सत्तर साल पहले विश्व में पहला परमाणु बम जापान में हिरोशिमा की धरती पर गिराया गया था। इस बम ने इस फलते फूलते शहर को अपने एक वार से ही उजाड़ कर रख दिया था। सत्तर हजार लोगों ने तुरंत और इतनी ही संख्या में घायलों ने भी छः महीनों के भीतर दम तोड़ दिया था। इनमें जापान के सामान्य नागरिकों के आलावा कोरिया और चीन से लाए गए मजदूर भी शामिल थे।
आज भी इतनी भयंकर त्रासदी के बावज़ूद परमाणु युद्ध का ख़तरा संसार से टला नहीं है। किसी का कुछ नहीं जाता ये कह कर कि यहाँ बम गिरा देंगे वहाँ तबाही मचा देंगे। कम से कम मानसिक रूप से विक्षिप्त ऐसे लोगों को हिरोशिमा के उस म्यूजियम की राह जरूर लेनी चाहिए जहाँ सत्तर साल बाद भी विध्वंस के कुछ अवशेष ज्यूँ के त्यूँ बचा के रखे गए हैं। तो चलिए आज मैं आपको ले चलता हूँ उस शहर में जहाँ की निर्दोष जनता को इस परमाणु बम की मार झेलनी पड़ी थी।
आज भी इतनी भयंकर त्रासदी के बावज़ूद परमाणु युद्ध का ख़तरा संसार से टला नहीं है। किसी का कुछ नहीं जाता ये कह कर कि यहाँ बम गिरा देंगे वहाँ तबाही मचा देंगे। कम से कम मानसिक रूप से विक्षिप्त ऐसे लोगों को हिरोशिमा के उस म्यूजियम की राह जरूर लेनी चाहिए जहाँ सत्तर साल बाद भी विध्वंस के कुछ अवशेष ज्यूँ के त्यूँ बचा के रखे गए हैं। तो चलिए आज मैं आपको ले चलता हूँ उस शहर में जहाँ की निर्दोष जनता को इस परमाणु बम की मार झेलनी पड़ी थी।
आज से तीन साल पूर्व जब मैंने हिरोशिमा की धरती पर कदम रखा था तो वो शहर मुझे
किसी दूसरे जापानी शहर से भिन्न नहीं लगा था। बुलेट ट्रेन से उतरकर हम
वहाँ की स्थानीय ट्रेन से पहले मियाजीमा स्थित शिंटो धर्मस्थल इत्सुकुशिमा
गए थे और वहाँ से लौट कर हिरोशिमा के विख्यात पीस मेमोरियल को देखने का
मौका मिला था। हिरोशिमा के मुख्य स्टेशन से पीस मेमोरियल की यात्रा करने का
सबसे आसान तरीका ट्राम से सफ़र करने का है। पन्द्रह मिनट के सफ़र के बाद
हम Genbaku स्टेशन से चंद कदमों के फ़ासले पर स्थित इन A Bomb dome के
भग्नावशेषों के सामने थे।
बीसवी शताब्दी के आरंभ (1915) में एक चेक वास्तुकार द्वारा बनाई गई इस इमारत को Hiroshima Prefectural Industrial Promotion Hall के नाम से जाना जाता था और अपने हरे गुंबद के लिए शहर में दूर से ही इस भवन को पहचाना जाता था । द्वितीय विश्व युद्ध के समय इसे जापानी सरकार के आंतरिक सुरक्षा विभाग ने अपने कार्य हेतु ले लिया था। सन 1945 में यु्द्ध अपने समापन दौर में था। जर्मनी आत्मसमर्पण कर चुका था पर जापानी सम्राट हिरोहितो संधि के मूड में नहीं थे। युद्ध को जल्द खत्म करने के उद्देश्य से अमेरिका ने परमाणु बम का पहला इस्तेमाल 6 अगस्त 1945 को सुबह सवा आठ बजे अपने B 29 लड़ाकू विमानों से किया।
बीसवी शताब्दी के आरंभ (1915) में एक चेक वास्तुकार द्वारा बनाई गई इस इमारत को Hiroshima Prefectural Industrial Promotion Hall के नाम से जाना जाता था और अपने हरे गुंबद के लिए शहर में दूर से ही इस भवन को पहचाना जाता था । द्वितीय विश्व युद्ध के समय इसे जापानी सरकार के आंतरिक सुरक्षा विभाग ने अपने कार्य हेतु ले लिया था। सन 1945 में यु्द्ध अपने समापन दौर में था। जर्मनी आत्मसमर्पण कर चुका था पर जापानी सम्राट हिरोहितो संधि के मूड में नहीं थे। युद्ध को जल्द खत्म करने के उद्देश्य से अमेरिका ने परमाणु बम का पहला इस्तेमाल 6 अगस्त 1945 को सुबह सवा आठ बजे अपने B 29 लड़ाकू विमानों से किया।


