कुछ नज़र नहीं आता। बस वहाँ आप होते हैं और समुद्र होता है। एक ऐसा समुद्र जो आप को डराता नहीं भगाता नहीं। मन होता है कि समुद्र के पानी में शरीर को सहलाती हवाओं के बीच वहीं धूनी रमाकर बैठ जाएँ। इसलिए समुद्र में धमाचौकड़ी मचाते अपने समूह को छोड़कर आधे घंटे के लिए मैं बिल्कुल दूसरी तरफ़ निकल गया। चाँदीपुर  में समुद्र के साथ बिताए हुए वो पल आज भीयात्रा के सबसे यादगार लमहे हैं।




चाँदीपुर में रहने के लिए निजी होटल भी हैं। पर सरकारी पंत निवास में आरक्षण मिल जाए तो सागर दर्शन गेस्ट हाउस की तरह ही आपको तट पर जाने के लिए होटल से बाहर निकलना नहीं पड़ता। इसलिए अगर आप पुरी की यात्रा कर चुके हैं तो अगली बार उड़ीसा जाने पर एक दिन चाँदीपुर का भी चक्कर जरूर लगाएँ।
इस श्रृंखला की सारी कड़ियाँ

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह एक से बढ़कर एक चित्र. स्वर्ग लगता है देखने से तो.

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

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  3. ऐसा समुद्र तट तो हमने कभी नहीं देखा. हर जगह समुद्र से तो डर ही लगता है और हमेशा हम सुरक्षित इलाकों में ही अन्दर घुसे. यहाँ की तो बात ही कुछ और है. समुद्र है और नहीं भी.

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