Monday, June 24, 2019

कैसा था प्राचीन रोम ? Glimpses of Ancient Rome !

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इटली से जुड़े इस यात्रा वृतांत में आपने मेरे साथ सबसे पहले देखा फेरारी कारों का संग्रहालय और फिर पीसा की मीनार। पिछली कड़ी में आपको रोम के अनजाने स्वरूपों की कुछ झलकियाँ दिखाई थीं पर आज बारी है रोम शहर के गौरवशाली अतीत की कुछ खिड़कियों को खोलने की। तो तैयार हैं ना आप मेरे साथ इस सफ़र पर चलने के लिए...
पीसा से रोम की दूरी करीब साढ़े तीन सौ किमी है। पहले पहाड़ियों और फिर मैदानों से गुजरता ये रास्ता काफी हरा भरा है। खेती बाड़ी में इटली पीछे नहीं है। जहाँ इसके उत्तरी इलाके मुख्यतः खाद्यान्न और डेयरी से जुड़ी वस्तुओं का उत्पादन करते हैं वहीं जैसे जैसे आप मध्य से संकरे होते दक्षिणी इटली की ओर बढ़ते हैं, अंगूर के फार्म से लेकर भांति भांति के फल, सब्जियों और जैतून के खेत दिखने लगते हैं। मैं रास्ते भर इन वादियों का आनंद लेता रहा और चलती बस से इनमें से कुछ खूबसूरत  दृश्यों को कैमरे में क़ैद भी किया।
इटली के खेत खलिहान 

खेत खलिहानों को पार करते हुए अब हम रोम शहर के अंदर दाखिल हो चुके थे। बचपन में पढ़ा था कि रोम सात पहाड़ियों से मिल कर बना शहर है पर शहर में अब पहाड़ियों के ऊपर इस तरह निर्माण हो चुका है कि समझ ही नहीं आता कि कब एक पहाड़ी शुरु हुई और कब खत्म? जैसे ही रोम शहर में दाखिल हुए प्राचीन इमारतें और खंडहरों की झलकें मिलनी शुरू हो गयीं


रोम जैसे ऐतिहासिक शहर की विरासत को समझने और उसे आज के इटली से जोड़ने में तो महीनों का वक़्त भी कम ही जान पड़ेगा। इससे पहले मैं आपको रोम की ये छोटी सी झाँकी दिखाऊँ ये  बताना जरूरी है कि रोम भले  ही आज कैथलिक चर्च के अनुयायिओं का केंद्र माना जाता है पर  इस शहर ने 380 ई के बाद ही ईसाई धर्म को अंगीकार किया।

ईसाई धर्म के पहले, रोम गणतंत्र की धार्मिक परंपरा बहुत कुछ हिंदू धर्म जैसी थी। भगवान कई थे़। प्रत्येक शहर का अपना एक अलग इष्ट देवता था। अपने इष्ट देवों के आलावा रोम वासियों ने कई ग्रीक भगवानों को भी अपना लिया था। पूज्य  देवी देवताओं में सूर्यमंडल के  ग्रहों का विशेष स्थान था। इन ग्रहों में वृहस्पति यानि जुपिटर सबसे शक्तिशाली माना जाता था। यहाँ तक कि उसकी पत्नी जूनो और पुत्री मिनर्वा की भी पूजा होती थी। ग्रीस की सभ्यता से प्रभावित होने के चलते इन सब देवों की मूर्तियाँ मनुष्यों जैसी ही थीं।

हरक्यूलस विक्टर का मंदिर
रोमन मंदिरों के भीतरी कक्ष में इष्ट देवों को स्थापित किया जाता था। धार्मिक गतिविधियाँ जिनमें अनुष्ठान के साथ बलि की भी मान्यता थी वो कक्ष के बाहर संपादित की जाती थीं। हर मंदिर के बाहर का आँगन या बरामदा गोलाकार स्तंभों से सजा होता था जो ग्रीस की वास्तुकला से प्रभावित था।

कॉलोसियम की ओर जाते वक्त सबसे पहले मेरी नज़र हरक्यूलस विक्टर के मंदिर पर पड़ी। ये मंदिर ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी का बना मंदिर है जिसकी पहचान इसके चारों ओर बने वृताकार स्तंभ है। इसके समीप एक और मंदिर है जिसे Temple of Portunas भी कहा जाता है। पोरच्यूनस दरवाजे, तालों, मवेशियों और खलिहानों के देवता थे। ये सारी चीज़े उस वक़्त जनता के लिए कितनी कीमती रही होंगी आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं।

थोड़ा आगे बढ़ते ही एक किलेनुमा खंडहर नज़र आया। पता चला कि ये रोमन सम्राट डोमिशियन का बनाया महल था जिसकी अब कुछ बाहरी दीवारें ही खंडहर के रूप में बची हैं।

डोमस अगस्ताना (Domus  Augustana )
रोम के एक चौराहे के किनारे अपनी बस से उतरे। वहाँ से हम रोमन फोरम की ओर मुड़ गए। रोमन फोरम प्राचीन रोम की सारी प्रशासनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता था।




थोड़ी ही देर में सड़क की दाहिनी ओर दो छोटी पहाड़ियों के बीच के मैदानी हिस्से में खंडहरों का विशाल जाल दिखने लगा। ये खंडहर मुझे पहली नज़र में वैसे ही लगे जैसे भारत के मौर्यकालीन खंडहर। हमारे साथ एक जर्मन गाइड भी चल रही थीं जो नक्शे से रोमन फोरम के शानदार स्थापत्य के बारे में बता रही थीं। दिख रहे अवशेषों में प्रत्येक की अपनी एक अलग दास्तान थी क्यूँकि उन्हें इतिहास के अलग अलग कालखंडों में विभिन्न रोमन सम्राटों ने बनाया था। 

गाइड के बताए नाम पल्ले नहीं पड़ रहे थे। वो तो भला हो हमारी सिलेबस बनाने वालों का जिन्होंने स्कूल में यूरोप के इतिहास के बारे में कुछ पाठ रख छोड़े थे। दिमाग में सिर्फ उन्हीं योद्धाओं की बात घुस रही थी जिनके बारे में कभी इतिहास की किताबों या किस्से कहानियों में पढ़ा था।



रोमन फोरम के खंडहर

इसलिए गाइड ने जब रोम के महानायक जूलियस सीजर का जिक्र किया तो कान खड़े हो गए। सीजर ने सीनेट से लड़ भिड़ कर करीब 46 ईसा पूर्व रोम की सत्ता पर नियंत्रण स्थापित किया था। उसने अपनी जीत की खुशी में यहाँ अपना विजय स्तंभ और मंदिर बनवाया जो देवी वेनस को समर्पित था। आज यहाँ एक चबूतरा और स्तंभ ही दिखाई देते हैं जो 80 ई में फिर से बनवाए गए थे।

जूलियस सीजर का फोरम 
फोरम के पूर्वी सिरे में 130 ई में रोमन सम्राट हाद्रियन ने खुद का  डिजाइन किया हुआ एक विशाल मंदिर बनाया था जिसके दो अलग अलग कक्षों में वीनस और रोम देवियों की मूर्तियाँ स्थापित की गयी थीं।  वीनस  सुंदरता की देवी थीं वहीँ रोम की देवी रोम शहर और साम्राज्य की संरक्षक मानी जाती  थीं  आज की तारीख़ में यहाँ कोई मूर्ति बची नहीं है पर इसके मूल रूप में दो कक्ष थे जिसमें दोनों देवियां विपरीत दिशा में मंदिर की बाहरी परिधि के दोनों किनारों में पंक्तिबद्ध स्तंभ खड़े किए गए थे। स्तंभ के बीच का विशाल प्रांगण धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता था।

नीचे के चित्र में आप सिर्फ एक ओर के स्तम्भ देख पा  रहे हैं  जबकि इससे 100 मीटर की दूरी  पर इसके समानांतर स्तम्भों की एक और शृंखला  थी  ये परिसर लगभग डेढ़ सौ मीटर लम्बा था

रोम की देवी और वीनस का मंदिर 
रोमन फोरम के खंडहरों के किनारे किनारे चलते हुए आप इसके पूर्वी सिरे में स्थित कॉलोसियम तक पहुँच जाते हैं, जिसका शुमार विश्व में पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा देखी जाने वाली इमारत के बतौर होता है।

कॉलोसियम प्राचीन रोम में रंगभूमि या फिर अखाड़े के रूप में इस्तेमाल होने वाली एक वृहत इमारत थी जिसमें अलग अलग अनुमानों के अनुसार उस ज़माने में भी पचास से अस्सी हजार तक लोग बैठ सकते थे। ज़ाहिर है इतने लोग इकठ्ठे तभी होंगे जब कोई तमाशा या जलसा हो रहा हो। इनमें ग्लैडियेटर्स का युद्ध भी शामिल था। अंग्रेजी मूवी चैनल्स की कृपा से अब तक ग्लैडियेटर शब्द आपकी जुबान पर चढ़ ही गया होगा। अगर नहीं चढ़ा तो बता दूँ कि ये एक किस्म के लड़ाके होते थे जो अपने ही जैसे खूंखार लड़ाकों से युद्ध किया करते थे। किसी लड़ाके की प्रतिभा की परीक्षा लेने के लिए या फिर किसी अपराधी को दंड देने के लिए उसे खूंखार भूखे जानवरों के आगे कर दिया जाता था और जनता बड़े मजे से रोमन सीनेट के सदस्यों और बाद में राजाओं के साथ तमाशा देखा करती थी। 
कॉलोसियम, Colosseum
80 ई में बनी इस इमारत का बाद में धार्मिक अनुष्ठानों, रहने और कार्यशाला आयोजित के लिए इस्तेमाल होने लगा।  रोमन स्थापत्य की पहचान वाली अर्धवृताकार मेहराबों से इस कॉलोसियम की बाहरी दीवार अटी पड़ी है। उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका है। आधी खड़ी आधी टूटी ये दीवार इस कॉलोसियम की सुंदरता में चार चाँद लगाती है।

क्या आपको पता है कॉलोसियम का नाम और अस्तित्व का संबंध उसी रोमन सम्राट नीरो से है जिसके जुड़ी प्रसिद्ध लोकोक्ति "जब रोम जल रहा था तो नीरो बंसी बजा रहा था" का इस्तेमाल बहुधा हम अपने निष्ठुर शासकों के लिए करते हैं। रोम की विशाल आग 64 ई में लगी थी और बहुत सारे इतिहासकारों का मानना है कि रोम के एक हिस्से को खाली कर अपना विशाल महल बनवाने के लिए ये आग खुद नीरो ने ही लगवाई थी । इस आग से रोम शहर का दो तिहाई हिस्सा जल गया और नीरो ने सचमुच अपने नए महल का निर्माण भी बाद  में उस इलाक़े में शुरु करवाया। नीरो के बाद के फ्लावियन शासको ने रंगभूमि बनाने के लिए भी वैसा ही इलाका चुना जो इस आग में जलकर नष्ट हो गया था। उस ज़माने में वहाँ नीरो की एक मूर्ति थी जिसे कॉलोसस आफ नीरो के नाम से जाना जाता था। कहते हैं उस मूर्ति की वज़ह से ही रंगभूमि का नाम कॉलोसियम पड़ गया।

कॉलोसियम को अंदर से देखने के लिए बारह यूरो का टिकट है पर अगर आप महीने के प्रथम रविवार को वहाँ पहुँचेंगे तो उस दिन आपकी जेब खाली नहीं होगी पर हाँ लंबी पंक्तियों में लगने को तैयार रहें।

Arch of Constantine 
कॉलोसियम के सामने ही एक मेहराब है जिसे सम्राट कांस्टेनटाइन की मेहराब के नाम से जाना जाता है। ये मेहराब कॉलोसियम के बनने के लगभग 250 साल बाद बनी जब  कांस्टेनटाइन अपने पूर्ववर्ती राजा को हराकर रोम पहुँचे। उसके पहले रोम की गद्दी मैक्सेनटियस के हाथों में थी। उन्होंने अपने छोटे से शासनकाल में रोम के पुनरुद्धार की पुरज़ोर कोशिशें की थीं। कहते हैं कि ये मेहराब भी उन्हीं की देन है जिसके ऊपरी हिस्से में थोड़ा परिवर्तन ला कर कांस्टेनटाइन ने उसे अपने नाम का करा लिया। वैसे भी इतिहास के बहुत सारे पन्ने विजेताओं की आँखों ही लिखे जाते रहे हैं।


रोम के प्राचीन मंदिरों को देखने के बाद मैं विक्टर एमेनुएल द्वितीय की याद में बनाए गए स्मारक के सामने था। विक्टर एमेनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली के प्रथम राजा होने का दर्जा हासिल है। उन्नीसवीं शताब्दी में उनके देहांत के उपरांत इस इमारत को बनाया गया। इस इमारत को बनाने में रोमन फोरम के निर्माण में इस्तेमाल की गयी वास्तु कला के महत्त्वपूर्ण घटकों का इस्तेमाल किया गया।

सफेद संगमरमर से बनी इस विशाल ऊँची इमारत को दूर से ही देखा जा सकता है। ढेर सारी सीढ़ियाँ चढ़ कर आप इस इमारत के विशाल चबूतरे पर पहुँच जाते हैं। वहाँ आपको दो इटालवी सैनिक अपनी सैन्य वेशभूषा के साथ मूर्तिवत खड़े मिलेंगे।


यहाँ एक गुमनाम सैनिक की समाधि है जिसके सम्मान में ये सैनिक लगातार खड़े रहते हैं। समाधि के ठीक ऊपर रोम की देवी की मूर्ति बनी है। इमारत की छत पर विक्टर एमेनुएल द्वितीय घोड़े पर नज़र आते हैं। मुख्य इमारत के अंदर एक संग्रहालय है जो इटली के एकीकरण के समय की घटनाओं की जानकारी देता है।



रोम की इस यात्रा के बाद आप सबको अगली कड़ी में ले चलेंगे पोप के घर वैटिकन में। 
इटली यात्रा में अब तक
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4 comments:

  1. ये आपने रोम के बारे में बढ़िया जानकारी प्रस्तुत की

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    1. ये आलेख आपको पसंद आया जानकर खुशी हुई।

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  2. रोमन इतिहास से अवगत कराता एक सुंदर यात्रा विवरण..उत्सुकता बढ़ रही है मनीष जी..

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    1. कोशिश करूँगा कि आगे भी ये उत्सुकता बनी रहै।

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