मुसाफ़िर हूँ यारों पर यूँ तो आप मेरे साथ किसी नई जगह पर हमेशा जाते ही रहते हैं। पर आज का हमारा सफ़र थोड़ा अलग है। चलिए आज आपको ले चलता हूँ राँची के जे. एस. सी. ए. इंटरनेशनल स्टेडियम ( JSCA International Stadium) में जो पिछले साल ही बन कर तैयार हुआ है। वैसे क्रिकेट खेलना और कमेंट्री सुनना तो बचपन से ही मेरा प्रिय शगल रहा है। बात 1979 की है। भारत आस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज़ चल रही थी। मैं उस वक़्त दशहरे की छुट्टियों में नानी के यहाँ कानपुर गया हुआ था। क्रिकेट के प्रति मेरे उत्साह को देखते हुए मुझे कानपुर के ग्रीन पार्क में टेस्ट मैच के तीसरे दिन का खेल देखने भेजा गया था। घावरी की गेंदबाजी, रिक डार्लिंग का किरमानी द्वारा लिया असंभव सा कैच, दर्शकों द्वारा जब तब शीशे चमका कर विदेशी खिलाड़ियों को परेशान करना तीन दशकों के बाद भी स्मृतियों से बाहर नहीं गया है। इसीलिए जब पिछली बार राँची में हुए एक दिवसीय मैच को ना दिखा पाने की वज़ह से बेटे के चेहरे पर मायूसी दिखी तो अपना बचपन याद आ गया। यही वज़ह थी कि राँची में पहली बार जब IPL का मैच हुआ तो मई की गर्मी की परवाह ना करते हुए भी मैंने दो टिकट खरीद लिए।

मैच से एक दिन पहले तक राँची बुरी तरह तप रही थी। ग्यारह को तापमान 41-42 डिग्री के बीच डोल रहा था और बारह के लिए भी इसी तरह का पूर्वानुमान था। मैच वाले दिन मौसम ने अचानक करवट ली। धूप तो वैसी ही रही पर बीच बीच में हल्के बादल उसकी तपिश को कम करते रहे। तीन बजे तक मौसम बेहद सुहावना हो गया। यहाँ तक कि धूप भी नदारद ही हो गई।
टेस्ट क्रिकेट के माहौल के बाद सीधे IPL का मैच देखना एक बिल्कुल अलग तरह का अनुभव रहा। अब तक सुनता आया था कि IPL एक मनोरंजक सर्कस है।स्टेडियम में घुसते समझ भी आ गया कि ऐसा क्यूँ है? हाई डेसिबल पर बजता संगीत, रंग बिरंगे परिधानों में आए दर्शक, विज्ञापनों के साथ चमकती निओन लाइट्स, हर ओवर के बाद थिरकती चीयर लीडर्स और उनके बीच आतिशी क्रिकेट का रोमांच आपको मस्ती के मूड में ले तो आते ही हैं।
तो आइए आपको ले चलें इस खूबसूरत स्टेडियम के अंदर। इसका मुख्य द्वार नार्थ
पैवेलियन के नाम से जाना जाता है। हमारी सीटें इसकी दायीं तरफ़ थीं।