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मंगलवार, 19 जून 2018

द्रास से रहगुज़र कारगिल की और मिलना हिंदी फिल्मों के एक संगीतकार से.. Road to Kargil !

श्रीनगर लेह राजमार्ग पर चलते हुए अब तक मैंने आपको सोनमर्गजोजिलाद्रास घाटी  और द्रास युद्ध स्मारक तक की सैर कराई। द्रास के युद्ध स्मारक और संग्रहालय को देखने के बाद हमारा अगला पड़ाव था कारगिल। पर इससे पहले कि मैं अपनी इस यात्रा के बारे में बताऊँ, लद्दाख जाने वालों के लिए बस यही कहना चाहूँगा कि ये एक ऐसा इलाका है जहाँ किसी भी पड़ाव से ज्यादा महत्त्वपूर्ण वहाँ तक पहुँचाने वाली रहगुज़र है। 
द्रास से चले अब हम कारगिल की ओर
अगर आपने लद्दाख के रास्तों को अपनी आँखों में क़ैद नहीं किया तो समझिए आपने लद्दाख को आत्मसात नहीं किया। बहुत से लोगों को ये रास्ते एकाकी और एकरूपता लिए नज़र आते हैं। इनके एकाकीपन पर मैं तो यही  कहूँगा कि इन इलाकों की शून्यता ही मन में गहन शांति का भाव लाती है। आपको अपने और करीब पहुँचाती है। मिट्टी के रंग के ये नंगे पहाड़ हर मोड़ पर अपना रूप बदलते हैं। इनके असाधारण रूपों से किसी का मन तो प्रफुल्लित होता है तो कोई इन रास्तों को बोरिंग कहकर एकदम से खारिज़ कर देता है। 


कलकल छलछल बहती द्रास
जहाँ तक मेरे व्यक्तिगत अनुभवों का सवाल है मुझे तो अपनी लगभग दस दिनों की कश्मीर लद्दाख यात्रा में मुझे तो इन रास्तों से प्यार  हो गया और इनकी खूबसूरती ही मेरी इस यात्रा का हासिल रहा। इसीलिए मैं आपको ये रास्ता चित्रों के माध्यम से लगातार दिखा रहा हूँ और आगे भी दिखाता रहूँगा और इसी कड़ी में आज देखिए द्रास से कारगिल तक की मेरी यात्रा की एक  झाँकी।

ऊपर नंगे पहाड़ और नीचे हरा भरा नदी का तट
द्रास से कारगिल की दूरी करीब 64 किमी है। द्रास घाटी के खुले चारागाहों से विपरीत कारगिल की ओर बढ़ती सड़क संकरी है और इसके दोनों ओर पहाड़ बेहद करीब लगभग साथ साथ चलते हैं। कारगिल और द्रास  से लगा ये इलाका  एक समय प्राचीन बलतिस्तान की एक तहसील  थी। जम्मू कश्मीर के डोगरा राजाओं ने उन्नीस वी शताब्दी के मध्य में बलतिस्तान और गिलगित के इलाकों पर अपना कब्जा जमाया था। उस समय इसका फैलाव उत्तर पश्चिम में स्कार्दू से लेकर नुब्रा घाटी के तुर्तुक तक था। 

कारगिल से 29 किमी पहले