किसी नई जगह पर हम जाते हैं तो वहाँ की खूबसूरती को अपने क़ैमरे में क़ैद करने की कोशिश करते हैं। उस जगह के कुछ लोग , कुछ मंज़र, कुछ दिलचस्प बातें जरूर दिमाग में घर कर जाती हैं जैसे जैसे वक़्त बीतता है ये यादें धुंधली हो जाती हैं। पर जब एक कलाकार गाँवों, कस्बों, शहरों से गुजरता है, लोगों से मिलता है और उनके परिवेश को समझता है तो उसका प्रतिबिंब वो मन मस्तिष्क में बसा लेता है। फिर वही बिंब किसी कैनवस, किसी शिल्प पर यूँ उभरता है कि वो उन यादों को पुनर्जीवित कर देता है।
| Painting themes varied from people, nature and local culture |
फरवरी के आख़िरी सप्ताह में देश और विदेशों से कलाकारों का जमघट जब राँची के श्यामली स्थित रोज़ गार्डन में उतरा तो इन कलाकारों के मन की भावनाओं को कैनवस और तराशे जा रहे पत्थरों पर प्रत्यक्ष देखने का अवसर मिला। अक़्सर ऐसी कार्यशाला और प्रदर्शनी बड़े शहरों में लगा करती हैं पर International Friendship Art Workshop-cum-Exhibition के तहत पहली बार आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, थाइलैंड, नेपाल, बाँग्लादेश और भारत के लगभग तीस कलाकारों को काम करते और अपनी कलाकृतियों को अंतिम रूप देते देखने का मौका राँची के लोगों को मिला।
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| Rose Garden, Shyamali, Ranchi |
उद्यान के मुख्य भाग में बनी हुई पे्टिंग की प्रदर्शनी चल रही थी जब की
शिल्पकार और चित्रकार बागीचे के अलग अलग भागों में बने सफेद गुलाबी कक्ष के
अंदर अपने शिल्प और चित्रों को सँवार रहे थे। अपने काम में तल्लीन इन
कलाकारों को चित्रों और शिल्पों को मूर्त रूप देते देखना अपने आप में एक
अलग अनुभव था।
| Artist at work : Clockwise from left Manoj Sinha, Australia's Birgit Grapentin, Raghu Nath Sahu, Susant Panda & Bina Ramani |
